मणिपुर में 2027 जनगणना टलने पर संबित पात्रा ने जताई खुशी, बोले- लोगों की मांग का सम्मान

मणिपुर में 2027 की जनगणना स्थगित करने के केंद्र के फैसले का संबित पात्रा ने स्वागत किया। उन्होंने मोदी-शाह का आभार जताया और NRC पर अलग फैसले की बात कही।

BJP के उत्तर-पूर्व प्रभारी संबित पात्रा ने मणिपुर में 2027 की जनगणना स्थगित करने के केंद्र के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह राज्य के लोगों की मांगों को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय है। NRC पर उन्होंने अलग फैसला होने की बात कही।

इंफाल: मणिपुर में प्रस्तावित 2027 की जनगणना को टालने के केंद्र सरकार के फैसले का भारतीय जनता पार्टी के उत्तर-पूर्व प्रभारी संबित पात्रा ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि जनगणना स्थगित करने का निर्णय राज्य के लोगों की लंबे समय से उठ रही एक प्रमुख मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। पात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार मणिपुर के लोगों की चिंताओं को गंभीरता से समझ रही है।

संबित पात्रा 2 सितंबर को पार्टी की एक उच्चस्तरीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए इंफाल पहुंचे थे। उनके आगमन पर राज्यसभा सांसद ए. शारदा समेत BJP के कई नेताओं ने उनका स्वागत किया। इनमें के. शरत, पी. प्रेमानंद और देबेन सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी शामिल रहे। बैठक के दौरान राज्य की मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की गई।

जनगणना स्थगित करने के फैसले का स्वागत

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में संबित पात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मणिपुर को लेकर विशेष ध्यान रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न वर्गों की ओर से जनगणना को लेकर उठाई गई चिंताओं को केंद्र सरकार तक पहुंचाया गया था और इन मांगों पर गंभीरता से विचार किया गया।

पात्रा ने कहा कि केंद्र की ओर से जनगणना प्रक्रिया को टालने का निर्णय मणिपुर के लोगों की भावनाओं और मांगों को ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया।

उनके मुताबिक, जनगणना स्थगित करने का फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि इसके पीछे राज्य के लोगों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और नागरिक समाज संगठनों की ओर से उठाई गई मांगों की भूमिका रही है।

दिल्ली की उच्चस्तरीय बैठक में हुई थी चर्चा

संबित पात्रा ने हाल में नई दिल्ली में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक का भी उल्लेख किया। यह बैठक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई थी और इसमें मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह तथा राज्यपाल अजय कुमार भल्ला भी मौजूद थे।

पात्रा के अनुसार, बैठक में मणिपुर में जनगणना को लेकर उठ रहे मुद्दों और राज्य के विभिन्न वर्गों की चिंताओं पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर निर्णय लिया।

BJP नेता ने जनगणना स्थगित कराने की मांग को सामने रखने में मणिपुर के विधायकों और नागरिक समाज संगठनों की भूमिका को भी स्वीकार किया। उनका कहना था कि राज्य के लोगों की ओर से लगातार उठाई जा रही चिंताओं को केंद्र तक पहुंचाने में इन समूहों का योगदान महत्वपूर्ण रहा।

NRC के मुद्दे पर अलग से फैसला

मणिपुर में जनगणना के साथ राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी NRC को लेकर भी लंबे समय से चर्चा होती रही है। जब संबित पात्रा से NRC को अपडेट करने की मांग के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जनगणना स्थगित करना एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन NRC का विषय इससे अलग है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि NRC को लेकर फैसला उचित समय पर लिया जाएगा और इस संबंध में निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय के स्तर पर होगा। पात्रा ने संकेत दिया कि फिलहाल सरकार का ध्यान जनगणना से जुड़े मुद्दे को संभालने पर है और NRC की प्रक्रिया पर बाद में अलग से विचार किया जाएगा।

इस बयान के बाद मणिपुर में जनगणना और NRC दोनों मुद्दों को लेकर राजनीतिक चर्चा फिर तेज होने की संभावना है। हालांकि, पात्रा ने NRC की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई।

मणिपुर में जनगणना का मुद्दा क्यों अहम है?

मणिपुर में जनगणना को लेकर उठाई जा रही मांगों का संबंध राज्य की मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों से भी जोड़ा जाता है। राज्य में लंबे समय से समुदायों के बीच तनाव, विस्थापन और जनसंख्या से जुड़े सवाल सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे हैं।

जनगणना केवल आबादी की संख्या दर्ज करने की प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि इसके आंकड़े प्रशासनिक योजना, सरकारी संसाधनों के वितरण, विकास योजनाओं और विभिन्न नीतिगत फैसलों के लिए भी इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में किसी राज्य में जनगणना के समय या प्रक्रिया को लेकर उठने वाली चिंताओं का व्यापक प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभाव हो सकता है।

मणिपुर में विभिन्न संगठनों ने समय-समय पर जनसंख्या आंकड़ों की विश्वसनीयता और प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए हैं। इसी पृष्ठभूमि में जनगणना स्थगित करने का केंद्र का फैसला राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

BJP ने फैसले को बताया लोगों की चिंताओं का सम्मान

संबित पात्रा ने कहा कि केंद्र सरकार का फैसला मणिपुर के लोगों की मांगों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने राज्य के लोगों से इस निर्णय को सकारात्मक रूप से देखने की अपील की।

उनका कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य की परिस्थितियों और स्थानीय लोगों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कदम उठाया है। पात्रा ने यह भी कहा कि सरकार राज्य के मुद्दों को गंभीरता से ले रही है और आवश्यक निर्णय उचित स्तर पर लिए जा रहे हैं। BJP नेता का यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी मणिपुर में संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत करने पर भी जोर दे रही है। इंफाल में हुई उच्चस्तरीय बैठक को इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है।

जनगणना स्थगित होने से आगे की प्रक्रिया पर नजर

केंद्र के फैसले के बाद अब मणिपुर में जनगणना की नई समयसीमा और आगे की प्रक्रिया को लेकर लोगों की नजर सरकार पर रहेगी। जनगणना को कब और किस तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल BJP ने इस फैसले को राज्य की जनता की मांगों के प्रति केंद्र की प्रतिक्रिया के रूप में पेश किया है। वहीं, NRC का मुद्दा अलग प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने की बात कही गई है।

मणिपुर जैसे संवेदनशील राज्य में जनसंख्या संबंधी आंकड़ों का महत्व काफी अधिक है। इसलिए जनगणना को लेकर किसी भी निर्णय का असर केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव भी हो सकता है।

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