सबसे कीमती तोहफ़ा

सबसे कीमती तोहफ़ा
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यह कहानी एक छोटे लड़के रोहन और उसके बेहद अमीर लेकिन व्यस्त पिता की है। रोहन के पास दुनिया के सारे महंगे खिलौने और सुविधाएँ थीं, लेकिन वह दिल से खुश नहीं था। अपने जन्मदिन पर उसने अपने पिता से एक ऐसा अनोखा तोहफ़ा माँगा, जिसने उसके पिता की आँखों से काम की पट्टी हटा दी और उन्हें रिश्तों की असली अहमियत समझाई।

कहानी

मिस्टर खन्ना शहर के सबसे बड़े व्यापारियों में से एक थे। उनके पास बड़ा बंगला, महंगी गाड़ियाँ और नौकर-चाकर सब कुछ था। लेकिन उनके पास अगर किसी चीज़ की कमी थी, तो वह था, 'वक्त'। वे सुबह रोहन के उठने से पहले काम पर निकल जाते और रात को जब लौटते, तब तक रोहन सो चुका होता था।

रोहन अब 8 साल का होने वाला था। उसका कमरा महंगे वीडियो गेम्स और रिमोट कंट्रोल कारों से भरा पड़ा था, लेकिन वह अक्सर अपनी खिड़की पर बैठकर दूसरे बच्चों को अपने पापा के साथ पार्क में खेलते हुए देखता रहता था।

रोहन के जन्मदिन की सुबह, मिस्टर खन्ना ने अपने लैपटॉप से नज़र हटाए बिना कहा, 'हैप्पी बर्थडे बेटा! आज शाम को मैंने तुम्हारे लिए एक बहुत बड़ी पार्टी रखी है। बताओ, तुम्हें तोहफ़े में क्या चाहिए? नया प्ले-स्टेशन या कोई रोबोट?'

रोहन कुछ देर चुप रहा। फिर उसने धीरे से पूछा, 'पापा, क्या मैं आपसे एक सवाल पूछ सकता हूँ?' मिस्टर खन्ना ने चश्मा उतारते हुए कहा, 'हाँ-हाँ पूछो, जल्दी पूछो मुझे मीटिंग के लिए निकलना है।'

रोहन ने मासूमियत से पूछा, 'पापा, आप एक घंटे में कितने पैसे कमाते हैं?' मिस्टर खन्ना को यह सवाल अजीब लगा, लेकिन उन्होंने शान से जवाब दिया, 'बेटा, मैं एक घंटे में लगभग 2000 रुपये कमा लेता हूँ। लेकिन तुम यह क्यों पूछ रहे हो?'

रोहन ने सिर झुका लिया और कहा, 'पापा, क्या आप मुझे 1000 रुपये उधार दे सकते हैं?' यह सुनकर मिस्टर खन्ना को गुस्सा आ गया। 'मैंने तुम्हें सब कुछ दिया है, फिर भी तुम पैसे माँग रहे हो? क्या तुम्हें उन फालतू खिलौनों के लिए पैसे चाहिए? जाओ अपने कमरे में!'

रोहन की आँखों में आँसू आ गए और वह चुपचाप अपने कमरे में चला गया।

थोड़ी देर बाद, जब मिस्टर खन्ना का गुस्सा शांत हुआ, तो उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्होंने सोचा, 'शायद बच्चे को सच में किसी चीज़ की ज़रूरत होगी।' वे रोहन के कमरे में गए। रोहन बिस्तर पर मुँह छिपाकर लेटा था।

'क्या तुम सो रहे हो बेटा?' उन्होंने धीरे से पूछा। 'नहीं पापा,' रोहन ने उठते हुए कहा। मिस्टर खन्ना ने जेब से 1000 रुपये का नोट निकाला और रोहन के हाथ में थमा दिया। 'ये लो तुम्हारे पैसे। माफ़ करना, मैं थोड़ा काम के तनाव में था।'

रोहन मुस्कुराया। उसने अपने तकिए के नीचे से अपनी गुल्लक निकाली और उसे ज़मीन पर उलट दिया। उसमें से ढेर सारे सिक्के और कुछ मुड़े-तुड़े नोट निकले।

मिस्टर खन्ना हैरान थे। 'तुम्हारे पास पहले से पैसे थे, तो तुमने और क्यों माँगे?'

रोहन ने धीरे-धीरे उन सिक्कों और नोटों को गिना। फिर उसने पापा की दी हुई 1000 की नोट उसमें मिलाई और सारे पैसे अपने पिता की तरफ बढ़ाते हुए बोला, 'पापा, अब मेरे पास पूरे 2000 रुपये हैं। क्या अब मैं आपका 'एक घंटा' खरीद सकता हूँ? प्लीज, कल आप घर जल्दी आ जाइएगा। मैं आपके साथ डिनर करना चाहता हूँ और खेलना चाहता हूँ।'

यह सुनकर मिस्टर खन्ना सन्न रह गए। उनके हाथ से फाइल और फ़ोन छूट गया। जिस समय और पैसे के पीछे वे दिन-रात भाग रहे थे, आज उनके ही बेटे ने उन्हें उस पैसे की असली औकात दिखा दी थी।

उनकी आँखों से आँसू बहने लगे। उन्होंने रोहन को कसकर गले लगा लिया। 'बेटा, मुझे माफ़ कर दो,' वे भर्राई आवाज़ में बोले। 'तुम्हें मेरा समय खरीदने के लिए पैसे देने की ज़रूरत नहीं है।'

उस दिन मिस्टर खन्ना ने अपनी सारी मीटिंग्स कैंसिल कर दीं। उन्होंने पूरा दिन रोहन के साथ क्रिकेट खेला, बातें कीं और खूब मस्ती की। उस रात रोहन ने कहा, 'पापा, यह मेरे जीवन का सबसे अच्छा बर्थडे गिफ्ट था।'

मिस्टर खन्ना मुस्कुराए, क्योंकि उन्हें भी आज समझ आ गया था कि दुनिया का सबसे महंगा तोहफ़ा किसी दुकान में नहीं मिलता, वह अपनों के पास होता है।

सीख 

इस कहानी से हमें यह अनमोल सीख मिलती है कि 'पैसा मकान बना सकता है, लेकिन घर नहीं। पैसा सुविधाएँ दे सकता है, लेकिन यादें नहीं। अपने बच्चों और परिवार को आपका महंगा तोहफ़ा नहीं, बल्कि आपका प्यार और समय चाहिए होता है, क्योंकि बीता हुआ वक्त दुनिया की सारी दौलत देकर भी वापस नहीं लाया जा सकता।'

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