रसजथन की सीकर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ट्रैक्टर ट्रॉली से 8 लाख रुपये की अवैध अंग्रेजी शराब बरामद की है। चंडीगढ़ से लाई गई 110 पेटियां ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई की जानी थीं। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी गई है।
सीकर: राजस्थान के सीकर जिले में पुलिस ने अवैध शराब तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 8 लाख रुपये मूल्य की अंग्रेजी शराब की खेप जब्त की है। यह शराब चंडीगढ़ से लाई गई थी और इसे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई किया जाना था। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों के अनुसार, शराब को बेहद सुनियोजित तरीके से ट्रैक्टर-ट्रॉली में लकड़ी के बॉक्स के भीतर छिपाकर ले जाया जा रहा था ताकि पुलिस और आबकारी विभाग की नजरों से बचा जा सके। हालांकि, समय पर मिली खुफिया सूचना के आधार पर पुलिस ने तस्करी की इस कोशिश को विफल कर दिया।
खुफिया सूचना के बाद पुलिस ने बिछाया जाल
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ लोग बड़ी मात्रा में अवैध अंग्रेजी शराब लेकर एक ग्रामीण मार्ग से गुजरने वाले हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम को तुरंत सक्रिय किया गया और संभावित मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई।
जांच के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध ट्रैक्टर-ट्रॉली दिखाई दी, जिसके चारों ओर लकड़ी के बड़े-बड़े तख्ते और बॉक्स लगाए गए थे। वाहन की बनावट और गतिविधियां संदिग्ध लगने पर पुलिस ने उसे रोककर तलाशी लेने का फैसला किया।
जब अधिकारियों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली की जांच की, तो लकड़ी के विशेष रूप से तैयार किए गए बॉक्स के भीतर बड़ी मात्रा में शराब की पेटियां बरामद हुईं। शुरुआती जांच में सामने आया कि शराब की कुल 110 पेटियां ट्रॉली में छिपाकर रखी गई थीं।
चंडीगढ़ निर्मित शराब की 110 पेटियां बरामद
पुलिस द्वारा जब्त की गई शराब चंडीगढ़ में निर्मित बताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, बरामद शराब की बाजार कीमत लगभग 8 लाख रुपये आंकी गई है। इतनी बड़ी मात्रा में शराब की बरामदगी से संकेत मिलता है कि यह किसी व्यक्तिगत उपयोग के लिए नहीं बल्कि संगठित वितरण नेटवर्क के तहत लाई जा रही थी।
शराब की खेप को राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में खपाने की योजना थी, जहां अवैध शराब की मांग और वितरण का नेटवर्क पहले से मौजूद होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस खेप को किन-किन इलाकों में पहुंचाया जाना था और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय थे।
दो आरोपी गिरफ्तार, नेटवर्क की जांच शुरू
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे शराब की खेप को निर्धारित स्थान तक पहुंचाने का काम कर रहे थे। उनके खिलाफ आबकारी कानून और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
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जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि शराब की खेप किसके निर्देश पर लाई जा रही थी और इसके पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा है। पुलिस का मानना है कि यह मामला केवल दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई स्तरों पर काम करने वाला एक संगठित गिरोह हो सकता है।
राजस्थान तक शराब पहुंचाने में मध्यस्थ की भूमिका
पुलिस जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि शराब की खेप को एक मध्यस्थ के माध्यम से राजस्थान तक पहुंचाया गया था। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में कुछ ऐसे नामों का उल्लेख किया है जो इस पूरी सप्लाई चेन में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
जांचकर्ता अब उन लोगों की पहचान करने में जुटे हैं जिन्होंने शराब की खरीद, परिवहन और वितरण की व्यवस्था की। पुलिस का मानना है कि राज्य की सीमाओं को पार कर लाई गई इस खेप के पीछे अंतरराज्यीय तस्करी का नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। यदि जांच में यह पुष्टि होती है, तो मामले में अन्य राज्यों की एजेंसियों से भी सहयोग लिया जा सकता है।
अवैध शराब तस्करी बनी बड़ी चुनौती
राजस्थान सहित देश के कई राज्यों में अवैध शराब की तस्करी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। तस्कर अक्सर कृषि वाहनों, ट्रकों, कंटेनरों और अन्य सामान्य परिवहन साधनों का उपयोग कर शराब की खेप को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि शराब पर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग कर संरचनाएं और नियम लागू होने के कारण अवैध कारोबारियों को मुनाफे का अवसर मिलता है। यही वजह है कि अंतरराज्यीय शराब तस्करी के मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं। कई बार तस्कर शराब को लकड़ी, फर्नीचर, कृषि उत्पाद या अन्य सामान के बीच छिपाकर ले जाते हैं ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।
ग्रामीण इलाकों को बनाया जा रहा था निशाना
प्रारंभिक जांच से यह भी सामने आया है कि जब्त की गई शराब को सीकर जिले और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई करने की योजना थी। ग्रामीण इलाकों में निगरानी अपेक्षाकृत कम होने और छोटे स्तर के अवैध वितरण नेटवर्क सक्रिय होने के कारण तस्कर ऐसे क्षेत्रों को आसान बाजार मानते हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराब की खेप किन व्यक्तियों या समूहों तक पहुंचनी थी। साथ ही उन संभावित खरीदारों और वितरकों की पहचान भी की जा रही है जो इस नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं।
आगे की जांच पर टिकी निगाहें
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर केंद्रित है, जिनमें शराब का स्रोत, परिवहन मार्ग, वित्तीय लेन-देन और सप्लाई नेटवर्क शामिल हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सकेगा।
फिलहाल जब्त की गई शराब को सुरक्षित कब्जे में ले लिया गया है और संबंधित कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस का दावा है कि इस कार्रवाई से जिले में सक्रिय अवैध शराब तस्करी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। आने वाले दिनों में जांच के दौरान और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे इस पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली और उसके संपर्कों का पता चल सकेगा।











