सेमीकॉन इंडिया 2026 में वैश्विक चिप उद्योग की कई प्रमुख कंपनियों ने भारत में सहयोग और अपने कारोबार के विस्तार को लेकर रुचि दिखाई। इसके पीछे देश में उपलब्ध कुशल स्थानीय प्रतिभा और केंद्र व राज्य सरकारों की अनुकूल नीतियों को महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।
बिजनेस न्यूज़: भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग और विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर केंद्र सरकार ने निवेश, विनिर्माण और राज्यों के सहयोग पर जोर दिया है। सेमीकॉन इंडिया 2026 कार्यक्रम में वैश्विक चिप उद्योग की कंपनियों की भागीदारी के साथ भारत में तकनीकी विस्तार और निवेश की संभावनाएं सामने आईं। इसी बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में राज्यों के मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों और वित्त मंत्रियों ने आर्थिक विकास तथा निजी निवेश से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
सेमीकॉन इंडिया 2026 में वैश्विक कंपनियों की भागीदारी
भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को मजबूत बनाने की दिशा में सेमीकॉन इंडिया 2026 को महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में दुनिया भर की चिप उद्योग से जुड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया और भारत में सहयोग तथा कारोबार के विस्तार में रुचि दिखाई। इस भागीदारी के पीछे कुशल स्थानीय प्रतिभा और केंद्र तथा राज्य सरकारों की नीतियों को प्रमुख कारक बताया गया है।
कार्यक्रम में 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियों और 40,000 से ज्यादा आगंतुकों के शामिल होने की जानकारी दी गई। इससे भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की महत्वाकांक्षा का संकेत मिलता है।
ASML और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की भूमिका
सेमीकंडक्टर उद्योग की प्रमुख कंपनी ASML ने भारत में अपना कार्यालय खोला है। वहीं, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स को 300 मिलीमीटर सेमीकंडक्टर फैब का पहला ग्राहक बताया गया है। इस फैब की उत्पादन क्षमता प्रति माह 50,000 वेफर्स बताई गई है। सेमीकंडक्टर फैब में वेफर निर्माण चिप उत्पादन की बुनियादी प्रक्रिया का हिस्सा होता है।
बड़े आकार के वेफर्स पर एक साथ अधिक चिप्स तैयार करने की क्षमता उत्पादन के पैमाने और तकनीकी दक्षता से जुड़ी होती है। हालांकि, वास्तविक उत्पादन, संचालन की शुरुआत और क्षमता के उपयोग की स्थिति की पुष्टि संबंधित कंपनियों और सरकारी दस्तावेजों से की जानी चाहिए।

सेमीकॉन 2.0 योजना और निवेश प्रस्ताव
सरकार ने सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये की सेमीकॉन 2.0 योजना घोषित करने की जानकारी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने करीब 12 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश प्रस्तावों की उम्मीद जताई। निवेश प्रतिबद्धताओं में एप्लाइड मैटेरियल्स की ओर से 48,000 करोड़ रुपये और लैम रिसर्च की ओर से 10,000 करोड़ रुपये का उल्लेख किया गया है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने गुजरात के धोलेरा और असम में अपनी इकाइयों के लिए 1.18 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जानकारी दी है।
इन निवेश योजनाओं का उद्देश्य भारत में चिप निर्माण से जुड़ी क्षमताओं, तकनीकी बुनियादी ढांचे और औद्योगिक सहयोग को विस्तार देना है। हालांकि, निवेश की घोषणा, प्रतिबद्धता और वास्तविक पूंजीगत व्यय अलग-अलग चरण होते हैं।
विकसित भारत के लिए केंद्र और राज्यों की साझेदारी
वित्त मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में विकसित भारत के लिए नीतिगत प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ कई राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री इस कार्यक्रम में शामिल हुए। आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। उन्होंने सरकारी बजट के साथ निजी क्षेत्र के वित्तपोषण की जरूरत पर जोर दिया।
सम्मेलन में 15वें वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एन.के. सिंह ने मुख्य भाषण दिया। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि विकसित भारत की दिशा में प्रगति के लिए विकसित राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
राज्यों में निजी निवेश और पूंजीगत व्यय पर जोर
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने राज्यों को निजी निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाने, निवेश की गुणवत्ता सुधारने और पूंजीगत व्यय बढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने 2031-32 तक सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 3 प्रतिशत के स्तर पर पूंजीगत व्यय की आवश्यकता पर जोर दिया। भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने बैंकिंग क्षेत्र के माध्यम से वित्त जुटाने के स्रोतों पर चर्चा की। गुजरात के वित्त मंत्री कानूभाई देसाई ने केंद्रीय वित्त मंत्री की पहल की सराहना की।
सेमीकंडक्टर निवेश और केंद्र-राज्य आर्थिक संवाद, दोनों भारत की औद्योगिक क्षमता बढ़ाने से जुड़े हैं। चिप निर्माण के क्षेत्र में सफलता के लिए पूंजी निवेश के साथ कुशल मानव संसाधन, तकनीकी प्रशिक्षण, विश्वसनीय बिजली आपूर्ति और आपूर्ति श्रृंखला का विकास आवश्यक होगा। वहीं, विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर राज्यों की वित्तीय क्षमता और निजी निवेश आकर्षित करने की नीतियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। इन पहलों का वास्तविक प्रभाव परियोजनाओं के क्रियान्वयन, निवेश के प्रवाह और उत्पादन क्षमता के विस्तार के आधार पर आंका जा सकेगा।










