एसपी के सीने पर तान दी थी लोडेड AK-47, बाल-बाल बचे; पुलिस ने ऐसे छीनी माओवादी की राइफल

सरायकेला के उदयपुर में माओवादी ने एसपी पर लोडेड AK-47 तान दी। पुलिस ने राइफल की नली मोड़कर उसे दबोचा, 25 कारतूस बरामद हुए और 5 सहयोगी भी पकड़े गए।
एसपी के सीने पर तान दी थी लोडेड AK-47, बाल-बाल बचे; पुलिस ने ऐसे छीनी माओवादी की राइफल
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जमशेदपुर/सरायकेला-खरसावां: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में माओवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान पुलिस टीम के सामने उस समय बेहद खतरनाक स्थिति पैदा हो गई, जब एक माओवादी ने लोडेड AK-47 सीधे एसपी की ओर तान दी। राइफल की मैगजीन में 25 जिंदा कारतूस थे और उग्रवादी की उंगली ट्रिगर पर थी। पुलिस अधिकारियों ने बिना समय गंवाए कार्रवाई करते हुए राइफल की नली दूसरी ओर मोड़ दी और माओवादी को काबू में कर लिया। इस तरह बड़ा हादसा होने से टल गया।

यह पूरा घटनाक्रम कांड्रा थाना क्षेत्र के उदयपुर गांव में सामने आया। पुलिस को 5 अगस्त को सूचना मिली थी कि इलाके में माओवादियों का एक दस्ता जुटा हुआ है। पुलिस को आशंका थी कि संगठन के सदस्य लेवी वसूलने और किसी बड़ी वारदात की तैयारी में जुटे हैं। सूचना मिलने के बाद सरायकेला एसपी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इलाके में अभियान शुरू किया।

पुलिस टीम में सरायकेला एसडीपीओ, कांड्रा थाना प्रभारी विनोद कुमार मुर्मू, दारोगा सोनू कुमार सिंह समेत अन्य जवान शामिल थे। घेराबंदी के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध व्यक्ति नजर आया। उसके सिर पर नीली टोपी थी और वह हथियार लेकर घने जंगल की ओर भागने लगा। पुलिस ने उसका पीछा किया और आसपास के इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया।

तलाशी के दौरान पुलिस टीम एक सुनसान मकान के पास पहुंची। यह मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाया गया था। पुलिस को शक हुआ कि अंदर कोई व्यक्ति छिपा हो सकता है। दरवाजा अंदर से बंद था। टीम ने स्थिति का जायजा लिया और अंदर मौजूद व्यक्ति के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की।

पुलिस को जब यह अंदेशा हुआ कि अंदर हथियारबंद माओवादी छिपा है, तब अधिकारियों ने पीछे हटने के बजाय तत्काल कार्रवाई करने का फैसला किया। जैसे ही पुलिस टीम अंदर दाखिल हुई, सामने मौजूद माओवादी ने AK-47 उठा ली और उसे पुलिस अधिकारियों की ओर तान दिया। उसकी उंगली ट्रिगर पर थी और हथियार पूरी तरह लोडेड था।

स्थिति इतनी गंभीर थी कि एक पल की देरी भी पुलिसकर्मियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी। लेकिन अधिकारियों ने तेजी दिखाते हुए माओवादी की राइफल की नली को दूसरी तरफ झटका। इससे वह ट्रिगर नहीं दबा सका। इसके तुरंत बाद पुलिसकर्मियों ने उसे दबोच लिया और हथियार अपने कब्जे में ले लिया।

पुलिस ने जिस माओवादी को गिरफ्तार किया, उसकी पहचान रवि सिंह सरदार उर्फ सागर सिंह सरदार उर्फ वीरेन सिंह के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक वह भाकपा माओवादी संगठन का सब-जोनल कमेटी सदस्य बताया गया है। उसके पास से बरामद AK-47 की मैगजीन में 25 जिंदा कारतूस मिले।

पुलिस के लिए यह गिरफ्तारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आरोपी के पास अत्याधुनिक हथियार मौजूद था और वह पुलिस टीम पर हमला करने की स्थिति में था। समय रहते पुलिस अधिकारियों ने उसे काबू कर लिया, जिससे किसी पुलिसकर्मी की जान जाने की स्थिति नहीं बनी।

गिरफ्तार माओवादी से पूछताछ के बाद पुलिस को उसके संगठन और सहयोगियों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की उम्मीद है। पूछताछ के आधार पर पुलिस ने झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में कार्रवाई की। इस दौरान माओवादी संगठन से जुड़े पांच अन्य सहयोगियों और सदस्यों को भी गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया। इनमें 9 एमएम की पिस्टल, AK-47 के कारतूस और अन्य हथियार एवं गोला-बारूद शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा मोटरसाइकिलें और प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन से संबंधित प्रचार सामग्री भी बरामद की गई।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार माओवादी और उसके सहयोगी इलाके में किस तरह की गतिविधियां चला रहे थे। पुलिस को आशंका है कि संगठन के सदस्य लेवी वसूली और क्षेत्र में दहशत फैलाने की कोशिश कर रहे थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई जा रही थी।

इस मामले में कांड्रा थाना प्रभारी की शिकायत के आधार पर गिरफ्तार और फरार माओवादियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने आरोपियों पर सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला करने, हथियार छीनने की कोशिश और आतंक फैलाने जैसे आरोप लगाए हैं।

पुलिस की कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई है। अधिकारियों के मुताबिक मंगल समेत कुछ अन्य माओवादी फरार हैं, जिनकी तलाश में जंगल और आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन जारी है। सुरक्षा बलों की टीमें संभावित ठिकानों पर निगरानी रख रही हैं।

झारखंड में इस साल माओवाद विरोधी अभियान लगातार तेज हुआ है। राज्य पुलिस के मुताबिक अगस्त के मध्य तक 2026 में 100 से ज्यादा माओवादी गिरफ्तार किए जा चुके थे, जबकि कई उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण भी किया। सुरक्षा बलों ने बड़ी संख्या में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए हैं।

उदयपुर की इस कार्रवाई में सबसे अहम बात यह रही कि पुलिस टीम को बेहद करीब से हथियारबंद माओवादी का सामना करना पड़ा। लोडेड AK-47 एसपी की ओर तनी होने के बावजूद पुलिस अधिकारियों ने घबराने के बजाय तुरंत हथियार को दूसरी दिशा में मोड़कर आरोपी को पकड़ लिया। पुलिस की इसी तेजी से संभावित जानलेवा हमले को टाला जा सका।

फिलहाल गिरफ्तार माओवादी और उसके सहयोगियों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि संगठन का नेटवर्क किन इलाकों तक फैला है, फरार माओवादी कहां छिपे हैं और क्या इलाके में किसी बड़ी वारदात की योजना बनाई जा रही थी।

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