घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत आज कमजोर रही और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में खुले। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत मिले, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।
बिजनेस न्यूज़: भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को कमजोर शुरुआत की, क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया। शुरुआती कारोबार में प्रमुख घरेलू सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ खुले, जबकि बाजार सहभागियों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में सतर्कता बढ़ा दी है। संभावित सैन्य संघर्ष की आशंकाओं और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर निवेशकों में चिंता देखी जा रही है।
लाल निशान में खुला भारतीय शेयर बाजार
कारोबार की शुरुआत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स लगभग 142 अंक गिरकर 74,507 के स्तर पर खुला। वहीं, राष्ट्रीय शेयर बाजार (NSE) का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 करीब 67 अंकों की कमजोरी के साथ 23,500 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया और 23,415 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
विश्लेषकों का कहना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली और वैश्विक जोखिमों ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। बैंकिंग, ऑटो और धातु क्षेत्र के शेयरों में शुरुआती दबाव देखने को मिला, जबकि चुनिंदा आईटी शेयरों ने कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश की।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख

एशिया-प्रशांत क्षेत्र के बाजारों में बुधवार को मिश्रित रुझान देखने को मिला। जापान का शेयर बाजार मजबूत प्रदर्शन के साथ नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। निवेशकों ने कॉर्पोरेट आय और आर्थिक संकेतकों के सकारात्मक प्रभाव को महत्व दिया, जिससे जापानी इक्विटी बाजार को समर्थन मिला। जापान का प्रमुख निक्केई 225 सूचकांक 2 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया। वहीं, टॉपिक्स इंडेक्स में भी मजबूती दर्ज की गई।
इसके विपरीत, हांगकांग के बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। हैंग सेंग इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई, जो चीन की आर्थिक रिकवरी और वैश्विक मांग को लेकर निवेशकों की चिंताओं को दर्शाता है। दक्षिण कोरिया के बाजार सार्वजनिक अवकाश के कारण बंद रहे।
अमेरिकी बाजारों ने बनाया नया रिकॉर्ड
वैश्विक निवेशकों का ध्यान अमेरिकी बाजारों पर भी बना हुआ है, जहां पिछले कारोबारी सत्र में प्रमुख सूचकांकों ने रिकॉर्ड स्तर हासिल किए। अमेरिकी शेयर बाजार में मजबूत कॉर्पोरेट प्रदर्शन और निवेशकों की सकारात्मक धारणा के चलते डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज, एसएंडपी 500 और नैस्डैक कंपोजिट ने बढ़त दर्ज की। विशेष रूप से एसएंडपी 500 पहली बार 7,600 के स्तर को पार करने में सफल रहा, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था के प्रति निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।
हालांकि, वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण बाजार सहभागियों का मानना है कि आने वाले दिनों में अस्थिरता बढ़ सकती है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजारों पर दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, क्योंकि निवेशकों को आशंका है कि क्षेत्रीय संघर्ष वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है।
ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों में एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। ऊर्जा कीमतों में लगातार वृद्धि से आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जिसमें भारत भी शामिल है।
डॉलर मजबूत, रुपये पर दबाव
अमेरिकी डॉलर भी वैश्विक बाजारों में मजबूती दिखा रहा है। प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर इंडेक्स में हल्की बढ़त दर्ज की गई, जो निवेशकों की सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर बढ़ती रुचि को दर्शाता है। डॉलर की मजबूती का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा है। हालिया कारोबारी सत्र में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ, जिससे आयात लागत और विदेशी निवेश प्रवाह पर असर पड़ सकता है।










