यह कहानी हमें सिखाती है कि शारीरिक शक्ति से कहीं अधिक ताकतवर इंसान की बुद्धि होती है। यह हमें दिखाती है कि कैसे एक नन्हा और कमज़ोर दिखने वाला जीव भी अपनी चतुराई से बड़े से बड़े संकट को टाल सकता है और एक अत्याचारी का अंत कर सकता है। बुद्धि ही बल है, और सूझबूझ से नामुमकिन को भी मुमकिन बनाया जा सकता है।
कहानी
एक विशाल जंगल में भास्वरक नाम का एक बहुत ही क्रूर और शक्तिशाली शेर रहता था। वह अपनी भूख मिटाने के लिए हर रोज़ जंगल के अनगिनत जानवरों का शिकार करता था। शेर के इस आतंक से पूरा जंगल थर-थर काँपता था। जानवरों को डर था कि अगर ऐसा ही चलता रहा, तो जल्द ही जंगल पूरी तरह खाली हो जाएगा।
एक दिन जंगल के सभी जानवर इकट्ठा हुए और शेर के पास जाकर बोले, 'महाराज, आप रोज़ इतने जानवरों को मार देते हैं, जबकि आपको सिर्फ एक की ज़रूरत होती है। हम एक समझौता करना चाहते हैं। हम रोज़ आपके पास एक जानवर खुद भेज दिया करेंगे, जिससे आपकी भूख भी मिट जाएगी और हमें भी बेवजह डर में नहीं जीना पड़ेगा।' शेर को यह बात जम गई और उसने शर्त मान ली।
समय बीतता गया और हर दिन एक जानवर शेर की गुफा की ओर जाने लगा। एक दिन एक नन्हे खरगोश की बारी आई। वह खरगोश बहुत चतुर और बुद्धिमान था। उसने सोचा, 'मरना तो तय ही है, तो क्यों न कुछ ऐसा किया जाए जिससे मेरी जान भी बच जाए और जंगल को इस ज़ालिम शेर से छुटकारा मिल जाए।' वह जानबूझकर शेर के पास बहुत देरी से पहुँचा।
जब वह पहुँचा, तो शेर भूख के मारे आग-बबूला हो रहा था। उसने दहाड़कर पूछा, 'एक तो तू इतना छोटा है और ऊपर से इतनी देरी से आया है! अब मैं तुझे खाकर अपनी भूख मिटाऊँगा और कल से फिर सारे जानवरों का शिकार शुरू करूँगा।' खरगोश ने बड़ी विनम्रता से हाथ जोड़कर कहा, 'महाराज, इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। मैं तो पाँच और खरगोशों के साथ आ रहा था, लेकिन रास्ते में एक दूसरे शेर ने हमें रोक लिया।'
शेर ने चौंककर पूछा, 'दूसरा शेर? इस जंगल का राजा तो केवल मैं हूँ। वह कौन है?' खरगोश ने धीरे से कहा, 'महाराज, वह कह रहा था कि वही इस जंगल का असली राजा है और उसने मेरे साथियों को खा लिया। उसने मुझे आपको यह बताने के लिए भेजा है कि अब वह आपको चुनौती दे रहा है।'
क्रोध से पागल होकर शेर ने कहा, 'मुझे अभी उस दूसरे शेर के पास ले चल। मैं उसे आज ही खत्म कर दूँगा।' चतुर खरगोश शेर को जंगल के बीचों-बीच एक गहरे और पुराने कुएँ के पास ले गया। खरगोश ने इशारे से कहा, 'महाराज, वह शेर इसी किले (कुएँ) के अंदर छिपा बैठा है।'
जैसे ही शेर ने कुएँ के अंदर झाँका, उसे पानी में अपनी ही परछाईं दिखाई दी। उसने अपनी परछाईं को ही दूसरा शेर समझ लिया। शेर ने ज़ोर से दहाड़ लगाई, तो कुएँ से उसकी दहाड़ की गूँज (Echo) वापस आई। शेर को लगा कि दूसरा शेर उसे ललकार रहा है। बिना एक पल सोचे, वह कुएँ के अंदर कूद पड़ा। पानी बहुत गहरा था और शेर कभी बाहर नहीं निकल पाया और वहीं डूबकर मर गया। नन्हे खरगोश ने अपनी चतुराई से न केवल अपनी जान बचाई, बल्कि पूरे जंगल को हमेशा के लिए आज़ाद कर दिया।
सीख
इस कहानी से हमें यह अनमोल सीख मिलती है कि 'जिसके पास बुद्धि है, उसी के पास वास्तविक बल है।' (Wisdom is ber than physical strength). मुसीबत के समय घबराने के बजाय अपनी बुद्धि और सूझबूझ का इस्तेमाल करने से बड़े से बड़े शत्रु को भी पराजित किया जा सकता है।











