प्रयागराज माघ मेले के दौरान प्रशासन और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच हुए विवाद ने एक बार फिर धार्मिक और राजनीतिक चर्चा को तेज कर दिया है।
वाराणसी: प्रयागराज माघ मेले में प्रशासन से हुए विवाद को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और प्रशासन पर कड़ी आलोचना की। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनसे शंकराचार्य होने का सबूत मांगा गया और 24 घंटे के अंदर जवाब देने के लिए कहा गया। इसके बाद यह सुझाव भी दिया गया कि क्यों न उन्हें मेले में प्रवेश से ही वंचित कर दिया जाए। शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने समय पर जवाब दे दिया, लेकिन अब तक प्रशासन ने उसका कोई जवाब नहीं दिया, जिसका मतलब है कि उनकी बात सही मानी गई।
प्रमाण मांगने का मामला
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि माघ मेले के दौरान उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया था। उन्होंने कहा, हमें 24 घंटे में जवाब देने के लिए कहा गया। हमने उत्तर दे दिया, लेकिन अब तक प्रशासन ने हमारे जवाब को स्वीकार नहीं किया। इसका मतलब यही है कि हमारी बात सही मानी गई है। अब अपनी बारी है कि आप हिंदू होने का प्रमाण दें।
उनका कहना था कि हिंदुत्व केवल भाषण या भगवा पहनने से नहीं दिखता। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू होने की पहली शर्त गौ रक्षा करना है। शंकराचार्य ने कहा, जो व्यक्ति गौ माता की रक्षा नहीं करता, वह हिंदू नहीं कहा जा सकता। हिंदुत्व की पहली सीढ़ी है गौ सेवा। उसके बाद हर अन्य धर्मिक और सामाजिक जिम्मेदारी आती है। इसलिए हम सरकार से हिंदू होने का प्रमाण मांग रहे हैं।

अल्टीमेटम: 40 दिन का समय
शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश सरकार को 40 दिन का समय दिया है। उन्होंने कहा कि इस अवधि के भीतर सरकार गौ माता को राज्य माता घोषित करे, अन्यथा उन्हें यह माना जाएगा कि सरकार नकली हिंदू है। उन्होंने चेतावनी दी, “यदि 40 दिन में आप ऐसा नहीं कर पाए तो हम लखनऊ में सभी संत और महंतों के साथ निर्णय लेंगे।
शंकराचार्य ने कहा कि गाय का मांस बेचकर और उसे भैंस का मांस बताकर किसी भी राज्य या व्यवस्था में राम राज्य की स्थापना संभव नहीं है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से कहा, “आप भारत से गौ मांस का निर्यात रोकें। उत्तर प्रदेश से लगभग 40% गौ मांस का निर्यात होता है। क्या आप इस स्थिति में हिंदू होने का दावा कर सकते हैं? नहीं तो भगवा चोला उतारिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शंकराचार्य ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रयागराज में पुनः स्नान के विवाद को अब भुला दिया गया है। उनका फोकस अब असली हिंदू और छद्म हिंदू की पहचान पर है। उन्होंने कहा, “अधिकारियों ने हमें यह मुद्दा उठाने के लिए कहा था, लेकिन हमने पहले स्पष्ट किया कि असली मुद्दा हिंदुत्व और गौ रक्षा का है।












