श्रावण शुक्ल दशमी हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। इस दिन पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व रहता है। जानें 2026 में दशमी तिथि कब है, शुभ मुहूर्त और इससे जुड़ी मान्यताएं।
श्रावण शुक्ल दशमी 2026: धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तिथियों में शामिल है। सावन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर श्रद्धालु पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इस दिन तिथि के अनुसार शुभ समय में पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है। यहां जानें 2026 में श्रावण शुक्ल दशमी की तिथि, पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और इससे जुड़े धार्मिक महत्व के बारे में।
श्रावण शुक्ल दशमी 2026 कब है
हिंदू पंचांग के अनुसार सावन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली दशमी तिथि को श्रावण शुक्ल दशमी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।

2026 में श्रावण शुक्ल दशमी की सही तारीख और तिथि का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार देखा जाना चाहिए, क्योंकि तिथि का आरंभ और समापन अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय तथा स्थानीय समय के आधार पर माना जा सकता है।
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
श्रावण शुक्ल दशमी के दिन पूजा के लिए शुभ समय जानने के लिए स्थानीय सूर्योदय और पंचांग में दिए गए मुहूर्त को प्राथमिकता दी जाती है। श्रद्धालु सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान शिव का ध्यान कर सकते हैं।
पूजा के दौरान शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करने के साथ बेलपत्र, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाने की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार शिव मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं।
श्रावण शुक्ल दशमी का धार्मिक महत्व
सावन का पूरा महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना से जुड़ा माना जाता है। इस महीने में आने वाली शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर भी धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
इस दिन मंदिर जाकर पूजा करने के साथ घर पर भी भगवान शिव की आराधना की जा सकती है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता भी कर सकते हैं।
नोट: व्रत और पूजा से जुड़े नियम अलग-अलग परंपराओं और पंचांगों में भिन्न हो सकते हैं। इसलिए किसी विशेष अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग या विद्वान से तिथि और मुहूर्त की पुष्टि करना उचित रहेगा।










