वृंदावन के प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में वीआईपी दर्शन और पूजा से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि मंदिर में देवता को दिन में एक मिनट भी विश्राम नहीं करने दिया जा रहा है।
नई दिल्ली: वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर में वीआईपी दर्शन-पूजा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि देवता को विश्राम करने का अवसर नहीं दिया जा रहा। आम श्रद्धालु जब दर्शन नहीं कर पाते, उस समय मोटी फीस देने वालों के लिए विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचौली की बेंच मंदिर के सेवायतों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने कोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी के निर्देश का विरोध किया था।
कमेटी ने आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का समय बढ़ाने की सिफारिश की थी। सुनवाई के अंत में कोर्ट ने हाई-पावर्ड कमेटी को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई जनवरी में निर्धारित की गई है।
CJI सूर्यकांत का बयान

मंदिर के सेवायतों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 को चुनौती दी गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि मंदिर का प्रबंधन 1939 में बने विशेष योजना के तहत होता आया है और सरकार का उस पर कोई अधिकार नहीं है। याचिका में मुख्य रूप से यह मुद्दा उठाया गया कि दर्शन की समयसीमा बढ़ाने का फैसला मंदिर के पारंपरिक अनुष्ठानों का हिस्सा बदलने जैसा है, जिसमें देवताओं का विश्राम भी शामिल है।
सेवायतों का तर्क था कि आम भक्तों के दर्शन का समय कम हो रहा है और इस दौरान केवल उच्च शुल्क देने वाले लोग ही विशेष पूजा का आनंद ले पा रहे हैं। सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान से पूछा, “अगर दर्शन की टाइमिंग बढ़ा दी जाती है तो इसमें परेशानी की क्या बात है?” उन्होंने आगे कहा,
'दिन में 12 बजे मंदिर बंद होने के बाद ये देवता को एक मिनट के लिए भी विश्राम नहीं करने देते हैं। उस समय सबसे ज्यादा उन्हें परेशान किया जाता है और मोटी फीस लेकर धनी लोगों के लिए स्पेशल पूजा करवाई जाती है।'
CJI ने यह भी कहा कि यदि मूल समयसीमा में थोड़े से भक्त कम हों, तो इससे क्या फर्क पड़ेगा।
अन्य मुद्दे और सुझाव
एडवोकेट श्याम दीवान ने कोर्ट को बताया कि वे भगदड़ जैसी स्थिति नहीं चाहते और भक्तों की संख्या पर नियंत्रण रखना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि देहरी पूजा, जो भगवान के चरणों में विशेष स्थान पर होती है और गुरु-शिष्य के बीच होती है, उसे बंद नहीं किया जाना चाहिए। सीजेआई ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि मंदिर प्रबंधन को पक्षकार बनाया जाएगा और मामले में उच्च स्तरीय निर्णय लेने के लिए मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से हाई पावर्ड कमेटी और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भेजा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2026 में करने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने हाई पावर्ड कमेटी को नोटिस जारी कर दर्शन की टाइमिंग और मंदिर के अनुष्ठानों में बदलाव से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगा है।












