बिहार के पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने SIR विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विवादित बयान दिया है। पप्पू यादव ने कहा कि कानून के तहत किसी को गोली नहीं मारी जा सकती, इसलिए उनके मुताबिक ज्ञानेश कुमार को फांसी की सजा होनी चाहिए।
पटना: बिहार में Special Intensive Revision (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बेहद कड़ा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के लिए फांसी की सजा की मांग की।
पप्पू यादव ने अपने बयान में कहा कि गरीबों और उनके वोट के साथ अपराध हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि कानून किसी को गोली मारने की अनुमति नहीं देता, इसलिए उन्होंने फांसी की सजा की बात कही। उनके बयान को SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे राजनीतिक विरोध के संदर्भ में देखा जा रहा है।
ज्ञानेश कुमार वर्तमान में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उन्हें Chief Election Commissioner के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा और पात्र मतदाताओं के रिकॉर्ड को अपडेट करना है। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर SIR-2026 से जुड़ी मतदाता सूची और नाम खोजने की सुविधा भी उपलब्ध है। आयोग के पोर्टल के अनुसार मतदाता अपने पुराने SIR रिकॉर्ड में नाम की जांच कर सकते हैं और चुनावी विवरण से जुड़ी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।
हालांकि, विपक्षी दलों और कुछ राजनीतिक नेताओं ने इस प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटने या पात्र मतदाताओं को परेशानी होने की आशंका है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग अपनी चुनावी प्रक्रियाओं और मतदाता सूची से जुड़े कार्यों को निर्धारित नियमों के तहत संचालित करने की बात करता रहा है।

मुकेश सहनी के बयान के बाद बढ़ा मामला
पप्पू यादव का बयान विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी की टिप्पणी के बाद आया। सहनी ने भी SIR को लेकर ज्ञानेश कुमार पर बेहद तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि अगर संविधान इसकी अनुमति देता और उन्हें एक हत्या माफ होती, तो वह मुख्य चुनाव आयुक्त को गोली मार देते।सहनी ने आरोप लगाया था कि चुनाव प्रक्रिया के साथ जनता के साथ अन्याय हो रहा है। हालांकि, उनके बयान को लेकर भी राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर विवाद खड़ा हुआ।
इसके बाद पप्पू यादव ने सहनी के गुस्से को उनकी भावनाओं से जोड़ते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने बिहार के साथ-साथ अन्य राज्यों में मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी अपनी आपत्ति जाहिर की।
चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोप
SIR विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों की आलोचना तेज हुई है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रम में कुछ विपक्षी नेताओं ने उनके पद से हटने की मांग भी की है। वहीं, चुनाव आयोग से जुड़े एक पक्ष के अनुसार आयुक्तों के बीच विचारों में मतभेद होना अपने आप में असामान्य नहीं है और SIR समेत आयोग के फैसलों को लेकर सर्वसम्मति का दावा भी सामने आया है। इसलिए विवाद से जुड़े अलग-अलग दावों को उनके संबंधित पक्षों के बयान के रूप में देखना महत्वपूर्ण है।












