अखिलेश यादव ने यूपी सरकार से SIR प्रक्रिया का पूरा डेटा सार्वजनिक करने और BLOs पर हो रहे दबाव को रोकने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में PDA समाज के मतदाताओं को सूची से हटाने की साजिश की जा रही है।
Akhilesh Yadav: समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार से मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) में हुई प्रगति को तुरंत सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्य में मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और बूथ स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों यानी BLOs पर किसी भी तरह का “जानलेवा दबाव” नहीं डाला जाना चाहिए।
अखिलेश यादव ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक X पोस्ट में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार को अब तक किए गए एसआईआर कार्यों का पूरा आंकड़ा सामने लाना चाहिए ताकि जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।
SIR का पूरा आंकड़ा प्रकाशित करने की मांग
अखिलेश यादव ने कहा कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का काम किस स्तर पर पहुंचा है, यह जनता को जानने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत आदेश जारी करना चाहिए कि अब तक हुई कार्रवाई के सभी डेटा को सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाए। पारदर्शिता से ही यह पता चल सकेगा कि किन क्षेत्रों में मतदाता सूची का कार्य ईमानदारी से किया गया है और कहां गड़बड़ियां छिपाई जा रही हैं।

BLOs पर दबाव हटाने की अपील
सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर्स यानी BLOs पर अनावश्यक और “जानलेवा दबाव” डाला जा रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस दबाव को तुरंत हटाया जाए और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त अधिकृत कर्मचारियों को इस कार्य में लगाया जाए ताकि BLOs के ऊपर कार्यभार असामान्य रूप से न बढ़े।
अखिलेश यादव का कहना है कि राज्य को निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए और इसके लिए फील्ड स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों के ऊपर कोई राजनीतिक दबाव नहीं होना चाहिए।
मतदाता सूची से पीडीए समाज को हटाने की साजिश का आरोप
अखिलेश यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई विधानसभा क्षेत्रों में PDA समाज के लोगों (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) को मतदाता सूची से हटाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसकी पक्की जांच-पड़ताल की जानी चाहिए और अगर ऐसी कोई कोशिश हो रही है तो उसे तुरंत रोका जाए।
उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल और उसके समर्थकों को इस प्रक्रिया में “पिछले दरवाज़े से दखल” नहीं देना चाहिए और न ही भविष्य में ऐसा होने दिया जाए।










