संजय कपूर की 30,000 करोड़ रुपये संपत्ति विवाद में बड़ा मोड़: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व CJI चंद्रचूड़ को बनाया मध्यस्थ

संजय कपूर की 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े विवाद में बड़ा मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले के समाधान के लिए पूर्व CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ को मध्यस्थ

Sanjay Kapoor के निधन के बाद उनकी संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद अब न्यायिक मध्यस्थता के चरण में पहुंच गया है। यह मामला उनकी मां Rani Kapoor और उनकी तीसरी पत्नी Priya Sachdev Kapoor के बीच लगभग 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े दावे को लेकर है।

नई दिल्ली: भारत के बड़े कारोबारी परिवारों में चल रहे संपत्ति विवादों में एक और हाई-प्रोफाइल मामला सुर्खियों में है। दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की लगभग 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर चल रहा पारिवारिक विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है, जहां अदालत ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजने का अहम फैसला सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस संवेदनशील विवाद को सुलझाने के लिए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश D. Y. Chandrachud को मध्यस्थ नियुक्त किया है। यह कदम दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई को खत्म करने और शांतिपूर्ण समाधान निकालने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पारिवारिक विवाद को सुलझाने की कोशिश

यह मामला संजय कपूर की 80 वर्षीय मां रानी कपूर और उनकी तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर के बीच संपत्ति के अधिकारों को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है। अदालत में दाखिल याचिकाओं और आरोपों के बाद यह मामला लगातार जटिल होता जा रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह एक पारिवारिक विवाद है और इसका समाधान टकराव के बजाय बातचीत और मध्यस्थता से किया जाना चाहिए। अदालत ने सभी पक्षों से खुले मन से प्रक्रिया में शामिल होने की अपील की है।

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि लंबे समय तक चलने वाला मुकदमा किसी भी पक्ष के हित में नहीं है, खासकर जब परिवार के वरिष्ठ सदस्य शामिल हों। कोर्ट ने यह भी कहा कि 80 वर्ष की आयु में लंबे कानूनी संघर्ष में उलझना उचित नहीं है और समाधान के लिए मध्यस्थता सबसे बेहतर रास्ता है।

सोशल मीडिया पर रोक और गोपनीयता पर जोर

अदालत ने इस मामले में सभी पक्षों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे इस विवाद पर किसी भी प्रकार की सार्वजनिक टिप्पणी या सोशल मीडिया पोस्ट न करें। कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता प्रक्रिया केवल परिवार के सदस्यों तक सीमित रहेगी और इसकी गोपनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि समाधान निष्पक्ष और शांतिपूर्ण हो सके।

27 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने रानी कपूर की याचिका पर सुनवाई करते हुए 22 अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया था। उस समय भी अदालत ने संकेत दिया था कि इस प्रकार के पारिवारिक विवादों में मध्यस्थता अधिक प्रभावी समाधान हो सकती है। अब अदालत ने इस दिशा में औपचारिक कदम बढ़ाते हुए मामले को मध्यस्थता प्रक्रिया में भेज दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि मध्यस्थता के जरिए समाधान नहीं निकलता है, तो अदालत इस मामले की मेरिट पर विस्तृत सुनवाई करेगी। इसका मतलब है कि फिलहाल सभी पक्षों को समझौते की कोशिश करनी होगी, अन्यथा मामला फिर से अदालत की लंबी प्रक्रिया में लौट सकता है।

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