दक्षिण अफ्रीका में सोमवार रात माइन डंप साइट ढहने से 14 संदिग्ध अवैध खनिकों की मौत हो गई। आठ लोग घायल हुए हैं, जबकि कुछ अन्य के मलबे में फंसे होने की आशंका है। पुलिस ने जांच और तलाशी अभियान शुरू किया है।
स्टेनबर्ग: दक्षिण अफ्रीका में एक माइन डंप साइट के अचानक ढह जाने से 14 संदिग्ध अवैध खनिकों की मौत हो गई। हादसा सोमवार रात हुआ। पुलिस के मुताबिक, घटना में आठ अन्य लोग घायल हुए हैं, जबकि कुछ और लोगों के मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका है। हादसे के बाद पुलिस और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं तलाश अभियान शुरू किया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मारे गए और घायल हुए लोग कथित तौर पर अवैध रूप से खनन गतिविधियों में शामिल थे।
माइन डंप साइट ढहने से हुआ हादसा
दक्षिण अफ्रीकी पुलिस के अनुसार, सोमवार रात एक माइन डंप साइट का हिस्सा अचानक ढह गया। उस समय वहां कथित तौर पर कई अवैध खनिक मौजूद थे। मलबा गिरने से खनिक उसके नीचे दब गए। हादसे में 14 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि आठ अन्य घायल हुए हैं।
पुलिस ने बताया कि मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका है। हालांकि, उनकी वास्तविक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। हादसे के बाद घटनास्थल पर बचाव और तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन मलबे की स्थिति और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण अभियान में मुश्किलें सामने आईं।
कानूनी रूप से संचालित साइट पर कैसे पहुंचे अवैध खनिक?
इस हादसे का एक अहम पहलू यह है कि जिस माइन डंप साइट पर घटना हुई, उसे एक खनन कंपनी कानूनी रूप से संचालित कर रही थी। पुलिस और प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि संदिग्ध अवैध खनिक इस साइट के अंदर कैसे पहुंचे।
क्षेत्रीय पुलिस प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आर्थर एडम्स ने मंगलवार सुबह घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने बताया कि डंप साइट का इस्तेमाल प्लेटिनम और अन्य धातुओं के खनन के लिए किया जा रहा था। उनके मुताबिक, डंप साइट की दीवारें अचानक धंस गईं और वहां मौजूद अवैध खनिक मलबे में दब गए।
इस घटना ने खनन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और अवैध खनन पर नियंत्रण को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अधिकांश मृतक पड़ोसी देश लेसोथो के बताए जा रहे
पुलिस के अनुसार, हादसे में शामिल सभी संदिग्ध अवैध खनिक बिना वैध दस्तावेजों के दक्षिण अफ्रीका में रह रहे विदेशी नागरिक बताए गए हैं। इनमें से अधिकांश के पड़ोसी देश लेसोथो से होने की आशंका है।
पुलिस प्रमुख आर्थर एडम्स के मुताबिक, घायल हुए कुछ लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इनमें से तीन लोगों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
पुलिस अब उनकी पहचान और घटनास्थल तक पहुंचने के तरीके की जांच कर रही है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अवैध खनन और बिना अनुमति खनन क्षेत्र में प्रवेश करने के आरोपों में कार्रवाई की जा सकती है।
घायल खनिकों पर भी हो सकती है कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने बताया कि जिन संदिग्ध अवैध खनिकों को हिरासत में लिया गया है, उनके खिलाफ अवैध खनन और अनधिकृत प्रवेश से जुड़े आरोप लगाए जा सकते हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गतिविधि के पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा था।
दक्षिण अफ्रीका में अवैध खनन एक लंबे समय से गंभीर समस्या बना हुआ है। बड़ी संख्या में लोग बंद या पुराने खनन क्षेत्रों में घुसकर सोने, प्लेटिनम और अन्य धातुओं की तलाश करते हैं। ऐसे खनिकों को स्थानीय भाषा में जामा-जामा कहा जाता है, जिसका अर्थ लगभग उन लोगों से है जो अपनी किस्मत आजमाते हैं।
दक्षिण अफ्रीका में अवैध खनन क्यों बढ़ रहा है?
दक्षिण अफ्रीका लंबे समय से खनन उद्योग के लिए दुनिया के प्रमुख देशों में रहा है। सोना, प्लेटिनम और अन्य खनिजों के बड़े भंडार ने देश की अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक मजबूत आधार दिया। हालांकि, कई पुराने खनन क्षेत्रों में बड़े अंतरराष्ट्रीय खनन समूहों के लिए काम करना पहले की तुलना में कम लाभदायक हो गया है।
कई खदानों के बंद होने के बाद उनके आसपास अवैध खनन गतिविधियां बढ़ गईं। बेरोजगारी, गरीबी और बेहतर आय की तलाश में लोग बंद खदानों या डंप साइटों में प्रवेश करते हैं। इनमें बड़ी संख्या में बिना दस्तावेज वाले प्रवासी भी शामिल बताए जाते हैं।
अवैध खनिक पुराने शाफ्ट और माइन डंप से सोने, प्लेटिनम तथा अन्य धातुओं के अवशेष निकालने की कोशिश करते हैं। इस दौरान उन्हें कई तरह के खतरों का सामना करना पड़ता है, जिनमें सुरंगों का ढहना, जहरीली गैस, पानी भरना और अन्य दुर्घटनाएं शामिल हैं।

बचाव अभियान के सामने बड़ी चुनौती
पुलिस प्रमुख एडम्स ने बताया कि मलबे में अभी भी कुछ लोगों के फंसे होने की संभावना को देखते हुए तलाशी अभियान जारी रखा गया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल खुदाई का अभियान रोक दिया गया है।
ऐसे हादसों में बचाव अभियान बेहद जोखिम भरा होता है। माइन डंप की संरचना अस्थिर होने के कारण बचावकर्मियों के लिए मलबे के भीतर जाना खतरनाक हो सकता है। इसके अलावा, यह भी सुनिश्चित करना जरूरी होता है कि बचाव अभियान के दौरान ढांचा दोबारा न ढहे।
अधिकारियों की ओर से मलबे के नीचे फंसे संभावित लोगों की संख्या और आगे के बचाव अभियान को लेकर विस्तृत जानकारी का इंतजार है।
दक्षिण अफ्रीका में पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
दक्षिण अफ्रीका में अवैध खनन से जुड़े हादसे कोई नई बात नहीं हैं। विशेष रूप से बंद और परित्यक्त खदानों में काम करने वाले अवैध खनिक अक्सर जानलेवा परिस्थितियों में काम करते हैं।
जनवरी 2025 में जोहान्सबर्ग के दक्षिण-पश्चिम में स्थित स्टिलफोंटेन की एक बंद खदान से 78 शव बरामद किए गए थे। ये खनिक लंबे समय तक जमीन के नीचे फंसे रहे थे। यह घटना देश में अवैध खनन के खिलाफ चलाए गए पुलिस अभियान के दौरान सामने आई थी।
स्टिलफोंटेन की घटना ने भी अवैध खनन, प्रवासी श्रमिकों और बंद खदानों की सुरक्षा को लेकर देशभर में बहस छेड़ दी थी। ताजा हादसा एक बार फिर इसी समस्या की गंभीरता को सामने लाता है।
अवैध खनन रोकना बड़ी चुनौती
दक्षिण अफ्रीकी सरकार और पुलिस लंबे समय से अवैध खनन गतिविधियों पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन बंद खदानों और खनन क्षेत्रों की बड़ी संख्या, सीमित निगरानी तथा गरीबी और बेरोजगारी जैसी सामाजिक समस्याओं के कारण इसे पूरी तरह रोकना आसान नहीं है।
अवैध खनन में शामिल लोग अक्सर बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। कई बार वे महीनों तक जमीन के नीचे रहकर खनन करते हैं। उन्हें सुरक्षा उपकरण और आपातकालीन सुविधाएं भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं होतीं। यही कारण है कि खदानों के ढहने या अन्य दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान चली जाती है।
हादसे की जांच जारी
ताजा घटना के बाद दक्षिण अफ्रीकी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संदिग्ध अवैध खनिक कानूनी रूप से संचालित डंप साइट तक कैसे पहुंचे और वहां कितने लोग मौजूद थे।
अधिकारियों का कहना है कि मलबे के नीचे फंसे लोगों की तलाश और घटनास्थल की सुरक्षा स्थिति का आकलन किया जा रहा है। घायल लोगों और हिरासत में लिए गए संदिग्धों से भी घटना से जुड़ी जानकारी हासिल की जा सकती है।
इस हादसे ने दक्षिण अफ्रीका में अवैध खनन की समस्या और खनन क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। 14 लोगों की मौत के साथ यह घटना दिखाती है कि बेहतर रोजगार और आय की तलाश में जोखिम उठाने वाले अवैध खनिक किस तरह जानलेवा परिस्थितियों में काम करने को मजबूर होते हैं।












