South Korea का नया Filter बिना बिजली धूप से करेगा समुद्री पानी शुद्ध, तेल भी करेगा अलग

दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने ऐसा हाइड्रोजेल फिल्टर विकसित किया है, जो बिना बिजली धूप की मदद से समुद्री पानी से तेल अलग कर उसे शुद्ध पानी में बदल सकता है।

साउथ कोरिया के शोधकर्ताओं ने एक नया हाइड्रोजेल फिल्टर विकसित किया है, जो समुद्री पानी से तेल और ग्रीस को अलग कर धूप की मदद से उसे शुद्ध पानी में बदल सकता है। यह तकनीक बिजली के बिना भी काम करने में सक्षम है।

Tech: दक्षिण कोरिया की पुसान नेशनल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने समुद्री पानी को शुद्ध करने के लिए एक नई तकनीक विकसित की है। इस Hydrogel Membrane Filter की मदद से तेल और ग्रीस मिले खारे पानी को बिना बिजली, केवल सूर्य की रोशनी का उपयोग करके साफ पेयजल में बदलने का दावा किया गया है।

समुद्री पानी को साफ करने के लिए विकसित हुआ नया फिल्टर

South Korea का नया Filter बिना बिजली धूप से करेगा समुद्री पानी शुद्ध, तेल भी करेगा अलग

दुनिया के कई देशों में साफ पेयजल की उपलब्धता लगातार बड़ी चुनौती बनती जा रही है। बढ़ती आबादी, जल प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने वाली तकनीकों पर तेजी से काम हो रहा है। इसी दिशा में दक्षिण कोरिया की Pusan National University के शोधकर्ताओं ने एक नया मल्टीफंक्शनल हाइड्रोजेल मेम्ब्रेन विकसित किया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह फिल्टर समुद्री पानी में मौजूद तेल और ग्रीस को प्रभावी ढंग से अलग कर सकता है, जिससे खारे पानी को शुद्ध करने की प्रक्रिया अधिक आसान और प्रभावी हो सकती है।

धूप की मदद से करेगा पानी को शुद्ध

रिपोर्ट के अनुसार, यह नई तकनीक बिजली पर निर्भर नहीं है। फिल्टर सूर्य की ऊर्जा का उपयोग करके पानी को शुद्ध करने की प्रक्रिया में मदद करता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह सिस्टम सोलर-ड्रिवन डीसैलिनेशन तकनीक के साथ काम करता है, जिससे समुद्री पानी से नमक अलग करने के साथ-साथ तेल और अन्य अशुद्धियों को भी हटाया जा सकता है। इसका उद्देश्य उन तटीय इलाकों और बंदरगाहों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है, जहां समुद्री पानी में तेल और ग्रीस की मात्रा अधिक होती है।

तेल और ग्रीस हटाने में मिले बेहतर परिणाम

इस फिल्टर को विकसित करने वाली टीम का नेतृत्व प्रोफेसर सांगह्यून ज्योंग ने किया है। शोध के दौरान तैयार किए गए हाइड्रोजेल मेम्ब्रेन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह पानी और तेल को अलग-अलग व्यवहार करने वाली सतह प्रदान करता है। इसकी मदद से तेल और ग्रीस फिल्टर में अलग हो जाते हैं, जबकि पानी आगे की शुद्धिकरण प्रक्रिया के लिए गुजरता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे समुद्री जल को पीने योग्य बनाने वाली मौजूदा तकनीकों की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का समाधान मिल सकता है।

बिजली की जरूरत नहीं, दूरदराज के क्षेत्रों में हो सकता है उपयोग

नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके संचालन के लिए बिजली की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे में यह उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, जहां बिजली की उपलब्धता सीमित है या प्राकृतिक आपदाओं के बाद पेयजल संकट पैदा हो जाता है। यदि भविष्य में यह तकनीक बड़े स्तर पर व्यावसायिक रूप से अपनाई जाती है, तो तटीय क्षेत्रों, द्वीपों और जल संकट वाले इलाकों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

अभी शोध चरण में है नई तकनीक

फिलहाल यह तकनीक शोध और परीक्षण के चरण में है। वैज्ञानिक इसके प्रदर्शन, टिकाऊपन और बड़े पैमाने पर उपयोग की संभावनाओं का मूल्यांकन कर रहे हैं। यदि आगे के परीक्षण सफल रहते हैं, तो यह फिल्टर समुद्री जल शुद्धिकरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि साबित हो सकता है। इससे भविष्य में ऊर्जा की कम खपत के साथ स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के नए विकल्प विकसित होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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