कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार के बाद मंत्री पद नहीं मिलने से कांग्रेस के कई विधायक नाराज हो गए हैं। कई नेताओं ने इस्तीफे की चेतावनी दी है, जबकि विभिन्न जिलों में समर्थकों के प्रदर्शन के बीच पार्टी नेतृत्व स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है।
बेंगलुरु: कर्नाटक में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व में हुए कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। मंत्री पद से वंचित रहे कई विधायकों ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की है। कुछ नेताओं ने विधायक पद और पार्टी द्वारा दिए गए अन्य दायित्वों से इस्तीफा देने की चेतावनी दी है, जबकि राज्य के विभिन्न जिलों में उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।
पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की नई चुनौती खड़ी कर दी है। इस बीच, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने नाराज नेताओं से संयम बरतने और जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेने की अपील की है।
कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ा राजनीतिक असंतोष
कैबिनेट विस्तार के दौरान कई वरिष्ठ और अनुभवी विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। इसके बाद कई नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्षों से पार्टी के प्रति निष्ठा और संगठन के लिए किए गए कार्यों की अनदेखी की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी सरकार में मंत्रिमंडल गठन के दौरान सीमित पदों के कारण असंतोष की स्थिति बनना सामान्य है, लेकिन कर्नाटक में यह असंतोष अब सार्वजनिक विरोध और इस्तीफे की चेतावनियों तक पहुंच गया है।
यशवंतरायगौड़ा वी. पाटिल ने जताई नाराजगी
विजयपुरा जिले के इंडी विधानसभा क्षेत्र से विधायक यशवंतरायगौड़ा वी. पाटिल सबसे मुखर नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने मंत्री पद नहीं मिलने पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कथित तौर पर विधायक पद से इस्तीफा देने की पेशकश की। उन्होंने कहा कि लंबे समय से पार्टी के प्रति समर्पित और ईमानदारी से काम करने वाले नेताओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। उनके अनुसार, इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हो सकता है।
अन्य विधायकों ने भी उठाए सवाल
सागर से विधायक बेलूर गोपालकृष्ण ने भी दावा किया कि उन्हें जानबूझकर मंत्रिमंडल से बाहर रखा गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो वे विधायक पद के साथ-साथ पार्टी द्वारा दिए गए किसी भी बोर्ड या निगम के पद से भी इस्तीफा दे सकते हैं। कोलार जिले के बंगारापेट विधायक एस.एन. नारायणस्वामी ने भी नाराजगी जताई। उनके समर्थकों ने विरोध स्वरूप पार्टी के विभिन्न पदों से इस्तीफा दे दिया। नारायणस्वामी ने कहा कि मंत्री पद से वंचित करने वालों को भविष्य में राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
इसी तरह मालूर के विधायक के.वाई. नंजे गौड़ा और भद्रावती के विधायक बी.के. संगमेश ने भी अपनी निराशा व्यक्त की। संगमेश ने कहा कि वह अपने क्षेत्र के लोगों से चर्चा करने के बाद आगे की राजनीतिक रणनीति तय करेंगे।
वरिष्ठ नेताओं में भी असंतोष
होन्नाली से वरिष्ठ विधायक डी.जी. शांतनगौड़ा ने घोषणा की कि वह अपने समर्थकों की बैठक बुलाकर अगला कदम तय करेंगे। पूर्व मंत्री डॉ. एच.सी. महादेवप्पा के समर्थकों ने भी नाराजगी जाहिर की। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनके समर्थक सांसद सुनील बोस से विरोध स्वरूप इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि असंतोष केवल कुछ नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के कई क्षेत्रों में अलग-अलग स्तर पर दिखाई दे रहा है।
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समर्थकों का विरोध प्रदर्शन
कैबिनेट विस्तार के बाद कई जिलों में समर्थकों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किए। मैसूरु में वरिष्ठ विधायक तनवीर सैत को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिलने के विरोध में समर्थकों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान एक समर्थक द्वारा कथित रूप से जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास करने की घटना भी सामने आई, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गयाबेंगलुरु में विजयनगर के विधायक एम. कृष्णप्पा और गोविंदराजनगर की विधायक प्रिया कृष्णा के समर्थकों ने भी प्रदर्शन किया। कुछ स्थानों पर मुख्यमंत्री की तस्वीरें जलाकर विरोध दर्ज कराया गया।
कई जिलों में बढ़ा विरोध
बेलगावी, विजयपुरा, बागलकोट और चित्रदुर्ग सहित कई जिलों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने प्रदर्शन किए। बागेपल्ली में विधायक एस.एन. सुब्बा रेड्डी के समर्थकों ने सड़क जाम, टायर जलाकर प्रदर्शन और स्थानीय बंद का आह्वान किया। इससे स्पष्ट संकेत मिला कि असंतोष अब जमीनी स्तर तक पहुंच चुका है।
पार्टी नेतृत्व ने की संयम की अपील
बढ़ते विरोध के बीच कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने नाराज नेताओं से भावनात्मक फैसले न लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक असंतुष्ट विधायक से व्यक्तिगत बातचीत की जाएगी और उनकी सभी चिंताओं को कांग्रेस आलाकमान तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि संगठन सभी पक्षों की बात सुनेगा और समाधान निकालने का प्रयास करेगा।
कांग्रेस के सामने नई राजनीतिक चुनौती
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी राज्य सरकार में कैबिनेट विस्तार के बाद असंतोष की संभावना रहती है, लेकिन यदि समय रहते नाराज नेताओं को संतुष्ट नहीं किया गया तो इसका असर सरकार और संगठन दोनों पर पड़ सकता है।
हालांकि कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या बातचीत के जरिए नाराज नेताओं को मनाया जा सकेगा।
आगे क्या?
फिलहाल किसी भी विधायक का इस्तीफा आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं हुआ है और अधिकांश नेताओं ने अंतिम निर्णय लेने से पहले समर्थकों तथा पार्टी नेतृत्व से चर्चा करने की बात कही है। यदि कांग्रेस नेतृत्व सफलतापूर्वक संवाद स्थापित कर लेता है, तो पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को कम किया जा सकता है। अन्यथा यह मुद्दा राज्य की राजनीति में आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है।









