फरवरी में शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। सिर्फ 9 कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स करीब 3000 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 25,500 के आसपास आ गया। इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
Stock Market Outlook: फरवरी का महीना शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है। कभी बाजार नई ऊंचाइयों पर पहुंचता दिखा, तो कभी अचानक आई गिरावट ने माहौल पूरी तरह बदल दिया। सिर्फ 9 कारोबारी दिनों में Sensex करीब 3000 अंक टूट चुका है, जबकि Nifty 50 25,500 के आसपास आ गया है। इस तेज गिरावट ने निवेशकों के मन में एक ही सवाल खड़ा कर दिया है कि आगे बाजार किस दिशा में जाएगा और क्या यह सिर्फ एक correction है या किसी बड़ी कमजोरी का संकेत।
फरवरी में बाजार का रोलर-कोस्टर सफर
फरवरी की शुरुआत शेयर बाजार के लिए कमजोर रही थी। बजट डे यानी 1 फरवरी को बाजार में निराशा का माहौल देखने को मिला। उस दिन सेंसेक्स फिसलकर 79,899 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24,572 तक टूट गया। निवेशकों को लगने लगा कि शायद बजट से बड़ी उम्मीदें पूरी नहीं हो पाईं।
हालांकि यह कमजोरी ज्यादा दिन नहीं टिक पाई। सिर्फ दो कारोबारी सत्रों के भीतर तस्वीर पूरी तरह बदल गई। 3 फरवरी को भारत-अमेरिका trade agreement से जुड़ी खबरों के बाद बाजार में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। सेंसेक्स तेजी से उछलकर 85,872 तक पहुंच गया और निफ्टी भी 26,341 के स्तर को छू गया। उस समय बाजार में optimism इतना मजबूत था कि निवेशकों को लगा अब तेजी का नया दौर शुरू हो चुका है।
तेजी पर लगा ब्रेक, 9 सत्रों में बड़ी गिरावट
लेकिन यह उत्साह ज्यादा दिन कायम नहीं रह सका। इसके बाद लगातार बिकवाली का दौर शुरू हुआ और अगले 9 कारोबारी सत्रों में बाजार ने निवेशकों को झटका दिया। 13 फरवरी तक आते-आते सेंसेक्स अपने हालिया उच्च स्तर से 3000 अंक से ज्यादा टूटकर 82,793 के आसपास आ गया। वहीं निफ्टी भी करीब 800 अंक फिसलकर 25,500 के पास पहुंच गया।
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह आईटी शेयरों में भारी बिकवाली मानी जा रही है। आईटी सेक्टर में कमजोरी ने पूरे बाजार के sentiment को कमजोर कर दिया और निवेशक risk लेने से बचते नजर आए।
आईटी शेयरों में बिकवाली से क्यों बिगड़ा मूड
आईटी सेक्टर भारतीय शेयर बाजार में मुनाफे का एक बड़ा आधार माना जाता है। जब इस सेक्टर में तेज गिरावट आती है, तो उसका असर पूरे बाजार पर पड़ता है। हाल के दिनों में अमेरिकी टेक शेयरों में दबाव, global slowdown की चिंता और डॉलर की मजबूती जैसे कारणों से आईटी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली तेज हुई।
आईटी शेयरों की कमजोरी ने न सिर्फ बड़े निवेशकों बल्कि रिटेल निवेशकों के confidence को भी हिला दिया। नतीजा यह रहा कि बाजार में selling pressure बढ़ता चला गया और तेजी का पूरा माहौल कुछ ही दिनों में बदल गया।
रिटेल निवेशकों की लीवरेज पोजिशन भी बनी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे एक अहम वजह रिटेल निवेशकों की leverage position का खुलना भी है। बीते कुछ महीनों में कई छोटे निवेशकों ने margin funding और derivatives यानी futures and options सेगमेंट में बड़े दांव लगाए थे।
जब बाजार ऊपर जा रहा था, तब यह strategy फायदेमंद दिख रही थी। लेकिन जैसे ही आईटी शेयरों में गिरावट आई और बाजार फिसला, वैसे ही इन लीवरेज पोजिशन पर दबाव बढ़ गया। मजबूरी में की गई selling ने गिरावट को और तेज कर दिया।
एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं, घबराने की जरूरत है या नहीं
बाजार की मौजूदा स्थिति पर एक्सपर्ट की राय भी निवेशकों के लिए अहम है। Geojit Investments के chief investment strategist वीके विजयकुमार का कहना है कि आईटी सेक्टर भारतीय कॉरपोरेट earnings का बड़ा हिस्सा देता है, इसलिए इसमें बिकवाली से बाजार में घबराहट फैलना स्वाभाविक है।
उनका मानना है कि इस समय panic selling करना समझदारी नहीं होगी। निवेशकों को चाहिए कि वे बाजार को थोड़ा समय दें और clarity आने तक धैर्य बनाए रखें।
वहीं Bhambwani Securities के market expert विजय भंबवानी का कहना है कि रिटेल निवेशकों की ज्यादा leverage भी गिरावट की बड़ी वजह है। जैसे-जैसे कीमतें नीचे आईं, वैसे-वैसे forced selling बढ़ती गई और बाजार पर दबाव बना रहा।
निफ्टी का तकनीकी नजरिया, 25,000 क्यों है अहम
अगर technical analysis की बात करें तो फिलहाल निफ्टी अभी भी 20-day और 200-day moving average के ऊपर बना हुआ है। यह एक राहत की बात मानी जा रही है।
विश्लेषकों के मुताबिक 25,000 का स्तर निफ्टी के लिए एक मजबूत support zone है। अगर बाजार इस स्तर के ऊपर टिके रहने में कामयाब रहता है, तो बड़ी गिरावट से बचा जा सकता है। फिलहाल निफ्टी के 25,500 से 26,000 की range में घूमने की संभावना जताई जा रही है।
ऊपर की तरफ 25,800 से 26,000 का दायरा मजबूत resistance माना जा रहा है। हर बार जब निफ्टी इस zone के पास पहुंचता है, तो मुनाफावसूली देखने को मिल रही है।
सेंसेक्स के लिए कौन से स्तर रहेंगे निर्णायक
सेंसेक्स की बात करें तो जनवरी और फरवरी दोनों महीनों में लगभग 85,870 के आसपास इसका upper level बना है। यह साफ संकेत देता है कि इस स्तर पर बाजार को मजबूत selling pressure का सामना करना पड़ रहा है।
तकनीकी संकेतों के अनुसार 82,000 से 82,400 का दायरा सेंसेक्स के लिए अहम support zone है। अगर सेंसेक्स इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तो medium term में तेजी की उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं होगी।
हालांकि अगर बाजार को दोबारा भरोसेमंद तेजी दिखानी है, तो सेंसेक्स को 84,000 से 84,500 के ऊपर मजबूती से निकलना होगा। तभी निवेशकों का confidence लौट सकता है।











