University of Delhi में वंदे मातरम् गायन कार्यक्रम, पालन की अंतिम तिथि घोषित

केंद्र सरकार के आदेश के बाद सभी सरकारी और शैक्षणिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान के बाद वंदे मातरम् के छह छंद अनिवार्य होंगे।

दिल्ली विश्वविद्यालय के साहित्य उत्सव में पहली बार ‘वंदे मातरम्’ के पूरे छह छंद गाए गए। केंद्र सरकार के नए आदेश के अनुसार यह नियम तुरंत लागू हो गया है। अब सभी सरकारी और शैक्षणिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान के बाद ‘वंदे मातरम्’ को पूरे छह छंदों के साथ गाना या बजाना अनिवार्य होगा। यह कदम राष्ट्रीय एकता और भारत माता के सम्मान को बढ़ावा देगा।

वंदे मातरम् लागू करने का नया नियम: दिल्ली विश्वविद्यालय के साहित्य उत्सव में 2026 में उद्घाटन सत्र के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के पूरे छह छंद गाए गए। इस कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो. योगेश सिंह, संस्कृति परिषद के पदाधिकारी, शिक्षक और छात्र मौजूद थे। केंद्र सरकार ने आदेश दिया है कि सभी सरकारी और शैक्षणिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान के बाद इसे अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे राष्ट्रीय गीत का महत्व और भारत माता के सम्मान को बढ़ावा मिलेगा।

डीयू में पहली बार पूरे छह छंद गाए गए

दिल्ली विश्वविद्यालय के साहित्य उत्सव में उद्घाटन सत्र में ‘वंदे मातरम्’ के पूरे छह छंद गाए गए, जो लगभग 3 मिनट 10 सेकंड तक चले। मंच पर कुलगुरु प्रो. योगेश सिंह, संस्कृति परिषद के पदाधिकारी, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे। यह पहली बार था जब विश्वविद्यालय के बड़े आयोजन में पूरे छह छंदों के साथ सामूहिक गायन हुआ।

इस आयोजन का मुख्य मकसद केंद्र सरकार के नए आदेश का पालन करना था, जिसमें कहा गया है कि सभी सरकारी और शैक्षणिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ को पूरे छह छंद गाना या बजाना अनिवार्य होगा।

लागू करने की डेडलाइन और नियम

गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार यह नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। अब सभी सरकारी संस्थान, स्कूल, कॉलेज और औपचारिक कार्यक्रम ‘वंदे मातरम्’ के छह छंदों के साथ प्रस्तुत करेंगे। इस दौरान पहले राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ होगा और उसके तुरंत बाद ‘वंदे मातरम्’ गाया या बजाया जाएगा।

नए आदेश का पालन राष्ट्रपति, राज्यपाल और बड़े नागरिक सम्मान समारोहों जैसे पद्म पुरस्कार में भी अनिवार्य होगा। सिनेमा हॉल में फिलहाल इस नियम का पालन नहीं करना होगा।

इतिहास और महत्व

‘वंदे मातरम्’ बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1875 में लिखा गया था और उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित हुआ। 1937 में कांग्रेस ने केवल पहले दो छंदों को आधिकारिक रूप से अपनाया था। अब सरकार ने इसे उसके मूल रूप में पूरे छह छंदों के साथ प्रस्तुत करने का फैसला किया है। यह कदम राष्ट्रीय एकता और भारत माता के सम्मान को दर्शाता है।

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