भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह भारी गिरावट के बाद अब निवेशकों की नजर RBI की मौद्रिक नीति, दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों और पश्चिम एशिया के तनाव पर रहेगी। वैश्विक आर्थिक आंकड़े भी बाजार को प्रभावित करेंगे।
शेयर बाजार: अगले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार की दिशा कई अहम घरेलू और वैश्विक घटनाक्रमों से तय हो सकती है। RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा, दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख ट्रिगर रहेंगे। पिछले सप्ताह सेंसेक्स 1,670.84 अंक गिरकर 71,909.70 पर, जबकि निफ्टी 22,421.95 पर बंद हुआ।
RBI Policy और Q2 Results पर रहेगी नजर
अगले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा सबसे अहम घरेलू घटनाक्रमों में शामिल होगी। निवेशक रेपो रेट पर फैसले के साथ केंद्रीय बैंक के महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर रुख पर भी नजर रखेंगे। RBI का नीतिगत फैसला ब्याज दरों और वित्तीय बाजारों की दिशा के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है।
दूसरी ओर, कंपनियों के दूसरी तिमाही यानी Q2 के नतीजे भी बाजार की चाल को प्रभावित करेंगे। निवेशक कंपनियों की आय, मुनाफे, मार्जिन और आगे के कारोबार को लेकर दिए गए अनुमान पर नजर रखेंगे। वैश्विक दबाव के बीच कंपनियों के नतीजे घरेलू बाजार में स्टॉक और सेक्टर आधारित गतिविधियां बढ़ा सकते हैं।
पश्चिम एशिया तनाव और Crude Oil अहम
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव अगले सप्ताह भी बाजार के लिए बड़ा ट्रिगर रहेगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्र में तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं तो भारतीय शेयर बाजार में राहत की तेजी देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत तनाव बढ़ने पर बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों का रुख भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। हाल के दिनों में Brent crude अपने ऊंचे स्तरों से नीचे आया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति युद्ध-पूर्व स्तरों के करीब पहुंचने से ऊर्जा कीमतों को कुछ राहत मिली है। हालांकि पश्चिम एशिया की स्थिति में किसी भी बड़े बदलाव का असर क्रूड की कीमतों पर तुरंत दिखाई दे सकता है।
सेंसेक्स-निफ्टी में पिछले सप्ताह बड़ी गिरावट
छुट्टियों के कारण कारोबारी सप्ताह छोटा रहा, लेकिन इसके बावजूद भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक दबाव देखने को मिला। सप्ताह की शुरुआत से ही बाजार में कमजोरी रही। सोमवार को सेंसेक्स 1.52 प्रतिशत गिरा। अगले दो कारोबारी सत्रों में भी दबाव बना रहा और गुरुवार को सेंसेक्स में 0.79 प्रतिशत की अतिरिक्त गिरावट दर्ज की गई।

पूरे सप्ताह सेंसेक्स 1,670.84 अंक टूटकर 71,909.70 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 3 प्रतिशत से अधिक गिरकर 22,421.95 पर आ गया। विश्लेषकों के अनुसार लगातार गिरावट बाजार में चल रहे करेक्शन को दर्शाती है।
तकनीकी आधार पर निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ है। इसका साप्ताहिक RSI करीब 31.06 रहा, जो 50 के तटस्थ स्तर से काफी नीचे है। यह बाजार में कमजोर मोमेंटम का संकेत देता है। हालांकि RSI ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंचने के कारण निचले स्तरों पर तकनीकी रिकवरी भी देखने को मिल सकती है।
22,800 और 23,000 पर रेजिस्टेंस
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 22,800 और 23,000 के स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस रहेंगे। यदि इंडेक्स इन स्तरों के ऊपर टिकाऊ बढ़त हासिल करता है तो बाजार में बिकवाली का दबाव कम हो सकता है।
वहीं नीचे की ओर 22,350 और 22,180 के स्तर प्रमुख सपोर्ट माने जा रहे हैं। इन स्तरों के आसपास बाजार की गतिविधि पर निवेशकों की नजर रहेगी।
फिलहाल बाजार की धारणा पर वैश्विक कारकों का प्रभाव ज्यादा है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने, महंगाई की चिंता और ऊंची ऊर्जा कीमतों ने निवेशकों को सतर्क रखा है। अमेरिकी Treasury yields में तेजी से उभरते बाजारों में निवेश का आकर्षण भी प्रभावित हो सकता है।
मजबूत घरेलू आंकड़ों से मिल सकता है सहारा
वैश्विक दबाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ आंकड़े सकारात्मक रहे हैं। अगस्त में भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि यानी IIP बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई की संशोधित वृद्धि 7.4 प्रतिशत थी।
अगस्त में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि 9 प्रतिशत रही। बिजली और गैस आपूर्ति में भी 12.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन आंकड़ों से घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत मिलता है।
अगले सप्ताह अमेरिका से आने वाले नॉन-फार्म पेरोल्स और ISM मैन्युफैक्चरिंग PMI जैसे आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा के लिए अहम होंगे। इन आंकड़ों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति और ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव आ सकता है।
कुल मिलाकर अगले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए RBI की मौद्रिक नीति, Q2 कॉरपोरेट नतीजे और पश्चिम एशिया का तनाव सबसे महत्वपूर्ण ट्रिगर रहेंगे। इसके साथ कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और वैश्विक बॉन्ड यील्ड भी बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकते हैं। निवेशकों को इन घटनाक्रमों से बाजार की अगली दिशा के संकेत मिलने की उम्मीद रहेगी।











