केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद किसानों को सस्ती यूरिया उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रति बोरी करीब ₹2,700 सब्सिडी दे रही है। सरकार पीएम-किसान और KCC के जरिए किसानों की लागत घटाने और कृषि उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दे रही है।
Business: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद किसानों को सस्ती यूरिया उपलब्ध कराने के लिए प्रति बोरी करीब ₹2,700 की सब्सिडी दे रही है। उन्होंने पीएम-किसान और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं के जरिए कृषि लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने की सरकार की प्राथमिकता भी बताई।
यूरिया की कीमतों पर सरकार उठा रही बड़ा बोझ
भारत उर्वरकों का बड़ा आयातक देश है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर इसकी आपूर्ति और लागत पर पड़ता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि यूरिया की वैश्विक कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद केंद्र सरकार किसानों को सस्ती दर पर खाद उपलब्ध करा रही है।

वित्त मंत्री के मुताबिक, कोविड-19 महामारी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण यूरिया की आयात लागत कई बार ₹3,000 प्रति बोरी तक पहुंच गई थी। इसके बावजूद सरकार ने किसानों पर इस बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ नहीं डाला। किसानों को लगभग ₹300 प्रति बोरी की दर पर यूरिया उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने बड़ी मात्रा में सब्सिडी का भार खुद उठाया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसान कल्याण सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। सरकार का प्रयास है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद किसानों को खेती के लिए जरूरी उर्वरक सस्ती दरों पर मिलते रहें।
यूरिया सब्सिडी का फायदा कैसे मिलता है?
सरकार की यूरिया सब्सिडी व्यवस्था के तहत यूरिया की वास्तविक लागत और किसानों से वसूली जाने वाली कीमत के बीच के अंतर को केंद्र सरकार वहन करती है। सब्सिडी की राशि उर्वरक निर्माताओं और आयातकों को दी जाती है, ताकि किसानों को नियंत्रित कीमत पर खाद उपलब्ध कराई जा सके।
फिलहाल 45 किलोग्राम यूरिया की एक बोरी का सरकार द्वारा निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य यानी MRP ₹242 है। इसमें नीम कोटिंग शुल्क और लागू टैक्स शामिल नहीं होते। वित्त मंत्री ने किसानों द्वारा चुकाई जाने वाली कीमत लगभग ₹300 बताते हुए सरकार की ओर से किए जा रहे खर्च और सब्सिडी के स्तर को रेखांकित किया।
इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में होने वाले बड़े उतार-चढ़ाव से बचाना है। सरकार महंगी आयात लागत के बावजूद किसानों के लिए खाद को किफायती बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
पीएम-किसान और KCC पर भी सरकार का जोर
वित्त मंत्री ने कहा कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसके साथ ही सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी DBT और किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC के माध्यम से संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने पर भी जोर दे रही है।
उन्होंने कहा कि जरूरी कृषि सब्सिडी में किसी तरह की कमी न हो, इसके लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। सरकार का व्यापक लक्ष्य किसानों की खेती की लागत को कम करना और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना है।
मदनपल्ले में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आंध्र प्रदेश में कृषि और बागवानी क्षेत्र को बढ़ावा देने से जुड़ी कई पहलों पर भी चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कृषि एवं इससे जुड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने और किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही हैं।












