ईरान ने Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने का प्रस्ताव पेश किया है। इससे वैश्विक तेल और गैस सप्लाई प्रभावित होगी। भारत ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया।
World News: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान ने Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों के लिए 'सुरक्षित मार्ग' पर शुल्क लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है। यह कदम वैश्विक तेल और गैस बाजार के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ईरान की संसद इस ड्राफ्ट बिल को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है, जिससे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर कानूनी नियंत्रण स्थापित हो सकेगा। इस बिल के लागू होने पर जहाज कंपनियों को पारगमन के लिए शुल्क देना होगा और सुरक्षा के साथ-साथ व्यापारिक निर्णयों में भी नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
वैश्विक तेल बाजार पर असर
Strait of Hormuz विश्व के कुल तेल और LNG व्यापार का करीब 20 प्रतिशत संभालता है। युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिकी और इजरायली हमलों के कारण यहां से शिपिंग गतिविधि बेहद सीमित हो गई है। केवल कुछ चुनिंदा जहाज, जिनके पास IRGC की अनुमति है, ही पार कर पा रहे हैं।

इससे पहले से ही कुछ जहाजों से अनौपचारिक शुल्क लिया जा रहा था। चालक दल, कार्गो और रूट की जानकारी साझा करने के साथ-साथ 20 लाख डॉलर तक का भुगतान भी किया जा रहा था। औपचारिक टोल सिस्टम लागू होने पर यह राशि और प्रक्रिया और जटिल हो जाएगी।
होर्मुज बंद होने से उत्पन्न संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल और गैस की आपूर्ति में बड़ी समस्या पैदा होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार 28 फरवरी से ही यातायात बाधित है, टैंकर ट्रैफिक घटा है और ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। ब्रेंट क्रूड का भाव 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका उसके पावर प्लांट्स पर हमला करता है तो पूरा जलमार्ग बंद किया जा सकता है। इससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता और महंगाई बढ़ सकती है।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने ईरान के प्रस्तावित टोल को पूरी तरह खारिज कर दिया है। शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश सिन्हा ने कहा कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य है और अंतरराष्ट्रीय संधियों के अनुसार यहां स्वतंत्र व्यापार का अधिकार है। कोई भी शुल्क लगाने का दावा बेबुनियाद है। भारत ने स्पष्ट किया कि शिपिंग कंपनियों और व्यापारी समुदाय को इस तरह के दावों से डरने की जरूरत नहीं है।

होर्मुज की भौगोलिक रणनीति
होर्मुज जलडमरूमध्य 140 मील लंबा और केवल 25 मील चौड़ा है। लोडेड टैंकरों को पार करने में 10 से 14 घंटे का समय लगता है। इसकी संवेदनशील भौगोलिक स्थिति इसे युद्ध और हमलों के लिए जोखिमपूर्ण बनाती है। यदि युद्धविराम होता भी है तो नौसेना एस्कॉर्ट, माइन क्लियरेंस और बहुराष्ट्रीय समन्वय की आवश्यकता होगी। रेड सी रूट का विकल्प भी जोखिम भरा है और ईरान ने बाब एल मंदेब जलडमरूमध्य पर भी चिंता जताई है।
सुरक्षा और बीमा की चुनौतियां
शिपिंग कंपनियां ऊंचे बीमा प्रीमियम और युद्ध क्षेत्र भत्ते का बोझ उठाने को मजबूर हैं। टोल सिस्टम लागू होने पर सुरक्षा सुनिश्चित करने और शुल्क देने के बीच जहाज कंपनियों को कठिन निर्णय लेना पड़ेगा। यह स्थिति वैश्विक तेल सप्लाई चैन और व्यापार को और जटिल बना सकती है।










