हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा मंगलवार को आय से अधिक संपत्ति मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) के सामने पेश हुए। वह सुबह करीब 11:50 बजे धर्मशाला पहुंचे और विजिलेंस थाना में जांच अधिकारी के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पेशी को देखते हुए विजिलेंस कार्यालय के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और कई जगह बैरिकेडिंग की गई थी। भाजपा समर्थक भी बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे और कई कार्यकर्ताओं ने काली पट्टियां बांध रखी थीं।
सुधीर शर्मा ने विजिलेंस कार्यालय पहुंचने से पहले मीडिया से बातचीत में कहा कि जांच एजेंसी ने जिन तथ्यों और दस्तावेजों की मांग की है, वह उससे भी अधिक जानकारी लेकर पहुंचे हैं। उन्होंने जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर राजनीतिक निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्हें और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के समर्थक नेताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर सरकार की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।
विजिलेंस की यह कार्रवाई उस मामले से जुड़ी है, जिसमें ब्यूरो ने सुधीर शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज की है। जांच एजेंसी ने प्रारंभिक जांच के दौरान आयकर रिटर्न, चुनावी हलफनामे, संपत्ति रिकॉर्ड, हाउस बिल्डिंग एडवांस से जुड़े दस्तावेज और संपत्तियों के मूल्यांकन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की थी। इसके बाद कथित तौर पर आय और संपत्ति के बीच अंतर की जांच आगे बढ़ाई गई। सुधीर शर्मा इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।
मामले में विजिलेंस ने विधायक से उनकी आय के स्रोत और संपत्तियों से जुड़े कई दस्तावेज मांगे हैं। इनमें आयकर रिटर्न में दिखाई गई 70,84,858 रुपये की राशि के स्रोत से जुड़े दस्तावेज भी शामिल हैं। इसके अलावा जमीन की बिक्री से प्राप्त करीब 74,07,000 रुपये से संबंधित मूल दस्तावेज, बिक्री विलेख, बैंक लेनदेन और धन हस्तांतरण का विवरण भी मांगा गया है।
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कांगड़ा जिले के रक्कड़ गांव में निर्माणाधीन बहुमंजिला आवासीय भवन से जुड़ा है। विजिलेंस ने भवन निर्माण से संबंधित बिल, वाउचर, निर्माण खाते, भुगतान रिकॉर्ड, नक्शे और ठेकेदारों से जुड़ी जानकारी मांगी है। इन दस्तावेजों के जरिए जांच एजेंसी निर्माण पर हुए खर्च और घोषित आय के बीच संबंध की पड़ताल कर रही है।
विजिलेंस थाना में पेशी से पहले सुधीर शर्मा हनुमान मंदिर भी पहुंचे और वहां पूजा-अर्चना की। इसके बाद वह जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए विजिलेंस कार्यालय पहुंचे। उनके साथ समर्थकों की भीड़ मौजूद रही। मौके पर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने क्षेत्र को कई हिस्सों में बांटकर निगरानी रखी।
पेशी को देखते हुए विजिलेंस थाना के आसपास चार अलग-अलग स्थानों पर पुलिस बैरिकेड लगाए गए थे। कई स्थानों पर पुलिस जवान तैनात किए गए थे। भाजपा कार्यकर्ता भी कार्यालय के बाहर मौजूद रहे। समर्थकों के काली पट्टी बांधकर पहुंचने से मामला केवल कानूनी जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका राजनीतिक रंग भी दिखाई दिया।
दरअसल, सुधीर शर्मा को इससे पहले 13 अगस्त को विजिलेंस के सामने पेश होने के लिए नोटिस जारी किया गया था। उस समय उनके कार्यालय की ओर से बताया गया था कि विधायक हिमाचल से बाहर हैं और वह 18 अगस्त को जांच में शामिल होंगे। बाद में उन्होंने ब्यूरो को भी इसकी जानकारी दी थी। इस वजह से 13 अगस्त की पेशी नहीं हो सकी थी।
अब 18 अगस्त को उनके विजिलेंस के सामने पहुंचने के बाद जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। जांच अधिकारी उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और पहले से एजेंसी के पास मौजूद रिकॉर्ड का मिलान कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर विधायक से अतिरिक्त दस्तावेज या स्पष्टीकरण भी मांगा जा सकता है।
विजिलेंस की जांच केवल विधायक की संपत्ति तक सीमित नहीं है। एजेंसी ने बैंक खातों, निवेश, जमीन की खरीद-बिक्री, वाहनों और निर्माण खर्च से जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच की बात कही है। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों को विस्तृत जांच के दौरान दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों से सत्यापित किया जाएगा।
मामले में संपत्तियों के मूल्यांकन को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसी भवन या संपत्ति की वास्तविक निर्माण लागत और रिकॉर्ड में दर्ज लागत के बीच अंतर होने पर उसका असर जांच पर पड़ सकता है। इसी तरह जमीन की बिक्री से प्राप्त रकम, निवेश और बैंक लेनदेन के स्रोत की भी जांच की जाएगी।
सुधीर शर्मा का कहना है कि वह जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं। इससे पहले भी उन्होंने विजिलेंस की कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था। दूसरी तरफ जांच एजेंसी का कहना है कि मामला प्रारंभिक जांच के बाद दर्ज किया गया है और अब कानूनी प्रक्रिया के तहत विस्तृत जांच की जा रही है।
सुधीर शर्मा हिमाचल की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वह पहले कांग्रेस में रहे और 2024 में भाजपा में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने भाजपा के टिकट पर धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता। उनके खिलाफ विजिलेंस की कार्रवाई इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह राज्य की मौजूदा कांग्रेस सरकार के मुखर आलोचक रहे हैं।
विजिलेंस के सामने पेशी के दौरान उनके समर्थकों की मौजूदगी ने भी राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। भाजपा कार्यकर्ताओं ने काली पट्टियां बांधकर जांच को लेकर अपना विरोध जताया। दूसरी ओर, कांग्रेस की ओर से यह कहा जाता रहा है कि यदि किसी नेता के खिलाफ जांच है तो उसे दस्तावेजों के जरिए अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। इस पूरे मामले में दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी आगे भी जारी रहने की संभावना है।
अब जांच एजेंसी के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि विधायक की ओर से पेश किए गए दस्तावेज प्रारंभिक जांच में सामने आए सवालों का कितना जवाब देते हैं। यदि दस्तावेजों से आय और संपत्ति का स्रोत स्पष्ट होता है तो जांच उसी आधार पर आगे बढ़ेगी। यदि कोई विसंगति सामने आती है तो एजेंसी उससे संबंधित अतिरिक्त जानकारी मांग सकती है।
इस मामले में अभी आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। आय से अधिक संपत्ति से जुड़ी FIR और जांच अपने आप में दोष साबित नहीं करती। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही सामने आएगा। इसलिए मामले में विजिलेंस के दस्तावेजी साक्ष्य और विधायक की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण दोनों महत्वपूर्ण रहेंगे।
धर्मशाला में हुई इस पेशी के कारण पुलिस और प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना पड़ा। विधायक के समर्थकों की भीड़ को देखते हुए विजिलेंस कार्यालय के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। बैरिकेडिंग के जरिए कार्यालय के आसपास आवाजाही नियंत्रित की गई, ताकि जांच प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
आने वाले दिनों में जांच के दौरान सुधीर शर्मा से दोबारा पूछताछ की जा सकती है। यदि किसी दस्तावेज की जरूरत होगी तो एजेंसी उसे भी उपलब्ध कराने के लिए कह सकती है। वहीं, विधायक और उनके कानूनी सलाहकार भी जांच के दौरान अपना पक्ष दस्तावेजों के आधार पर रखने की तैयारी में हैं।
कुल मिलाकर, धर्मशाला के भाजपा विधायक सुधीर शर्मा आय से अधिक संपत्ति मामले में 18 अगस्त को विजिलेंस के सामने पेश हुए। उनके पहुंचने से पहले ही धर्मशाला में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी और विजिलेंस थाना के आसपास बैरिकेडिंग के साथ भारी पुलिस बल तैनात रहा। भाजपा समर्थक काली पट्टियां बांधकर मौके पर पहुंचे। विजिलेंस ने आय, जमीन बिक्री, बैंक लेनदेन और रक्कड़ स्थित बहुमंजिला मकान के निर्माण से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। सुधीर शर्मा ने जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही है और मामले को राजनीतिक निशाने से भी जोड़कर सवाल उठाए हैं। फिलहाल आरोपों की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।












