दोस्ती में धोखा! 1 लाख रुपये हड़पने का आरोप, पैसे मांगने पर युवक को पीटा कोर्ट के आदेश पर 5 पर FIR

एक युवक ने दोस्त पर 1 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाया। पैसे वापस मांगने पर मारपीट और जान से मारने की धमकी दी गई। सीजेएम कोर्ट के आदेश पर 5 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई।
दोस्ती में धोखा! 1 लाख रुपये हड़पने का आरोप, पैसे मांगने पर युवक को पीटा कोर्ट के आदेश पर 5 पर FIR
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उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में दोस्ती और भरोसे से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जहां एक युवक ने अपने ही दोस्त पर 1 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि जब उसने अपनी रकम वापस मांगी तो उसके साथ मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। मामले में कार्रवाई न होने पर उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद सीजेएम कोर्ट के आदेश पर पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

शिकायत के अनुसार, पीड़ित और आरोपी के बीच पहले से दोस्ताना संबंध थे। इसी भरोसे के आधार पर आरोपी को एक लाख रुपये दिए गए थे। पीड़ित का आरोप है कि तय समय बीत जाने के बाद भी रकम वापस नहीं की गई। जब उसने कई बार अपने पैसे मांगे तो आरोपी टालमटोल करता रहा।

आरोप है कि बाद में जब पीड़ित ने दोबारा अपने पैसे की मांग की तो विवाद बढ़ गया। इसी दौरान उसके साथ कथित रूप से मारपीट की गई। पीड़ित का यह भी दावा है कि आरोपियों ने उसे गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद वह स्थानीय पुलिस के पास पहुंचा, लेकिन उसकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

इसके बाद पीड़ित ने अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के बाद संबंधित न्यायालय ने पुलिस को मुकदमा दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया। अदालत के निर्देश के बाद पुलिस ने पांच नामजद लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

उत्तर प्रदेश पुलिस अब मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दर्ज शिकायत, उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर जांच की जाएगी। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इसमें दोस्ती, आर्थिक लेनदेन और कथित मारपीट जैसे गंभीर आरोप जुड़े हुए हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि निजी लेनदेन के मामलों में लिखित दस्तावेज और स्पष्ट प्रमाण होना बेहद महत्वपूर्ण होता है, ताकि विवाद की स्थिति में तथ्यों को स्थापित किया जा सके।

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। अदालत के आदेश के बाद दर्ज हुई एफआईआर ने पीड़ित को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से अपनी शिकायत रखने का अवसर दिया है, जबकि अब जांच एजेंसियों पर पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल की जिम्मेदारी है।

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