Super El Niño का खतरा: दिवाली के दौरान दिल्ली-NCR में बढ़ सकता है दमघोंटू प्रदूषण

Super El Niño के असर और पराली जलाने के मौसम के बीच इस साल दिवाली के दौरान दिल्ली-NCR की हवा खराब होने का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक कम पश्चिमी

दिवाली से पहले ही मौसम और प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे सुपर अल नीनो के प्रभाव को लेकर आशंका जताई जा रही है कि नवंबर में दिवाली के आसपास प्रदूषण की स्थिति गंभीर हो सकती है।

नई दिल्ली: भारत में मानसून के बाद अक्टूबर और नवंबर के दौरान मौसम तेजी से बदलने लगता है। इसी अवधि में खेतों में धान की कटाई के बाद पराली जलाने की घटनाएं भी बढ़ती हैं। इस बार मौसम वैज्ञानिकों के पूर्वानुमानों ने एक अतिरिक्त चिंता पैदा कर दी है। प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा बहुत मजबूत El Niño आने वाले महीनों में वैश्विक तापमान और बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है। 

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, El Niño के फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना लगभग 100 प्रतिशत है और इसके 2026 के अंत में बहुत मजबूत स्तर तक पहुंचने का अनुमान है।

दिवाली के समय क्यों बढ़ सकती है प्रदूषण की चिंता?

दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण कई कारकों के कारण बढ़ता है। वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियां, मौसम की स्थिति और खेतों में पराली जलाना इनमें प्रमुख हैं। अक्टूबर के बाद पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में फसल अवशेष जलाने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। जब हवा की गति कम होती है और वातावरण में प्रदूषक फंस जाते हैं, तब दिल्ली और आसपास के इलाकों में PM2.5 जैसे सूक्ष्म कणों की मात्रा तेजी से बढ़ सकती है।

इस साल चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि El Niño के कारण बारिश और तापमान के सामान्य पैटर्न में बदलाव की संभावना है। WMO के सितंबर-नवंबर 2026 के पूर्वानुमान में मजबूत El Niño के साथ दुनिया के बड़े हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान की संभावना बताई गई है। संगठन के अनुसार, इसका असर बारिश के वितरण पर भी पड़ सकता है।

पराली और मौसम का मेल बन सकता है चुनौती

दिल्ली की सर्दियों की हवा में पराली जलाने का योगदान हर दिन एक जैसा नहीं रहता। यह हवा की दिशा, तापमान, नमी और स्थानीय प्रदूषण सहित कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए केवल El Niño के आधार पर दिवाली के दौरान प्रदूषण का निश्चित स्तर बताना संभव नहीं है। हालांकि, यदि पराली जलाने की घटनाएं बढ़ती हैं और वातावरण प्रदूषकों को फैलने नहीं देता, तो वायु गुणवत्ता पर दबाव बढ़ सकता है।

2025 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं घटकर 5,114 रह गई थीं, जबकि 2024 में यह संख्या 10,909 थी। हरियाणा में भी घटनाएं 2024 के 1,406 से घटकर 2025 में 662 रह गईं। उत्तर प्रदेश में हालांकि तस्वीर अलग रही। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वहां फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसका मतलब है कि उत्तर भारत में पराली प्रबंधन की चुनौती अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

El Niño का असर सिर्फ प्रदूषण तक सीमित नहीं

बहुत मजबूत El Niño का प्रभाव केवल वायु गुणवत्ता तक सीमित नहीं माना जा रहा। WMO के अनुसार, यह मौसम प्रणाली बारिश और तापमान के वैश्विक पैटर्न को बदल सकती है तथा सूखा, अत्यधिक गर्मी और कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश जैसे चरम मौसम की घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकती है। एक हालिया Climate Impact Lab अनुमान के अनुसार, सितंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच सामान्य वर्ष की तुलना में भारत में लगभग 15,800 अतिरिक्त गर्मी से संबंधित मौतों का जोखिम हो सकता है। यह एक अनुमानित अतिरिक्त मृत्यु-भार है, पहले से हुई मौतों का आंकड़ा नहीं।

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