अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति Donald Trump के ग्लोबल टैरिफ को 'अवैध' घोषित किए जाने के ऐतिहासिक फैसले के बाद भारतीय निर्यातकों के लिए अच्छी खबर आई है।
World News: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को अवैध घोषित किया, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने अपने 6-3 के फैसले में कहा कि राष्ट्रपति ने 1977 के अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत अत्यधिक टैरिफ लगाकर अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल किया।
अब कितना टैरिफ देना होगा?
ट्रंप के आदेश और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर 24 फरवरी 2026 से सिर्फ 10% अस्थायी ‘इंपोर्ट सरचार्ज’ लगेगा।अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया। रूस से कच्चे तेल की खरीद पर भी 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया, जिससे भारत पर कुल टैरिफ 50% तक पहुँच गया।
फरवरी 2026 में दोनों देशों ने अंतरिम ट्रेड डील पर सहमति दी, जिसके तहत टैरिफ घटाकर 18% किया गया। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत का इफेक्टिव आयात शुल्क 18% से घटकर 10% हो गया है।
यह 10% अस्थायी सरचार्ज MFN या मौजूदा आयात शुल्क के ऊपर लागू होगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी उत्पाद पर 5% MFN ड्यूटी है, तो कुल प्रभावी शुल्क 15% (5+10) होगा। पहले यह 5+25%=30% था। यह टैरिफ 150 दिनों के लिए लागू होगा, 24 फरवरी 2026 से शुरू होकर कांग्रेस द्वारा बढ़ाए जाने तक वैध रहेगा।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंध
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के फाउंडर अजय श्रीवास्तव का सुझाव है कि भारत को अंतरिम ट्रेड डील को फिर से देखना चाहिए। उनका कहना है कि अब रेसिप्रोकल टैरिफ केवल अमेरिकी एक्सपोर्ट वैल्यू के 55% पर लागू होंगे और लगभग 40% सामान एग्जेम्प्टेड कैटेगरी में हैं।
- भारत अमेरिका का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है।
- 2021-25 में भारत का कुल एक्सपोर्ट में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 18%, इंपोर्ट में 6.22% और द्विपक्षीय व्यापार में 10.73% रही।
- 2024-25 में दोनों देशों का व्यापार USD 186 बिलियन तक पहुंचा।
ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद घोषणा की कि अमेरिका में प्रवेश करने वाली अधिकांश वस्तुओं पर 10% अस्थायी इंपोर्ट शुल्क लगेगा। इस आदेश में कहा गया कि यह 150 दिनों के लिए लागू होगा और 24 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा।








