Swiggy के शेयरों में आज जोरदार तेजी देखने को मिली और कारोबारी सत्र के दौरान स्टॉक करीब 5 फीसदी तक उछल गया। शेयरों में यह तेजी ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Jefferies की रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें ब्रोकरेज ने Swiggy पर अपना बुलिश रुख कायम रखते हुए बड़ा टारगेट प्राइस दिया है।
Swiggy Share: ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक-कॉमर्स कंपनी Swiggy के शेयरों में तेज हलचल देखने को मिली है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Jefferies की सकारात्मक रिपोर्ट के बाद स्टॉक में करीब 5 फीसदी तक तेजी आई। ब्रोकरेज ने Swiggy पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस बढ़ाकर ₹435 कर दिया है। बाजार भाव के मुकाबले यह लक्ष्य काफी ऊपर है, जिससे निवेशकों के बीच शेयर में संभावित तेजी को लेकर चर्चा तेज हुई है।
Swiggy के शेयरों में यह तेजी ऐसे समय आई है जब कंपनी अपनी फूड डिलीवरी और क्विक-कॉमर्स कारोबार को अगले कुछ वर्षों में बड़े स्तर पर विस्तार देने की रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि, ब्रोकरेज ने कंपनी की संभावनाओं पर भरोसा जताया है, लेकिन साथ ही यह भी माना है कि आगे का प्रदर्शन रणनीति के सफल क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
Jefferies ने क्यों दिया ₹435 का टारगेट?
Jefferies ने Swiggy पर Buy कॉल के साथ टारगेट प्राइस ₹415 से बढ़ाकर ₹435 किया है। ब्रोकरेज के मुताबिक कंपनी का क्विक-कॉमर्स कारोबार यानी Instamart आगे की ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बना रह सकता है। Instamart में तेज डिलीवरी, बेहतर ग्राहक रिटेंशन और प्राइवेट-लेबल उत्पादों जैसे क्षेत्रों पर कंपनी का फोकस है। Jefferies का अनुमान है कि इन प्रयासों से कारोबार की यूनिट इकनॉमिक्स और मुनाफे की क्षमता में सुधार हो सकता है।
ब्रोकरेज ने Swiggy के FY31 रोडमैप को महत्वाकांक्षी बताया है। कंपनी का लक्ष्य उस समय तक करीब ₹10,000 करोड़ का एडजस्टेड EBITDA हासिल करना है, जो लगभग 1 अरब डॉलर के स्तर के बराबर होगा।
Instamart के बिजनेस मॉडल में बदलाव पर भी नजर

Swiggy के लिए एक अहम रणनीतिक कदम उसका Indian-Owned and Controlled Company (IOCC) स्टेटस हासिल करने का प्रयास है। कंपनी के शेयरधारकों ने 18 अगस्त 2026 को कुल विदेशी स्वामित्व को 49.5 फीसदी तक सीमित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह कदम IOCC के लिए जरूरी स्वामित्व मानदंडों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
IOCC का दर्जा मिलने से Instamart को मार्केटप्लेस मॉडल से आगे बढ़कर सीधे इन्वेंट्री रखने और बेचने की सुविधा मिल सकती है। इससे कंपनी को सप्लाई चेन और मार्जिन पर ज्यादा नियंत्रण हासिल होने की उम्मीद है। कुछ विश्लेषणों के अनुसार, इस बदलाव से योगदान मार्जिन में करीब 80 बेसिस पॉइंट तक सुधार की संभावना बन सकती है।
विदेशी स्वामित्व में बदलाव का क्या असर होगा?
Swiggy के विदेशी स्वामित्व पर सीमा तय करने के फैसले का एक दूसरा पहलू भी है। Jefferies ने संकेत दिया है कि नए स्वामित्व ढांचे के बाद कुछ पैसिव फंडों से आउटफ्लो का जोखिम पैदा हो सकता है। कारण यह है कि विदेशी स्वामित्व से जुड़े नियमों में बदलाव के बाद Swiggy की कुछ वैश्विक इंडेक्स पात्रताओं पर असर पड़ सकता है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, Jefferies ने संभावित पैसिव आउटफ्लो का अनुमान करीब 400 मिलियन डॉलर लगाया है। ऐसे में कंपनी के लिए IOCC स्टेटस हासिल करना रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकता है, लेकिन शेयर पर इसका शुरुआती दबाव भी देखने को मिल सकता है।
Swiggy के शेयर ने पहले कैसा प्रदर्शन किया?
Swiggy के स्टॉक का प्रदर्शन लिस्टिंग के बाद काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। कंपनी के शेयर ने लिस्टिंग के बाद ऊंचा स्तर देखा, लेकिन इसके बाद इसमें बड़ी गिरावट भी आई। हालिया तेजी से पहले शेयर दबाव में कारोबार कर रहा था। ब्रोकरेज की सकारात्मक राय के बावजूद बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि केवल टारगेट प्राइस के आधार पर निवेश का फैसला नहीं किया जाना चाहिए। Swiggy के लिए क्विक-कॉमर्स में प्रतिस्पर्धा, Instamart की लाभप्रदता, ग्राहक वृद्धि, ऑर्डर फ्रीक्वेंसी और डार्क-स्टोर की उत्पादकता अहम मुद्दे रहेंगे।
Swiggy को लेकर सभी ब्रोकरेज की राय एक जैसी नहीं है। Citi ने Buy रेटिंग के साथ ₹390 का टारगेट दिया है, जबकि Morgan Stanley ने Equal-weight रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹328 का लक्ष्य रखा है। Morgan Stanley ने कंपनी की महत्वाकांक्षी योजनाओं को स्वीकार किया है, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए मजबूत निष्पादन की जरूरत बताई है।










