Taj Mahal की कैरिंग कैपेसिटी तय करने के लिए ITI Delhi की टीम आगरा पहुंची है। सुप्रीम Court के सुझावों के बाद शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत टीम स्मारक का निरीक्षण कर पर्यटकों की सीमा और संरक्षण संबंधी पहलुओं का अध्ययन करेगी।
Agra: Taj Mahal की कैरिंग कैपेसिटी निर्धारित करने के लिए ITI Delhi की विशेषज्ञ टीम आगरा पहुंच गई है। टीम दोपहर में स्मारक का निरीक्षण करेगी और पर्यटकों की संख्या, ठहराव अवधि तथा संरक्षण से जुड़े पहलुओं का अध्ययन करेगी। सुप्रीम Court में पेश सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट के बाद यह प्रक्रिया शुरू की गई है, ताकि विश्व धरोहर स्मारक पर बढ़ते दबाव का सही आकलन किया जा सके।
Taj Mahal के संरक्षण को लेकर शुरू हुई नई पहल
Taj Mahal की सुरक्षा और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए उसकी कैरिंग कैपेसिटी तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी सिलसिले में ITI Delhi की टीम आगरा पहुंची है, जो स्मारक का निरीक्षण कर विभिन्न तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं का अध्ययन करेगी।

अधिकारियों के अनुसार टीम यह आकलन करेगी कि एक समय में कितने पर्यटक स्मारक परिसर में सुरक्षित रूप से मौजूद रह सकते हैं और इससे स्मारक पर कितना प्रभाव पड़ता है।
सुप्रीम Court के सुझाव के बाद बढ़ी प्रक्रिया
सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी ने नवंबर में सुप्रीम Court में दाखिल रिपोर्ट में देश के प्रमुख स्मारकों की कैरिंग कैपेसिटी तय करने का सुझाव दिया था। यह रिपोर्ट Taj Mahal के संरक्षण को लेकर तैयार किए गए विजन डॉक्यूमेंट पर मांगी गई राय के तहत प्रस्तुत की गई थी।
इसके बाद स्मारक पर बढ़ते पर्यटक दबाव और संरक्षण की चुनौतियों को देखते हुए विशेषज्ञ अध्ययन की जरूरत महसूस की गई।
पहले भी जारी हो चुकी है विशेषज्ञ रिपोर्ट
इससे पहले वर्ष 2015 में National Environmental Engineering Research Institute (NEERI) ने Taj Mahal की कैरिंग कैपेसिटी को लेकर रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि एक घंटे में अधिकतम छह हजार पर्यटकों को प्रवेश दिया जाए और पर्यटकों के ठहरने की समय सीमा 90 मिनट रखी जाए।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि स्मारक परिसर में एक समय में नौ हजार से अधिक पर्यटक नहीं होने चाहिए, ताकि संरचना और पर्यावरण पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।








