2028 में अंतरिक्ष में भारत की बड़ी उपलब्धि, TakeMe2Space बनाएगा पहला नेटवर्क्ड ऑर्बिटल डेटा सेंटर

TakeMe2Space 2028 के अंत तक Waymaker 2 मिशन में 100-100 किलोग्राम के दो MOI सैटेलाइट भेजेगा। दोनों मिलकर अंतरिक्ष में डेटा प्रोसेसिंग का परीक्षण करेंगे।

हैदराबाद स्थित स्टार्टअप TakeMe2Space ने 2028 के अंत तक अंतरिक्ष में भारत के पहले ‘नेटवर्क्ड ऑर्बिटल डेटा सेंटर’ मिशन को लॉन्च करने की योजना साझा की है। कंपनी ‘Waymaker 2’ राइडशेयर मिशन के तहत 100-100 किलोग्राम के दो MOI सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजेगी।

Tech: अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने की दिशा में भारत ने भी कदम बढ़ा दिए हैं। हैदराबाद स्थित स्टार्टअप TakeMe2Space ने 2028 के अंत तक ‘Waymaker 2’ राइडशेयर मिशन के तहत दो सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजने की योजना साझा की है। कंपनी के अनुसार, इन दोनों सैटेलाइट्स के जरिए यह परीक्षण किया जाएगा कि अलग-अलग ऑर्बिटल प्लेटफॉर्म एक साथ मिलकर कंप्यूटर सिस्टम की तरह काम कर सकते हैं या नहीं।

क्या है TakeMe2Space की योजना?

TakeMe2Space की योजना 2028 के अंत तक ‘Waymaker 2’ राइडशेयर मिशन के तहत 100-100 किलोग्राम के दो MOI यानी ‘माई ऑर्बिटल इंफ्रास्ट्रक्चर’ अंतरिक्ष में भेजने की है। हैदराबाद स्थित इस स्टार्टअप ने अपनी योजना की जानकारी साझा की है।

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के सीईओ रोनक कुमार सामंतराय ने कहा कि अब तक कंपनी ने जो लॉन्च किए हैं, उनका उद्देश्य अंतरिक्ष में डेटा प्रोसेसिंग की संभावना को साबित करना था। उनके अनुसार, नए दो सैटेलाइट बड़े स्तर पर इसकी व्यावसायिक उपयोगिता को साबित करेंगे।

दुनिया के दूसरे मिशनों से कैसे अलग होगा?

अंतरिक्ष में डेटा सेंटर से जुड़े दुनिया के मौजूदा मिशनों का फोकस इस बात पर है कि अंतरिक्ष के वातावरण में चिपसेट किस तरह काम कर सकते हैं। वहीं TakeMe2Space का ‘Waymaker 2’ मिशन इससे अलग पहलू का परीक्षण करेगा।

इस मिशन के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि क्या दो अलग-अलग सैटेलाइट एक नेटवर्क के जरिए मिलकर एक ही कंप्यूटर की तरह काम कर सकते हैं। यानी कंप्यूटिंग क्षमता को एक ही सैटेलाइट तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग ऑर्बिटल प्लेटफॉर्म के बीच साझा किया जा सके।

अंतरिक्ष में ही प्रोसेस होगा डेटा

अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद TakeMe2Space के दोनों सैटेलाइट हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग का प्रदर्शन करेंगे। सामान्य तौर पर कोई सैटेलाइट जितना डेटा जुटाता है, उसका सीमित हिस्सा ही पृथ्वी पर भेज पाता है।

TakeMe2Space की योजना में सैटेलाइट्स डेटा को अंतरिक्ष में ही प्रोसेस करेंगे और इसके बाद जरूरी जानकारी को जमीन पर भेजेंगे। इससे अंतरिक्ष में एकत्र होने वाले डेटा की प्रोसेसिंग को ऑर्बिट में ही करने की क्षमता का परीक्षण होगा।

अंतरिक्ष में डेटा सेंटर की जरूरत क्यों?

डेटा सेंटरों को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में बिजली और पानी की जरूरत होती है। इसी वजह से टेक कंपनियां डेटा सेंटर की ऊर्जा जरूरतों के लिए अंतरिक्ष को भी संभावित विकल्प के रूप में देख रही हैं। अंतरिक्ष में सूर्य की रोशनी का इस्तेमाल ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की संभावना इस दिशा में एक प्रमुख पहलू है।

हालांकि, अंतरिक्ष में पूरी तरह विकसित डेटा सेंटर स्थापित करने में अभी समय लग सकता है। फिलहाल कंपनियां शुरुआती परीक्षण और तकनीकी प्रदर्शन पर काम कर रही हैं। इन मिशनों से मिलने वाले परिणाम यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि अंतरिक्ष में बड़े स्तर पर डेटा सेंटर कब तक व्यावहारिक रूप से काम करना शुरू कर सकते हैं।

Leave a comment