बांग्लादेश में BNP की जीत के बाद तारिक रहमान ने ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ विदेश नीति का ऐलान किया। नीति में राष्ट्रीय हित, संप्रभुता और संतुलित बहुपक्षीय रिश्तों पर जोर है, जिसमें भारत समेत सभी देशों से बराबरी के आधार पर संबंध।
India-Bangladesh Relation: बांग्लादेश के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को बड़ी जीत मिलने के बाद देश की राजनीति के साथ-साथ विदेश नीति को लेकर भी नई चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी प्रमुख तारिक रहमान ने जीत के तुरंत बाद साफ कर दिया कि आने वाली सरकार की विदेश नीति “बांग्लादेश फर्स्ट” सिद्धांत पर आधारित होगी। उनका कहना है कि देश और बांग्लादेशी लोगों के हित (national interest) किसी भी अंतरराष्ट्रीय रिश्ते से ऊपर होंगे। इस बयान के बाद यह सवाल अहम हो गया है कि भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
बांग्लादेश फर्स्ट नीति का साफ संदेश
तारिक रहमान ने कहा कि विदेश नीति तय करते समय किसी एक देश या विचारधारा को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, बल्कि बांग्लादेश और उसके नागरिकों के हित ही केंद्र में रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र के समर्थकों ने एक बार फिर BNP को जनादेश देकर यह दिखा दिया है कि जनता देश के भविष्य को लेकर स्पष्ट सोच रखती है। उनके मुताबिक, आजादी और संप्रभुता (sovereignty) की रक्षा करते हुए ही सरकार अंतरराष्ट्रीय फैसले लेगी।
भारत के साथ रिश्तों पर क्या बदलेगा
भारत के साथ संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल पर तारिक रहमान ने संतुलित जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारत सहित सभी पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते देशहित के आधार पर तय होंगे। इसका मतलब यह नहीं है कि भारत से दूरी बनाई जाएगी, बल्कि संबंधों में बराबरी और पारस्परिक सम्मान (mutual respect) पर जोर होगा। यह बयान इस बात का संकेत देता है कि नई सरकार टकराव की बजाय व्यावहारिक नीति अपनाना चाहती है।
विदेश नीति तय करने का नजरिया
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तारिक रहमान ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी पहले ही विदेश नीति को लेकर अपना रुख साफ कर चुकी है। उनका कहना है कि बांग्लादेशी लोगों की सुरक्षा, आर्थिक हित और अंतरराष्ट्रीय पहचान को ध्यान में रखकर ही फैसले लिए जाएंगे। इस सोच के तहत किसी भी देश के साथ संबंध भावनाओं के बजाय व्यावहारिक जरूरतों पर आधारित होंगे।
बहुपक्षवाद पर BNP का जोर
BNP के वरिष्ठ नेता आमिर खसरू महमूद चौधरी ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर पार्टी की सोच को और साफ किया। उन्होंने कहा कि नई सरकार बहुपक्षवाद (multilateralism) पर विश्वास रखेगी। उनका मानना है कि सिर्फ देश-केंद्रित या एकतरफा नीति अपनाने से बांग्लादेश को नुकसान हो सकता है। इसलिए सरकार कई देशों के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखने की कोशिश करेगी।
चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में संतुलन नीति
आमिर खसरू महमूद चौधरी के बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि “बांग्लादेश फर्स्ट” नीति का मकसद भारत के साथ-साथ चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ भी बैलेंस बनाना है। हालांकि पार्टी की ओर से किसी खास देश के पक्ष या विपक्ष में जाने की बात नहीं कही गई है। संदेश साफ है कि बांग्लादेश अपनी जरूरतों और प्राथमिकताओं के आधार पर रिश्ते तय करेगा।
नई सरकार में अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी
तारिक रहमान के लिए अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को संभालने वाली टीम में अहम भूमिका निभाने वाले हुमायूं कबीर ने भी सरकार की प्राथमिकता को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जोर “हमारे लोगों के बीच मजबूत सहयोग” पर रहेगा। उनका कहना है कि रिश्ते सिर्फ सरकारों तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि लोगों के स्तर पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
भारत के साथ सहयोग की प्राथमिकता
हुमायूं कबीर ने यह भी कहा कि भारत उन देशों में से एक होगा जहां नई सरकार संपर्क बढ़ाएगी। हालांकि उन्होंने किसी तय समयसीमा का जिक्र नहीं किया, लेकिन बयान से यह संकेत जरूर मिला कि भारत-बांग्लादेश रिश्तों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। बल्कि सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर ध्यान दिया जाएगा।









