Tata Sons AGM: एन. चंद्रशेखरन की डायरेक्टरशिप पर क्यों उठ रहे सवाल? जानें पूरा मामला

Tata Sons AGM में कोरम की शर्तों को लेकर पेच फंस सकता है। जानिए एन. चंद्रशेखरन की डायरेक्टरशिप पर क्यों सवाल उठ रहे हैं और AGM में क्या हो सकता है।

देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की सालाना आम बैठक (AGM) अगले महीने होने वाली है, लेकिन कोरम से जुड़ी शर्तों के चलते इसमें अड़चन आने की आशंका है।

Tata Group: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की आगामी सालाना आम बैठक (AGM) को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी और प्रशासनिक पेच सामने आया है। अगले महीने प्रस्तावित इस बैठक के एजेंडे में कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की डायरेक्टर के रूप में दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव भी शामिल है। हालांकि, कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में निर्धारित कोरम की शर्त और टाटा ट्रस्ट से जुड़े मौजूदा विवाद के कारण AGM के आयोजन पर सवाल खड़े हो गए हैं।

चंद्रशेखरन की चेयरमैनशिप उनके टाटा संस के बोर्ड में डायरेक्टर बने रहने से जुड़ी हुई है। ऐसे में यदि AGM समय पर नहीं होती या उनकी दोबारा नियुक्ति पर फैसला नहीं हो पाता, तो उनके भविष्य को लेकर कानूनी और कॉरपोरेट स्तर पर चर्चा तेज हो सकती है।

AGM के कोरम को लेकर क्या है नियम?

टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के आर्टिकल 86 के अनुसार, कंपनी की AGM के लिए कम से कम पांच सदस्यों की व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी है। इस व्यवस्था में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) की ओर से संयुक्त रूप से नामित प्रतिनिधि की मौजूदगी भी आवश्यक बताई गई है, बशर्ते दोनों ट्रस्टों के पास कंपनी की कम से कम 40% इक्विटी हिस्सेदारी हो।

यह शर्त सामान्य परिस्थितियों में कोई बड़ी समस्या नहीं थी, क्योंकि दोनों ट्रस्टों के पास मिलकर टाटा संस में करीब 66% हिस्सेदारी है। लेकिन अब SRTT से जुड़े एक प्रशासनिक और कानूनी विवाद ने AGM के कोरम को लेकर स्थिति जटिल बना दी है।

क्या है पूरा विवाद?

रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने कथित तौर पर सार्वजनिक ट्रस्ट कानूनों के उल्लंघन से जुड़े मामले के चलते SRTT को बोर्ड मीटिंग में हिस्सा लेने से रोक दिया है। इसका असर ट्रस्ट की ओर से AGM के लिए संयुक्त प्रतिनिधि नामित करने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। मामले से परिचित कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि SRTT अपने प्रतिनिधि को नामित करने की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले पाता है, तो टाटा संस की AGM के लिए आवश्यक कोरम पूरा करना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में बैठक में अन्य सदस्य मौजूद होने के बावजूद कंपनी के लिए औपचारिक कामकाज आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

AGM स्थगित होने पर क्या होगा?

अगर निर्धारित तारीख पर AGM में आवश्यक कोरम पूरा नहीं होता है, तो कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के आर्टिकल 87 के तहत बैठक को स्थगित किया जा सकता है। हालांकि, स्थगित बैठक में सदस्यों की न्यूनतम संख्या से जुड़ी शर्तों में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन ट्रस्ट के प्रतिनिधि की मौजूदगी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में ऐसी स्थिति के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं बताया गया है, जिसमें ट्रस्ट प्रतिनिधि की अनुपस्थिति के कारण स्थगित AGM भी आयोजित न हो सके। इसी वजह से आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग संभावनाएं सामने आ रही हैं।

कंपनी और ट्रस्ट के पास क्या विकल्प हैं?

मौजूदा परिस्थितियों में टाटा संस के सामने कई संभावित विकल्प हो सकते हैं। कंपनी रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) से AGM आयोजित करने की निर्धारित समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध कर सकती है। दूसरी ओर, टाटा ट्रस्ट महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के समक्ष राहत की मांग कर सकते हैं, ताकि SRTT और SDTT मिलकर AGM के लिए संयुक्त प्रतिनिधि नामित कर सकें। इसके अलावा, विवाद की स्थिति में बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख कर उचित निर्देश मांगने का विकल्प भी मौजूद हो सकता है।

पिछली AGM में SDTT और SRTT की ओर से पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री और दोनों ट्रस्टों के मौजूदा वाइस-चेयरमैन विजय सिंह ने प्रतिनिधित्व किया था। हालांकि, ट्रस्ट एक से अधिक प्रतिनिधियों को अधिकृत कर सकते हैं, लेकिन कंपनी के नियमों के तहत उनसे संयुक्त रूप से काम करने और अपने बहुमत वोट का इस्तेमाल करने की अपेक्षा की जाती है।

एन. चंद्रशेखरन की डायरेक्टरशिप पर क्यों है नजर?

AGM के एजेंडे में एन. चंद्रशेखरन की डायरेक्टर के रूप में पुनर्नियुक्ति सबसे अहम मुद्दों में से एक है। उनकी टाटा संस के चेयरमैन के रूप में भूमिका बोर्ड में उनके डायरेक्टर पद से जुड़ी हुई है। ऐसे में यदि वह डायरेक्टर नहीं रहते, तो चेयरमैन के पद पर बने रहना भी संभव नहीं होगा। हालांकि, चंद्रशेखरन का मौजूदा चेयरमैन कार्यकाल फरवरी 2027 तक बताया गया है। विवाद यह है कि अगर AGM निर्धारित समय के भीतर नहीं हो पाती और उनकी पुनर्नियुक्ति पर निर्णय टल जाता है, तो उनकी डायरेक्टरशिप की कानूनी स्थिति क्या होगी।

एक कानूनी राय के अनुसार, यदि कंपनी निर्धारित समय सीमा में उन्हें दोबारा डायरेक्टर नियुक्त नहीं कर पाती है, तो उनका पद प्रभावित हो सकता है। वहीं दूसरी व्याख्या यह है कि यदि AGM स्थगित होती है और बैठक पूरी तरह समाप्त नहीं होती, तो नई AGM होने तक उनकी डायरेक्टरशिप जारी रह सकती है।

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