नेपाल की बाढ़ से बिहार में बढ़ी चिंता, तेजस्वी ने BJP पर साधा निशाना

नेपाल में आई भीषण बाढ़ से बिहार पर मंडराते खतरे के बीच तेजस्वी यादव ने BJP सरकार पर हमला बोला। कहा- 21 साल से बिहार और 12 साल से केंद्र में सत्ता के बाद भी बैठक नहीं
नेपाल की बाढ़ से बिहार में बढ़ी चिंता, तेजस्वी ने BJP पर साधा निशाना
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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उससे बिहार पर मंडरा रहे खतरे के बीच बिहार की राजनीति भी गरमा गई है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नेपाल में आई तबाही को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में 21 साल से भाजपा की सरकार है और केंद्र में भी 12 साल से भाजपा सत्ता में है, लेकिन नेपाल से आने वाली बाढ़ की समस्या को लेकर अब तक कोई बैठक नहीं हुई। तेजस्वी यादव ने सरकार से सवाल किया कि आखिर बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर गंभीरता क्यों नहीं दिखाई जा रही है।

तेजस्वी यादव ने कहा कि नेपाल में जिस तरह की तबाही सामने आई है, उसे देखते हुए बिहार को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने बिहार सरकार से अपील की कि बाढ़ की स्थिति बिगड़ने से पहले सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली जाएं, ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। उनका कहना है कि बिहार में कई जगह गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और ऐसे में प्रशासन को पहले से ही पूरी तैयारी के साथ मैदान में रहना चाहिए।

तेजस्वी यादव ने नेपाल की बाढ़ को सिर्फ बिहार या भारत से जुड़ी सामान्य प्राकृतिक आपदा के तौर पर देखने के बजाय इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बताया। उनका कहना है कि नेपाल और बिहार की भौगोलिक स्थिति तथा नदियों के आपसी संबंध के कारण वहां होने वाली भारी बारिश, फ्लैश फ्लड और जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी का असर बिहार के कई हिस्सों पर पड़ सकता है। इसलिए इस समस्या का समाधान केवल बाढ़ आने के बाद राहत और बचाव तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि दोनों देशों के बीच समन्वय और स्थायी व्यवस्था की दिशा में भी काम होना चाहिए।

तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार में हर साल बाढ़ की समस्या सामने आती है, लेकिन इसके स्थायी समाधान को लेकर पर्याप्त गंभीरता दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा कि जब तक इसका स्थायी समाधान नहीं निकाला जाएगा, तब तक हर साल बिहार के लोगों को इसी तरह के संकट का सामना करना पड़ेगा। उनके मुताबिक बाढ़ आने के बाद राहत पहुंचाने की व्यवस्था जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि ऐसी परिस्थितियों से होने वाले नुकसान को पहले से कम करने की रणनीति बनाई जाए।

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने हालात को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों के बड़े हिस्से के खिसकने से अचानक तेज बहाव और मलबे की बाढ़ आई, जिससे कई इलाकों में भारी तबाही हुई। इस आपदा का असर सीमा के आसपास के क्षेत्रों में भी दिखाई दिया और भारत के बिहार समेत अन्य इलाकों में प्रशासन को सतर्क किया गया।

बिहार के लिए चिंता की सबसे बड़ी वजह नेपाल से आने वाली नदियां हैं। नेपाल में भारी बारिश या अचानक आने वाली बाढ़ का पानी गंडक, कोसी, बागमती और दूसरी नदियों के जरिए बिहार के मैदानी इलाकों में पहुंचता है। ऐसे में नेपाल में अचानक बढ़े जलस्तर का सीधा असर बिहार के सीमावर्ती और नदी किनारे बसे जिलों पर पड़ सकता है। इसी वजह से बिहार प्रशासन को लगातार नदी के जलस्तर, तटबंधों और बैराजों की निगरानी करनी पड़ रही है।

बिहार में नेपाल से आने वाले पानी को लेकर प्रशासन पहले ही अलर्ट मोड में है। गंडक नदी में पानी बढ़ने के बाद गंडक बराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए थे। अधिकारियों की ओर से लगातार जलप्रवाह पर नजर रखी जा रही है और संवेदनशील इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार बराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया, जिसके बाद नदी किनारे के इलाकों में निगरानी और बढ़ा दी गई।

तेजस्वी यादव ने इसी स्थिति को देखते हुए बिहार सरकार से कहा कि प्रशासन को किसी भी संभावित आपात स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि यदि किसी इलाके में अचानक बाढ़ का पानी पहुंचता है तो वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, नावों की व्यवस्था करने, राहत सामग्री उपलब्ध कराने और चिकित्सा सुविधाओं को सक्रिय रखने में देरी नहीं होनी चाहिए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की सक्रियता जितनी पहले शुरू होगी, जान-माल के नुकसान की आशंका उतनी ही कम की जा सकती है।

तेजस्वी ने यह भी कहा कि वह बाढ़ की स्थिति को लेकर लगातार फीडबैक ले रहे हैं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की है। खासकर गंडक नदी के आसपास के जिलों में लोगों को संभावित खतरे की जानकारी समय रहते देने और प्रशासन के साथ सहयोग करने की बात कही गई है। गंडक बेसिन से जुड़े पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जैसे जिलों को लेकर विशेष सतर्कता की जरूरत बताई गई है।

बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ने के बीच राज्य सरकार की ओर से भी उच्चस्तरीय समीक्षा की गई है। संवेदनशील जिलों के अधिकारियों को अलर्ट रहने, तटबंधों की निगरानी करने और आवश्यक तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी तरफ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भी तैयार रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू किया जा सके।

हालांकि, तेजस्वी यादव के बयान के बीच केंद्र सरकार की ओर से भी नेपाल की आपदा को लेकर गतिविधियां तेज की गई हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से नेपाल में आई आपदा को लेकर बातचीत की और प्रभावित सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन तथा बचाव दलों को हाई अलर्ट पर रखने की जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।

यही वजह है कि तेजस्वी यादव के बयान को बिहार में आने वाली संभावित बाढ़ को लेकर राजनीतिक बहस से भी जोड़कर देखा जा रहा है। एक तरफ सरकार का कहना है कि प्रशासन को अलर्ट कर दिया गया है और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है, वहीं विपक्ष का आरोप है कि बाढ़ जैसी समस्या का स्थायी समाधान खोजने की दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। तेजस्वी यादव ने इसी मुद्दे को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा है कि हर साल सामने आने वाली इस समस्या को रोकने के लिए दीर्घकालिक रणनीति कब तैयार होगी।

बिहार की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि मानसून के दौरान नेपाल में होने वाली भारी बारिश का प्रभाव राज्य के कई हिस्सों पर पड़ता है। उत्तर बिहार के बड़ी संख्या में जिले नदियों और उनके जलप्रवाह से प्रभावित होते हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ ही तटबंधों पर दबाव बढ़ता है और निचले इलाकों में पानी फैलने का खतरा बना रहता है। ऐसे में नेपाल में अचानक आई फ्लैश फ्लड ने बिहार के प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

तेजस्वी यादव का कहना है कि बाढ़ को लेकर केवल तत्काल राहत की तैयारी करना पर्याप्त नहीं है। उनका जोर इस बात पर है कि नेपाल के साथ जल प्रबंधन, नदी प्रवाह, बाढ़ की पूर्व चेतावनी और आपदा प्रबंधन को लेकर लगातार समन्वय होना चाहिए। यदि दोनों देशों के बीच समय रहते जानकारी साझा की जाए और नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव की जानकारी पहले मिले, तो बिहार के संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकता है।

नेपाल में आई आपदा ने एक बार फिर बिहार की बाढ़ समस्या को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समन्वय के मुद्दे के रूप में सामने ला दिया है। हर साल उत्तर बिहार के लोगों को बाढ़ के कारण विस्थापन, फसल नुकसान, सड़क और पुलों के टूटने तथा आवागमन बाधित होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इस बार नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बाद राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि संभावित जलप्रवाह से पहले ही संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां राहत और बचाव की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

तेजस्वी यादव ने इसी संदर्भ में सरकार को आगाह करते हुए कहा है कि लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी संभावित बाढ़ की स्थिति में आम लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन को हर स्तर पर तैयार रहना होगा। उन्होंने सरकार से यह भी सवाल किया कि जब बिहार में हर साल बाढ़ आती है और नेपाल से आने वाले पानी का असर लगातार देखने को मिलता है, तो फिर इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस पहल क्यों नहीं की जा रही है।

फिलहाल नेपाल की बाढ़ के बाद बिहार में प्रशासनिक स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। गंडक नदी और अन्य नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। तटबंधों की निगरानी, राहत एवं बचाव दलों की तैयारी और संभावित प्रभावित क्षेत्रों में अलर्ट जारी रखने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में नदी के जलस्तर और नेपाल से आने वाले पानी की स्थिति के आधार पर बिहार के कई इलाकों में स्थिति बदल सकती है। ऐसे में तेजस्वी यादव की मांग और सरकार की तैयारियों के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि बिहार को हर साल आने वाली बाढ़ से स्थायी राहत कब मिलेगी और नेपाल के साथ बाढ़ प्रबंधन को लेकर दीर्घकालिक व्यवस्था कितनी प्रभावी तरी

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