तेलंगाना ने कर्नाटक से मांगा कृष्णा नदी का पानी, 5.5 लाख एकड़ फसल बचाने की अपील

तेलंगाना ने कर्नाटक से कृष्णा नदी का 5,000 क्यूसेक पानी 30 दिन तक छोड़ने की मांग की। जूराला समेत चार परियोजनाओं की 5.5 लाख एकड़ फसल प्रभावित है।

तेलंगाना ने खड़ी फसलों को बचाने के लिए कर्नाटक से कृष्णा नदी का 5,000 क्यूसेक पानी प्रतिदिन 30 दिनों तक छोड़ने की मांग की। जूराला, भीमा, नेट्टेमपाडु और कोइलसागर परियोजनाओं के तहत करीब 5.5 लाख एकड़ फसलें प्रभावित हैं।

बेंगलुरु: तेलंगाना में खड़ी फसलों को बचाने के लिए कृष्णा नदी के पानी को लेकर कर्नाटक और तेलंगाना के बीच बातचीत तेज हो गई है। तेलंगाना के पर्यटन मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव और सत्तारूढ़ कांग्रेस के कई विधायकों ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात कर राज्य के जलाशयों से पानी छोड़ने की मांग की। तेलंगाना ने शुरुआत में करीब 5,000 क्यूसेक पानी प्रतिदिन एक महीने तक छोड़ने का अनुरोध किया था।

5.5 लाख एकड़ फसल के लिए पानी की मांग

तेलंगाना प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार शाम बेंगलुरु में डी.के. शिवकुमार से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव और वकिति श्रीहरि के साथ विधायक बांदला कृष्ण मोहन रेड्डी, टी. मेघा रेड्डी और जी. मधुसूदन रेड्डी शामिल थे।

बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि दक्षिणी तेलंगाना के कई इलाकों में फसलें विकास के महत्वपूर्ण चरण में हैं। अगर इस समय पर्याप्त सिंचाई पानी नहीं मिला तो उत्पादन और किसानों की आय पर असर पड़ सकता है। तेलंगाना सरकार के अनुसार, जूराला, नेट्टेमपाडु, भीमा और कोइलसागर सिंचाई परियोजनाओं के तहत करीब 5.5 लाख एकड़ क्षेत्र में फसलें लगी हैं। इन फसलों को बचाने के लिए कर्नाटक से कृष्णा नदी का पानी छोड़ने की मांग की गई।

5,000 क्यूसेक पानी एक महीने तक छोड़ने का अनुरोध

तेलंगाना के प्रतिनिधियों ने कर्नाटक से 5,000 क्यूसेक पानी प्रतिदिन 30 दिनों तक लगातार छोड़ने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि इन परियोजनाओं के कमांड एरिया में फसलें इस समय पानी की जरूरत वाले महत्वपूर्ण चरण में हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक सरकार से उपलब्ध जल संसाधनों का नियंत्रित उपयोग करते हुए तेलंगाना की मदद करने की अपील की। तेलंगाना के अधिकारियों और नेताओं ने इसे किसानों की आजीविका से जुड़ा तत्काल मुद्दा बताया।

बैठक के बाद सामने आए बयानों के अनुसार, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने तेलंगाना की मांग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

कर्नाटक ने चरणबद्ध पानी छोड़ने पर दी सहमति

बाद के घटनाक्रम में कर्नाटक ने तेलंगाना के जूराला प्रोजेक्ट के लिए कृष्णा नदी का पानी चरणबद्ध तरीके से छोड़ने पर सहमति जताई। रिपोर्टों के अनुसार, शिवकुमार ने अलमट्टी और नारायणपुर जलाशयों से पानी छोड़ने के लिए अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने को कहा।

एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक ने लगभग 3 टीएमसी पानी चरणबद्ध तरीके से छोड़ने पर सहमति जताई है। यह तेलंगाना की शुरुआती मांग से अलग मात्रा है। इसलिए 5,000 क्यूसेक प्रतिदिन 30 दिनों की मांग और बाद में तय की गई जल-रिलीज व्यवस्था को एक ही आंकड़े के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

ऑल इंडिया रेडियो की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक की ओर से लगभग 10 दिनों की रिलीज व्यवस्था को लेकर भी जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों में रिलीज की मात्रा और चरणों को लेकर अलग-अलग विवरण हैं, इसलिए अंतिम परिचालन कार्यक्रम संबंधित राज्यों के सिंचाई अधिकारियों की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

जूराला परियोजना के आसपास किसानों का प्रदर्शन

कृष्णा जल की मांग ऐसे समय उठी जब तेलंगाना के जोगुलाम्बा गडवाल जिले में जूराला परियोजना के कमांड एरिया के किसान सिंचाई पानी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

किसानों की चिंता खड़ी फसलों को लेकर है। जूराला परियोजना दक्षिणी तेलंगाना के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण सिंचाई स्रोत है। पानी की उपलब्धता कम होने पर परियोजना से जुड़े आयकाट क्षेत्र के किसानों को फसल बचाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

कृष्णा नदी का पानी छोड़ने को लेकर राज्य की राजनीति भी सक्रिय रही है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने 21 सितंबर को इस मुद्दे पर प्रदर्शन किया था। इसके अगले दिन तेलंगाना BJP अध्यक्ष एन. रामचंदर राव को जोगुलाम्बा गडवाल जिले में किसानों से मिलने जाते समय रोके जाने की खबर सामने आई।

जूराला परियोजना की जल क्षमता पर भी बहस

जल संकट के बीच जूराला परियोजना की वास्तविक जल उपलब्धता और भंडारण क्षमता को लेकर भी चर्चा हो रही है।

तेलंगाना के पर्यटन मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव के अनुसार, जूराला परियोजना की क्षमता 9 टीएमसी से अधिक है। उन्होंने कहा था कि करीब 3 टीएमसी पानी में गाद (silt) जमा है, जबकि एक और 3 टीएमसी पानी जून 2027 के अंत तक पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए रखा जाना है।

इन आंकड़ों का इस्तेमाल मंत्री ने परियोजना में उपलब्ध पानी के उपयोग को लेकर सरकार के रुख को समझाने के लिए किया। हालांकि, जल उपलब्धता, भंडारण और सिंचाई जरूरतों का अंतिम आकलन संबंधित जल संसाधन अधिकारियों की रिपोर्ट और मौजूदा प्रवाह पर निर्भर करता है।

BRS के आरोपों पर मंत्री का पलटवार

जल संकट को लेकर तेलंगाना की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार और विपक्षी BRS के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं।

जुपल्ली कृष्ण राव ने BRS की आलोचना का जवाब देते हुए सवाल उठाया कि पिछली BRS सरकार ने अतिरिक्त पानी के भंडारण के लिए पर्याप्त जलाशयों का निर्माण क्यों नहीं किया।

यह बयान मौजूदा जल संकट को लेकर दोनों पक्षों के बीच चल रही राजनीतिक बहस का हिस्सा है। BRS की ओर से सरकार पर किसानों को पर्याप्त सिंचाई पानी उपलब्ध नहीं कराने के आरोप लगाए गए हैं, जबकि मौजूदा सरकार ने पिछली सरकार की जल प्रबंधन नीतियों पर सवाल उठाए हैं।

जूराला से तेलंगाना में पानी छोड़ा गया

कर्नाटक से पानी छोड़ने के आश्वासन के बीच तेलंगाना में जूराला परियोजना से भी सिंचाई के लिए पानी छोड़ा गया। रिपोर्टों के अनुसार, 23 सितंबर को परियोजना के दाहिने नहर में पानी छोड़ा गया।

तेलंगाना टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जूराला परियोजना में करीब 2,687 क्यूसेक का इनफ्लो दर्ज किया गया था। इसके बाद अधिकारियों ने दाहिनी नहर में सिंचाई पानी छोड़ा। यह कदम किसानों के विरोध और कर्नाटक के साथ हुई बातचीत के बाद उठाया गया।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने भी रिपोर्ट किया कि तेलंगाना सिंचाई अधिकारियों ने बुधवार सुबह जूराला परियोजना से किसानों के लिए पानी छोड़ना शुरू किया। यह कदम कर्नाटक के मुख्यमंत्री की ओर से कृष्णा नदी का पानी उपलब्ध कराने के आश्वासन के बाद उठाया गया।

कर्नाटक के सामने भी जल प्रबंधन की चुनौती

कृष्णा जल को लेकर तेलंगाना की मांग ऐसे समय आई है जब कर्नाटक को भी अपने जल संसाधनों का प्रबंधन करना पड़ रहा है। इसलिए दोनों राज्यों के बीच पानी छोड़ने का फैसला केवल तेलंगाना की कृषि जरूरतों से नहीं, बल्कि कर्नाटक के मौजूदा जल भंडार और स्थानीय जरूरतों से भी जुड़ा है।

यही वजह है कि कर्नाटक की ओर से सामने आई व्यवस्था चरणबद्ध जल रिलीज पर आधारित है। इसका उद्देश्य उपलब्ध पानी का प्रबंधन करते हुए तेलंगाना की तत्काल कृषि जरूरतों को पूरा करना बताया गया है।

किसानों के लिए अब आगे क्या?

तेलंगाना के किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कर्नाटक से मिलने वाला पानी जूराला तक कितनी मात्रा और किस समय पहुंचेगा। इसके बाद जूराला, भीमा, नेट्टेमपाडु और कोइलसागर परियोजनाओं से जुड़े कमांड एरिया में पानी के वितरण की भूमिका अहम होगी।

फिलहाल दोनों राज्यों के बीच बातचीत के बाद जल रिलीज की दिशा में प्रगति हुई है। तेलंगाना सरकार का कहना है कि उसका प्राथमिक उद्देश्य खड़ी फसलों को बचाना और किसानों को तत्काल सिंचाई सहायता उपलब्ध कराना है।

कृष्णा नदी के पानी का यह मामला अंतरराज्यीय जल प्रबंधन के महत्व को भी रेखांकित करता है। बारिश, जलाशयों के भंडार, सिंचाई की मांग और पेयजल जरूरतों के बीच संतुलन बनाना दोनों राज्यों के लिए जरूरी है। आने वाले दिनों में पानी की वास्तविक उपलब्धता और रिलीज कार्यक्रम यह तय करेगा कि किसानों को कितनी राहत मिलती है।

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