तीन नए मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क से बढ़ेगी माल ढुलाई की रफ्तार, ₹2,870 करोड़ निवेश की तैयारी

देश में तीन नए मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क विकसित करने की तैयारी है। करीब ₹2,870 करोड़ के निवेश से माल ढुलाई को तेज और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को बेहतर बनाने की योजना

देश में माल ढुलाई को आसान बनाने और व्यापार को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के तहत काम करने वाली नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड देशभर में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क विकसित कर रही है।

Multimodal Logistics Park: भारत में माल ढुलाई को अधिक तेज, व्यवस्थित और कुशल बनाने के लिए केंद्र सरकार लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसी योजना के तहत पटना, नासिक और हैदराबाद में तीन नए मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क विकसित करने की तैयारी है। इन तीनों परियोजनाओं पर कुल करीब 2,870 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य सड़क, रेल और अन्य परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर माल की आवाजाही को आसान करना है। इससे लंबी दूरी तक सामान पहुंचाने में लगने वाला समय और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत कम करने में मदद मिल सकती है। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद संबंधित क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों और आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पटना, नासिक और हैदराबाद में बनेंगे लॉजिस्टिक पार्क

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के तहत काम करने वाली नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) देश के अलग-अलग हिस्सों में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क विकसित कर रही है। इसी क्रम में पटना, नासिक और हैदराबाद की प्रस्तावित परियोजनाओं की अंतिम रिपोर्ट तैयार कर सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजी गई है।

प्रस्तावित योजना के अनुसार, पटना में करीब 870 करोड़ रुपये की लागत से 103 एकड़ जमीन पर लॉजिस्टिक पार्क विकसित किया जाएगा। वहीं हैदराबाद में लगभग 1,300 करोड़ रुपये के निवेश से 156 एकड़ में पार्क बनाने की योजना है। तीनों परियोजनाओं में क्षेत्रफल के लिहाज से हैदराबाद का पार्क सबसे बड़ा होगा।

नासिक में प्रस्तावित मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क पर करीब 700 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह परियोजना लगभग 123 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी। सरकारी मंजूरी मिलने के बाद इन परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके बाद निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की योजना है।

मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क क्यों हैं महत्वपूर्ण?

मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क ऐसे केंद्र होते हैं जहां अलग-अलग परिवहन साधनों को एक ही लॉजिस्टिक नेटवर्क से जोड़ा जाता है। इससे माल को एक माध्यम से दूसरे माध्यम में स्थानांतरित करना आसान होता है। भारत में सड़क परिवहन के साथ रेल नेटवर्क को लॉजिस्टिक्स व्यवस्था से जोड़ना माल ढुलाई की लागत कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे पार्कों में वेयरहाउसिंग, माल की छंटाई, पैकेजिंग, ट्रांसशिपमेंट और अन्य लॉजिस्टिक्स सेवाओं के लिए सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।

इन केंद्रों से उद्योगों और कारोबारियों को सामान की आवाजाही के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा मिलने की उम्मीद है। खासकर विनिर्माण, कृषि, ई-कॉमर्स और अन्य क्षेत्रों की सप्लाई चेन को इससे लाभ मिल सकता है।

दिल्ली-मुंबई रेल कॉरिडोर पर भी बढ़ेगी माल ढुलाई क्षमता

लॉजिस्टिक पार्कों के साथ-साथ दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग की क्षमता बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। इस मार्ग पर यात्री और मालगाड़ियों के बढ़ते दबाव को देखते हुए वडोदरा-रतलाम सेक्शन के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन विकसित करने की योजना है। रेल मंत्रालय ने करीब 259 किलोमीटर लंबी इस परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इसे वर्ष 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

नई रेल लाइनों के बनने के बाद इस मार्ग पर मालगाड़ियों की आवाजाही के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। परियोजना के पूरा होने पर सालाना लगभग 1.65 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता जुड़ने का अनुमान है।

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