कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने तमिलनाडु के राज्यपाल के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि TVK को सरकार बनाने और विधानसभा में बहुमत साबित करने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने इसे लोकतंत्र और जनता की भावनाओं के खिलाफ बताया।
बेंगलुरु: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar ने तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि किसी भी पार्टी को सरकार बनाने और विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि तमिलनाडु में TVK को सरकार गठन से रोका गया है, तो यह लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ माना जाएगा।
बेंगलुरु के Vidhana Soudha में मीडिया से बातचीत के दौरान शिवकुमार ने कहा कि राज्यपाल के पास किसी पार्टी को बहुमत साबित करने से रोकने का अधिकार नहीं होना चाहिए। उनका बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु की राजनीति में सरकार गठन को लेकर चर्चा तेज है।
“राज्यपाल को सरकार गठन की अनुमति देनी चाहिए”
डीके शिवकुमार ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में यह परंपरा रही है कि जिस पार्टी या गठबंधन के पास पर्याप्त समर्थन होने का दावा हो, उसे पहले सरकार बनाने का अवसर दिया जाता है।
उन्होंने कहा, “कर्नाटक में भी राज्यपाल ने पहले बी.एस. येदियुरप्पा को सरकार बनाने का मौका दिया था। देश में कई बार ऐसी परिस्थितियां आई हैं, जब सबसे बड़ी पार्टी को बहुमत साबित करने का अवसर मिला।”
शिवकुमार ने पूर्व राष्ट्रपति K. R. Narayanan और A. P. J. Abdul Kalam का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भी संवैधानिक परंपराओं का पालन करते हुए सरकार गठन के लिए पार्टियों को मौका दिया था।
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार का भी दिया उदाहरण
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें भी संसद में बहुमत साबित करने का अवसर दिया गया था। शिवकुमार ने कहा कि लोकतंत्र में कई बार एक वोट से सरकार बनती या गिरती है, इसलिए किसी पार्टी को पहले सदन में शक्ति परीक्षण का मौका मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा, “अगर बहुमत साबित नहीं होता है, तब अगला विकल्प तलाशा जा सकता है। लेकिन शुरुआत में ही अवसर से वंचित करना सही नहीं है।”
“जनता की भावना का सम्मान जरूरी”
डीके शिवकुमार ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की भावना और जनादेश का सम्मान सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रहकर निर्णय लेना चाहिए ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवकुमार का यह बयान दक्षिण भारतीय राजनीति में बढ़ते संवैधानिक और राजनीतिक विवादों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बेंगलुरु नॉर्थ कॉरपोरेशन कार्यालय पर भी चर्चा
इस दौरान शिवकुमार ने बेंगलुरु नॉर्थ कॉरपोरेशन के नए कार्यालय निर्माण को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसके लिए तीन से चार स्थानों के प्रस्ताव सामने आए हैं और निरीक्षण के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मंत्रियों और विधायकों ने अपने-अपने सुझाव दिए हैं, लेकिन अंतिम फैसला साइट निरीक्षण के बाद ही होगा।
GKVK में निर्माण की संभावना से किया इनकार
जब उनसे पूछा गया कि क्या नया कार्यालय University of Agricultural Sciences, Bengaluru के GKVK परिसर में बनाया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
उन्होंने कहा, “अभी वह विकल्प चर्चा में नहीं है, लेकिन सभी संभावनाओं की समीक्षा की जाएगी।”
सतिश जारकीहोली और लक्ष्मी हेब्बालकर से मुलाकात पर प्रतिक्रिया
उपमुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं Satish Jarkiholi और Lakshmi Hebbalkar के साथ हुई बैठक पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि यह बैठक बेलगावी जिले की सिंचाई परियोजनाओं को लेकर आयोजित की गई थी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार क्षेत्रीय विकास और सिंचाई योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है ताकि किसानों और ग्रामीण इलाकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर बढ़ी बहस
तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर चल रही बहस अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनती जा रही है। संवैधानिक अधिकारों, राज्यपाल की भूमिका और बहुमत परीक्षण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लगातार सामने आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में विधानसभा में शक्ति परीक्षण ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे उचित और पारदर्शी तरीका माना जाता है।









