तमिलनाडु राज्यपाल का तीसरी बार बहिष्कार, राष्ट्रीय गान को सम्मान न मिलने पर सत्र से गए बाहर

तमिलनाडु राज्यपाल आर एन रवि ने राष्ट्रीय गान सम्मान न मिलने पर विधानसभा सत्र का बहिष्कार किया। यह तीसरी बार है जब राज्यपाल ने सत्र का बहिष्कार किया।

तमिलनाडु राज्यपाल आर एन रवि ने राष्ट्रीय गान का सम्मान न मिलने पर विधानसभा सत्र का बहिष्कार किया। यह तीसरी बार है जब उन्होंने सदन का संबोधन दिए बिना सत्र का बहिष्कार किया, जिससे विवाद बढ़ा।

New Delhi: तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि विधानसभा सत्र से बाहर चले गए। उन्होंने तमिल एंथम के बाद राष्ट्रगान बजाने की मांग की थी, जिसे स्पीकर अप्पावु ने अस्वीकार कर दिया। इस कारण राज्यपाल ने सदन को संबोधित किए बिना ही सत्र का बहिष्कार किया। यह तीसरी बार है जब राज्यपाल ने विधानसभा सत्र का बहिष्कार किया है।

राष्ट्रगान को सम्मान न मिलने पर जताया दुख

राज्यपाल आर एन रवि ने इस मौके पर कहा कि उन्हें बहुत दुख हुआ कि राष्ट्रीय गान को सम्मान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि संबोधन में बाधा डालने के कारण उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में कठिनाई हुई। राज्यपाल ने जोर दिया कि राष्ट्रीय गान को पूरा सम्मान मिलना चाहिए।

राज्यपाल ने प्रेस बयान में कहा, "मुझे बहुत दुख है कि राष्ट्रीय गान को सम्मान नहीं दिया जा रहा है। ये दुर्भाग्य है कि संबोधन में बाधा पड़ी है। मैं अपनी जिम्मेदारियों से भलीभांति अवगत हूं। मगर, राष्ट्रीय गान को पूरा सम्मान मिलना चाहिए।"

तीसरी बार सत्र का बहिष्कार

आर एन रवि का यह तीसरी बार विधानसभा सत्र का बहिष्कार है। इससे पहले उन्होंने 2024 और 2025 में भी सदन का संबोधन नहीं दिया था। तमिलनाडु लोकभवन ने प्रेस रिलीज जारी करके इस पूरे मामले की जानकारी दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यपाल और सरकार के बीच चल रही तनावपूर्ण स्थिति विधानसभा कार्यप्रणाली पर भी असर डाल रही है। सत्र के बहिष्कार से विधायी कार्यों में देरी हो सकती है।

स्पीकर ने दी प्रतिक्रिया

राज्यपाल की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर अप्पावु ने कहा कि विधानसभा में केवल विधायकों को अपने विचार साझा करने की अनुमति होती है। उन्होंने बताया कि कोई अन्य व्यक्ति सदन में अपने विचार थोप नहीं सकता।

स्पीकर ने कहा, "सरकार ने राज्यपाल के संबोधन की तैयारी कर रखी थी। सदन में सभी नियमों का पालन होना जरूरी है।" इस बयान से स्पष्ट होता है कि स्पीकर और राज्यपाल के दृष्टिकोण में अंतर बना हुआ है।

राज्यपाल का आरोप

राज्यपाल आर एन रवि ने आरोप लगाया कि उन्हें सदन में बोलने का अवसर नहीं दिया गया और उनका माइक बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें अपमानित महसूस हुआ।

राज्यपाल ने कहा, "मेरा माइक बंद कर दिया गया और मुझे बोलने नहीं दिया गया। इससे मुझे अपमानित महसूस हुआ है।" उनका यह बयान विधानसभा में चल रहे विवाद को और बढ़ा सकता है।

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