ट्रंप ने फीफा से बालोगुन के बैन की समीक्षा कराने की पुष्टि, विश्व कप में फैसले पर छिड़ी नई बहस

ट्रंप ने फीफा से बालोगुन के बैन की समीक्षा कराने की पुष्टि, विश्व कप में फैसले पर छिड़ी नई बहस

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि उन्होंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से फोलारिन बालोगुन के एक मैच के प्रतिबंध की समीक्षा करने का अनुरोध किया था। फीफा के फैसले ने विश्व कप में निष्पक्षता और खेल की साख पर नई बहस छेड़ दी।

वॉशिंगटन: फीफा विश्व कप 2026 के नॉकआउट चरण से पहले एक बड़ा विवाद सामने आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि उन्होंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से संयुक्त राज्य अमेरिका के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन पर लगे एक मैच के प्रतिबंध की समीक्षा करने का अनुरोध किया था। इसके बाद फीफा ने बालोगुन के स्वतः लागू होने वाले एक मैच के निलंबन को 12 महीने के लिए स्थगित कर दिया।

इस फैसले के बाद यूरोपीय फुटबॉल जगत में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। बेल्जियम फुटबॉल संघ और यूईएफए ने इसे खेल की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने वाला निर्णय बताया है।

क्यों लगा था बालोगुन पर प्रतिबंध?

25 वर्षीय अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को विश्व कप के ग्रुप चरण में बोस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ मुकाबले के दौरान सीधा रेड कार्ड दिखाया गया था।

मैच के दौरान बालोगुन ने डिफेंडर तारिक मुहारेमोविच पर फाउल किया, जिसके बाद रेफरी ने उन्हें सीधे मैदान से बाहर भेज दिया। सामान्य नियमों के अनुसार उन्हें अगले मुकाबले में एक मैच का प्रतिबंध झेलना था। इसका मतलब था कि वह बेल्जियम के खिलाफ होने वाले अंतिम-16 के मुकाबले में नहीं खेल पाते।

फीफा ने बदला फैसला

रेड कार्ड के बाद स्वतः लागू होने वाला एक मैच का प्रतिबंध फीफा ने 12 महीने के लिए निलंबित कर दिया। इसका सीधा असर यह हुआ कि बालोगुन अब बेल्जियम के खिलाफ महत्वपूर्ण मुकाबले में खेलने के लिए पात्र हो गए। बालोगुन इस विश्व कप में अब तक तीन गोल कर चुके हैं और अमेरिकी टीम के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल हैं। ऐसे में उनके खेलने की अनुमति मिलने से अमेरिका को बड़ा फायदा माना जा रहा है।

ट्रंप ने क्या कहा?

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने फीफा से केवल फैसले की समीक्षा करने का अनुरोध किया था। ट्रंप ने कहा कि उनकी नजर में वह फाउल नहीं था और यदि प्रतिबंध लागू रहता तो इससे पूरे टूर्नामेंट पर "एक बड़ा दाग" लगता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने फीफा को कोई आदेश नहीं दिया और न ही किसी पर दबाव बनाया। ट्रंप के अनुसार, अंतिम निर्णय फीफा की स्वतंत्र न्यायिक समिति ने लिया और उन्होंने वही फैसला किया जिसे वह सही मानते हैं।

रेफरी के फैसले पर भी उठाए सवाल

ट्रंप ने मैच के रेफरी राफेल क्लॉस के फैसले की भी आलोचना की। उन्होंने रेड कार्ड को "बेहद खराब फैसला" बताया और रेफरी को लेकर संदेह भी जताया।
 हालांकि ब्राजील फुटबॉल परिसंघ ने रेफरी का बचाव करते हुए कहा कि उनके रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाया जा सके। संगठन ने उन्हें एक उत्कृष्ट और ईमानदार अधिकारी बताया।

इन्फेंटिनो ने क्या जवाब दिया?

फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि जब ट्रंप ने उनसे संपर्क किया, तब उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि मामला फीफा की स्वतंत्र न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। उन्होंने कहा कि इस मामले पर फैसला संबंधित न्यायिक निकाय ही करेगा और वही अंतिम निर्णय लेने के लिए अधिकृत है। बाद में इन्फेंटिनो ने फिर दोहराया कि फीफा की न्यायिक संस्थाएं पूरी तरह स्वतंत्र हैं और उनके फैसलों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से किसी फैसले से सहमत या असहमत होना अलग बात है, लेकिन संस्थागत स्वतंत्रता ही प्रतियोगिताओं की विश्वसनीयता बनाए रखती है।

बेल्जियम फुटबॉल संघ ने जताई नाराजगी

रॉयल बेल्जियन फुटबॉल एसोसिएशन (RBFA) ने फीफा के फैसले पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। संघ का कहना है कि वह इस निर्णय से "हैरान" है और उसने अमेरिकी फुटबॉल महासंघ को यह बता दिया है कि वह बालोगुन की पात्रता को चुनौती देता है। हालांकि फीफा की अपील समिति ने बेल्जियम की अपील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह मूल अनुशासनात्मक मामले का पक्षकार नहीं है। इसलिए उसे अपील करने का अधिकार नहीं बनता। फीफा के अनुसार, चूंकि बेल्जियम केवल अमेरिका का अगला प्रतिद्वंद्वी है, इसलिए वह इस मामले में कानूनी रूप से संबंधित पक्ष नहीं माना जा सकता।

बेल्जियम ने नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप

बेल्जियम फुटबॉल संघ ने कहा कि उसे अब तक यह नहीं बताया गया है कि उसकी अपील क्यों खारिज की गई। संघ ने यह भी कहा कि उसने रेफरी की रिपोर्ट और बालोगुन को खेलने योग्य घोषित करने के पीछे के कारणों की जानकारी मांगी थी, लेकिन अभी तक उसे आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। बेल्जियम का आरोप है कि यह फीफा के नियमों का उल्लंघन है।

यूईएफए ने भी उठाए सवाल

यूरोपीय फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था यूईएफए ने इस पूरे मामले पर चिंता जताई है। यूईएफए का मानना है कि इस तरह के फैसले फुटबॉल की निष्पक्षता और खेल की साख पर असर डाल सकते हैं। संगठन ने कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और स्वतंत्र न्यायिक प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण होती है।

अमेरिका को मिला बड़ा फायदा

बालोगुन की वापसी से अमेरिकी टीम की आक्रमण क्षमता मजबूत हुई है। वह इस विश्व कप में तीन गोल कर चुके हैं और टीम के प्रमुख फॉरवर्ड हैं। अब उनकी मौजूदगी में अमेरिका बेल्जियम के खिलाफ अंतिम-16 के मुकाबले में पूरे दमखम के साथ उतर सकेगा।

क्या यह विवाद आगे भी जारी रहेगा?

हालांकि फीफा ने फिलहाल अपना निर्णय स्पष्ट कर दिया है, लेकिन इस पूरे मामले ने खेल प्रशासन, न्यायिक स्वतंत्रता और राजनीतिक प्रभाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है। बेल्जियम और यूईएफए की आपत्तियों के कारण यह मामला आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है। विश्व कप जैसे बड़े मंच पर लिए गए ऐसे फैसले भविष्य में खेल संस्थाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करते हैं।

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