पीएम मोदी इंडोनेशिया दौरे पर: गार्ड ऑफ ऑनर से स्वागत, राष्ट्रपति प्रबोवो से अहम वार्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दूसरे दिन गार्ड ऑफ ऑनर से स्वागत हुआ। राष्ट्रपति प्रबोवो से बैठक में ब्रह्मोस मिसाइल डील, व्यापार पर नजर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दूसरे दिन जकार्ता में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ बैठक में ब्रह्मोस मिसाइल समझौते, रक्षा सहयोग, व्यापार, समुद्री सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर चर्चा होने की संभावना है।

जकार्ता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दूसरे दिन जकार्ता में उनका औपचारिक स्वागत गार्ड ऑफ ऑनर के साथ किया गया। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उनका स्वागत किया और दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता आयोजित हुई। इस बैठक में रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। सबसे अधिक ध्यान भारत और इंडोनेशिया के बीच संभावित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल समझौते पर है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 2,500 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह इंडोनेशिया का तीसरा दौरा और उनके कार्यकाल का 102वां विदेश दौरा है। इस यात्रा को भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जकार्ता में गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुआ औपचारिक स्वागत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जकार्ता पहुंचने के बाद इंडोनेशिया की ओर से उनका भव्य स्वागत किया गया। उनके विमान के इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही वहां की वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने एस्कॉर्ट किया। इसके बाद राष्ट्रपति भवन में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने स्वयं प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता से पहले औपचारिक मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता जताई।

ब्रह्मोस मिसाइल डील पर दुनिया की नजर

इस यात्रा का सबसे अहम एजेंडा भारत और इंडोनेशिया के बीच संभावित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली का समझौता माना जा रहा है। यदि यह डील अंतिम रूप लेती है तो फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस खरीदने वाला दूसरा विदेशी देश बन जाएगा।

ब्रह्मोस मिसाइल भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित की गई है। इसे दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल किया जाता है। इसकी तैनाती समुद्री और तटीय सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संभावित समझौता भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों की सामरिक साझेदारी को भी मजबूत करेगा।

समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक सहयोग रहेगा चर्चा का केंद्र

भारत और इंडोनेशिया हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच स्थित महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के साझेदार हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता, आपदा प्रबंधन और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी व्यापक चर्चा होने की संभावना है।

इंडोनेशिया का साबंग पोर्ट भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बेहद करीब स्थित है। वर्ष 2018 में दोनों देशों ने इस बंदरगाह के विकास और समुद्री संपर्क बढ़ाने पर सहमति जताई थी। इस परियोजना को हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी रहेगा जोर

प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के प्रमुख उद्योगपतियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों के साथ राउंडटेबल बैठक भी करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और बुनियादी ढांचे में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।

भारत और इंडोनेशिया दोनों तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं हैं और दोनों देश आपसी व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा से आर्थिक साझेदारी को भी नई गति मिल सकती है।

प्रम्बानन मंदिर का करेंगे दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया के प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर का भी दौरा करेंगे। नौवीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित है और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।

यह मंदिर न केवल इंडोनेशिया की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है बल्कि भारत और इंडोनेशिया के हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक संबंधों की भी महत्वपूर्ण पहचान माना जाता है।

भारतीय समुदाय को करेंगे संबोधित

जकार्ता प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे। वे वहां आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करेंगे और दोनों देशों के लोगों के बीच सांस्कृतिक एवं सामाजिक संबंधों को मजबूत बनाने का संदेश देंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी अपने अगले विदेश दौरे के तहत न्यूजीलैंड के लिए रवाना होंगे।

भारत और इंडोनेशिया के 2,000 वर्ष पुराने सांस्कृतिक संबंध

भारत और इंडोनेशिया के संबंध केवल कूटनीतिक या आर्थिक नहीं बल्कि हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत रिश्तों पर आधारित हैं। प्राचीन काल में भारतीय व्यापारी, बौद्ध भिक्षु और हिंदू धर्मगुरु समुद्री मार्गों के माध्यम से इंडोनेशिया पहुंचे थे। उनके माध्यम से वहां भारतीय संस्कृति, भाषा, धर्म और कला का व्यापक प्रभाव पड़ा।

आज भी इंडोनेशिया के बाली और जावा जैसे क्षेत्रों में रामायण और महाभारत पर आधारित नृत्य-नाटक नियमित रूप से प्रस्तुत किए जाते हैं। इंडोनेशिया की राष्ट्रीय एयरलाइन का नाम 'गरुड़' है, जो हिंदू पौराणिक कथाओं से प्रेरित है। अतीत में इंडोनेशिया के 20 हजार रुपिया के नोट पर भगवान गणेश की तस्वीर भी प्रकाशित की जा चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि भारत ने कभी इंडोनेशिया पर शासन नहीं किया, फिर भी सांस्कृतिक आदान-प्रदान और व्यापारिक संपर्कों के माध्यम से भारतीय सभ्यता ने वहां गहरी छाप छोड़ी।

भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के लिए अहम दौरा

विश्लेषकों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति को और मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने में यह दौरा अहम साबित हो सकता है।

यदि ब्रह्मोस समझौते पर अंतिम मुहर लगती है तो यह भारत के रक्षा निर्यात के इतिहास में एक और बड़ी उपलब्धि होगी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को और मजबूत करेगी। 

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