अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की लोकप्रियता में गिरावट से रिपब्लिकन पार्टी की चिंता बढ़ गई है। AP-NORC सर्वे में केवल 30% अमेरिकी उनके कामकाज से संतुष्ट हैं। अर्थव्यवस्था, महंगाई और टैरिफ पर असंतोष के बीच कई उम्मीदवार ट्रम्प से दूरी बना रहे हैं।
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की लोकप्रियता में गिरावट और अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ते असंतोष ने उनकी रिपब्लिकन पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले कई रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रम्प से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। कुछ नेताओं ने अपनी चुनावी वेबसाइटों से ट्रम्प और उनके ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे का उल्लेख हटा दिया है, जबकि कुछ उनके साथ मंच साझा करने से भी बच रहे हैं।
ट्रम्प के कामकाज से सिर्फ 30% अमेरिकी संतुष्ट
24 से 28 सितंबर के AP-NORC सर्वे के मुताबिक, सिर्फ 30% अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कामकाज से संतुष्ट हैं। अर्थव्यवस्था के मामले में ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग 26% रही, जबकि जीवनयापन की बढ़ती लागत से निपटने के उनके तरीके से केवल 17% अमेरिकी संतुष्ट हैं।
सर्वे में 65% से ज्यादा अमेरिकियों ने लगातार बढ़ती कीमतों के लिए ट्रम्प की नीतियों को जिम्मेदार माना। टैरिफ नीति को लेकर भी असंतोष सामने आया है। 64% लोगों का कहना है कि ट्रम्प टैरिफ के मामले में जरूरत से ज्यादा आगे चले गए हैं।
अर्थव्यवस्था बनी रिपब्लिकन उम्मीदवारों की बड़ी चिंता
रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए अर्थव्यवस्था सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बनती दिखाई दे रही है। वे महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत को चुनावी मुद्दा बनाना चाहते हैं, लेकिन उनके लिए यह मुश्किल है कि वे व्हाइट हाउस में अपनी ही पार्टी के राष्ट्रपति की आर्थिक नीतियों से पूरी तरह दूरी बना सकें।
ट्रम्प की कुल अप्रूवल रेटिंग में गिरावट और आर्थिक नीतियों को लेकर असंतोष ऐसे समय सामने आया है, जब रिपब्लिकन उम्मीदवार नवंबर के चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। पार्टी नेताओं को आशंका है कि ट्रम्प की कमजोर होती लोकप्रियता का असर उनके चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
रिपब्लिकन नेताओं में ट्रम्प की नीतियों पर मतभेद
ट्रम्प की नीतियों को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर मतभेद भी सामने आने लगे हैं। आयोवा से सांसद और सीनेट उम्मीदवार एश्ले हिंसन तथा मिशिगन के सीनेट उम्मीदवार माइक रोजर्स ने ईरान युद्ध जल्द खत्म करने की मांग की है। दोनों नेता पहले ट्रम्प की सैन्य कार्रवाई का समर्थन कर चुके हैं।
आयोवा के सांसद जैक नन और मैरियानेट मिलर-मीक्स ने ट्रम्प की युद्ध शक्तियों को सीमित करने के लिए डेमोक्रेट्स के साथ वोट किया। फ्लोरिडा की सांसद मारिया ने ट्रम्प की सख्त इमिग्रेशन नीति पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा, कई रिपब्लिकन उम्मीदवारों ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिया है कि वे अपने चुनावी अभियानों में ट्रम्प का प्रचार नहीं चाहते। इससे यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी के कुछ उम्मीदवार स्थानीय मतदाताओं के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति से सीमित दूरी बनाए रखना चाहते हैं।
ट्रम्प से दूरी बनाने वालों में कई बड़े नाम
ट्रम्प से दूरी बनाने वाले रिपब्लिकन नेताओं और उम्मीदवारों में कई ऐसे नाम भी शामिल हैं, जो पहले उनके समर्थक रहे हैं। गवर्नर पद के चुनाव में विस्कॉन्सिन के टॉम टिफनी, एरिजोना के एली क्रेन और जॉर्जिया के रिक जैक्सन जैसे नाम इस खेमे में बताए जा रहे हैं। सांसदों से जुड़े चेहरों में जॉर्जिया की मार्जरी टेलर, केंटकी के जेम्स कोमर, ओहायो के जिम जॉर्डन और साउथ कैरोलिना की नैन्सी मेस शामिल हैं। ये नेता लंबे समय तक ट्रम्प के समर्थक रहे हैं।
इन नेताओं की स्थिति से यह संकेत मिलता है कि रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ट्रम्प की नीतियों और उनकी राजनीतिक रणनीति को लेकर एकरूपता नहीं रही है। मिडटर्म चुनाव से पहले यह मतभेद पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है।

ओहायो में विवेक रामास्वामी के सामने कड़ी चुनौती
ट्रम्प के मजबूत राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले ओहायो में भारतवंशी विवेक रामास्वामी के लिए गवर्नर चुनाव बड़ी परीक्षा बन गया है। ट्रम्प ने 2024 में ओहायो में 11 पॉइंट की जीत दर्ज की थी, लेकिन मौजूदा चुनावी सर्वे में रिपब्लिकन उम्मीदवार रामास्वामी पीछे दिखाई दे रहे हैं। 24 से 27 सितंबर के Marist सर्वे के मुताबिक, डेमोक्रेट उम्मीदवार एमी एक्टन को 50% समर्थन मिला, जबकि रामास्वामी को 44% समर्थन मिला। यानी रामास्वामी एक्टन से 6 पॉइंट पीछे हैं।
इसी सर्वे में ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग 42% रही। वहीं, 41% वोटर्स ने कहा कि चुनाव में उनका वोट मुख्य रूप से ट्रम्प के खिलाफ होगा। यह आंकड़ा रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है, खासकर उन राज्यों में जहां ट्रम्प पहले मजबूत समर्थन हासिल करते रहे हैं।
डेमोक्रेट्स को हाउस में बढ़त, रिपब्लिकन के लिए खतरा
रिपब्लिकन पार्टी की चिंता केवल अलग-अलग राज्यों के सर्वे तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय चुनावी आंकड़े भी डेमोक्रेट्स के पक्ष में बढ़त का संकेत दे रहे हैं। नेट सिल्वर के औसत के मुताबिक, सितंबर की शुरुआत में कांग्रेस के जेनेरिक बैलट में डेमोक्रेट्स को 6.7 अंक की बढ़त हासिल थी। अब यह बढ़त बढ़कर 9 अंक हो गई है।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट्स की इतनी बढ़त रिपब्लिकन पार्टी के लिए गंभीर खतरा मानी जा रही है। मिडटर्म चुनाव में हाउस का नियंत्रण हासिल करने के लिए दोनों पार्टियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा होने की संभावना है।
सीनेट में भी रिपब्लिकन के लिए चुनौती बढ़ी
सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी फिलहाल 53-47 की बढ़त रखती है। हालांकि, चुनाव से पहले राजनीतिक तस्वीर कठिन होती जा रही है। कुछ ऐसी सीनेट सीटें भी प्रतिस्पर्धी बन गई हैं, जिन्हें पहले रिपब्लिकन के लिए सुरक्षित माना जाता था।
इस स्थिति में ट्रम्प की लोकप्रियता में गिरावट रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकती है। जहां एक ओर पार्टी को अपने पारंपरिक मतदाताओं को साथ रखना है, वहीं दूसरी ओर उन मतदाताओं तक भी पहुंच बनानी है जो ट्रम्प की आर्थिक, टैरिफ, इमिग्रेशन और विदेश नीति से असंतुष्ट हैं।
मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रम्प के लिए बढ़ता दबाव
नवंबर के मिडटर्म चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी के भीतर बढ़ती बेचैनी ट्रम्प के लिए राजनीतिक दबाव का संकेत है। पार्टी के कई उम्मीदवार अब स्थानीय मुद्दों और अपने व्यक्तिगत चुनावी रिकॉर्ड पर जोर देने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि ट्रम्प की नीतियों से दूरी बनाने के संकेत भी दे रहे हैं।
अर्थव्यवस्था, महंगाई, टैरिफ और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर मतदाताओं की नाराजगी रिपब्लिकन उम्मीदवारों के चुनावी अभियानों को प्रभावित कर सकती है।
अगर यह असंतोष मतदान तक कायम रहता है, तो हाउस और सीनेट दोनों में रिपब्लिकन पार्टी के सामने चुनौती बढ़ सकती है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रम्प अपनी लोकप्रियता में आई गिरावट को रोक पाएंगे और क्या रिपब्लिकन उम्मीदवार मिडटर्म चुनाव में उनकी राजनीतिक छवि से अलग अपनी चुनावी पहचान स्थापित कर पाएंगे। नवंबर का चुनाव इस बात का महत्वपूर्ण संकेत देगा कि अमेरिकी मतदाता ट्रम्प प्रशासन के प्रदर्शन और रिपब्लिकन पार्टी की नीतियों को किस तरह देखते हैं।











