लातविया के प्रधानमंत्री एंड्रिस कुलबर्ग्स की यूक्रेन समर्थक यूनाइटेड लिस्ट ने संसदीय चुनाव में 36.6% वोट के साथ बड़ी बढ़त बनाई। रूस के संभावित खतरे के बीच हुए चुनाव में पार्टी को सरकार बनाने के लिए गठबंधन सहयोगियों की जरूरत होगी।
रीगा: लातविया के प्रधानमंत्री एंड्रिस कुलबर्ग्स की सेंटरिस्ट और यूक्रेन समर्थक यूनाइटेड लिस्ट पार्टी ने शनिवार को हुए संसदीय चुनाव में बड़ी बढ़त हासिल की है। आंशिक नतीजों के मुताबिक, 88% मतों की गिनती तक पार्टी को 36.6% वोट मिले हैं। रूस की ओर से संभावित खतरे और यूरोप में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच हुए चुनाव में यूनाइटेड लिस्ट ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। हालांकि, पार्टी को सरकार बनाने के लिए अब भी गठबंधन सहयोगियों की जरूरत होगी।
पॉपुलिस्ट और MAGA-शैली की राजनीति वाली लेटविया फर्स्ट पार्टी 13.4% वोट के साथ दूसरे स्थान पर रही। इस पार्टी ने चुनाव से पहले देश के बड़े रूसी मूल के अल्पसंख्यक समुदाय को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की थी।
कुलबर्ग्स ने जीत पर जताई हैरानी
एग्जिट पोल के शुरुआती आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए एंड्रिस कुलबर्ग्स ने कहा कि वह इस तरह के परिणाम की उम्मीद नहीं कर रहे थे। रीगा में अपनी पार्टी के मुख्यालय में उन्होंने परिणाम को बेहद अच्छा बताया।
कुलबर्ग्स ने कहा कि वह प्रधानमंत्री पद पर बने रहना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह लेटविया फर्स्ट के साथ सरकार नहीं बनाना चाहेंगे।
आंशिक नतीजों के अनुसार, यूनाइटेड लिस्ट को बहुमत हासिल करने के लिए अन्य राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन करना होगा। इसलिए चुनाव में बड़ी बढ़त के बावजूद सरकार गठन कुलबर्ग्स के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी।
रूस का डर बना चुनाव का बड़ा मुद्दा
लातविया समेत बाल्टिक देश पिछले कई महीनों से रूस की कथित गतिविधियों को लेकर चेतावनी देते रहे हैं। उनका कहना है कि रूस यूरोप में तोड़फोड़, साइबर हमलों और अन्य हाइब्रिड गतिविधियों के जरिए यूक्रेन के समर्थन को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।
इन देशों का आरोप है कि ऐसी गतिविधियों का उद्देश्य यूरोपीय देशों में डर पैदा करना और यूक्रेन के लिए जारी समर्थन को कमजोर करना है। हालांकि, पश्चिमी अधिकारियों ने रूस के सीधे NATO पर हमला करने की क्षमता को लेकर जताई जा रही कुछ चिंताओं को खारिज किया है।
रूस ने इन आरोपों को निराधार बताया है। मॉस्को का कहना है कि उसके खिलाफ इस तरह के आरोप रूस विरोधी उन्माद का हिस्सा हैं।
रूस समर्थक पार्टी तीसरे स्थान पर
शुरुआती एग्जिट पोल में रूस समर्थक सॉवरेन पावर पार्टी 11.6% वोट के साथ तीसरे स्थान पर रही। इसके बाद राष्ट्रवादी नेशनल अलायंस को 9.1% वोट मिले।
नेशनल अलायंस क्रेमलिन के प्रति कड़ा रुख अपनाने वाली पार्टी है। वहीं, सॉवरेन पावर पार्टी ने यूक्रेन युद्ध को लेकर अलग नीति अपनाने की वकालत की है।
चुनाव परिणामों से संकेत मिलता है कि लातविया के मतदाताओं के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा और रूस के साथ संबंध महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। हालांकि, घरेलू अर्थव्यवस्था और जीवन-यापन की लागत भी चुनावी बहस में प्रमुख रही।

ड्रोन घटनाओं के बाद सत्ता में आए थे कुलबर्ग्स
47 वर्षीय एंड्रिस कुलबर्ग्स कारोबारी और शौकिया रैली ड्राइवर हैं। वह मई में प्रधानमंत्री बने थे, जब पिछली गठबंधन सरकार ड्रोन घटनाओं से निपटने के तरीके को लेकर टूट गई थी।
इन घटनाओं में सैन्य ड्रोन बिना पहचान में आए लातविया के क्षेत्र में पहुंच गए थे। ड्रोन यूक्रेनी थे, लेकिन लातवियाई अधिकारियों ने रूस को उनके रास्ते बदलने के लिए जिम्मेदार ठहराया था।
इन घटनाओं के बाद देश की सुरक्षा और ड्रोन रोधी क्षमता को लेकर बहस तेज हुई। कुलबर्ग्स ने अपने चुनाव अभियान में भी राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया।
रक्षा खर्च 5% GDP रखने का वादा
कुलबर्ग्स ने चुनाव प्रचार के दौरान लातविया की रक्षा क्षमता बढ़ाने और अधिक एंटी-ड्रोन सिस्टम विकसित करने का वादा किया था। उन्होंने रक्षा खर्च को GDP के 5% पर बनाए रखने की बात भी कही।
NATO के संदर्भ में यह रक्षा खर्च का बहुत ऊंचा स्तर है। कुलबर्ग्स के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा चुनाव अभियान का प्रमुख मुद्दा रही।
रीगा की 21 वर्षीय मेगिजा नॉर्डेना ने भी सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने छात्रों के लिए समर्थन, अर्थव्यवस्था और पेंशनभोगियों की सहायता को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
यूक्रेन को मदद रोकने की मांग
कुलबर्ग्स के रूस समर्थक प्रतिद्वंद्वियों ने लातविया से यूक्रेन को दी जा रही सहायता रोकने की मांग की। उनका कहना है कि सरकार को युद्ध के बजाय घरेलू समस्याओं और जीवन-यापन की लागत पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
सॉवरेन पावर पार्टी की नेता जूलिया स्टेपनेंको ने कहा कि उनके मतदाता शांति चाहते हैं। उन्होंने हवाई चेतावनियों और आश्रय स्थलों की चिंता से मुक्त जीवन की इच्छा जताई।
स्टेपनेंको ने कहा कि युद्ध को किसी भी तरीके से प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए, जिसमें उसे वित्तीय मदद देना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को जीतना चाहिए, लेकिन शांति वार्ता के जरिए।
रूसी मूल की आबादी भी दो हिस्सों में बंटी
लातविया का रूसी मूल का अल्पसंख्यक समुदाय भी राजनीतिक रूप से विभाजित है। कुछ लोग क्रेमलिन के यूक्रेन युद्ध से नाराज या शर्मिंदा हैं, जबकि कुछ घरेलू नीतियों को लेकर असंतुष्ट हैं।
लातविया में सार्वजनिक जीवन में रूसी प्रभाव और भूमिका सीमित करने वाली नीतियों को रूसी भाषी समुदाय के कुछ लोग भेदभावपूर्ण मानते हैं।
इसी वजह से रूसी मूल के मतदाताओं के बीच भी सुरक्षा, रूस-यूक्रेन युद्ध और घरेलू नीतियों को लेकर अलग-अलग राय है। चुनाव में इस विभाजन का असर भी दिखाई दिया।
लातविया की रणनीतिक स्थिति
लातविया की आबादी करीब 19 लाख है। यह देश बाल्टिक सागर और रूस तथा बेलारूस के बीच स्थित है। इसके उत्तर में एस्टोनिया और दक्षिण में लिथुआनिया हैं।
एस्टोनिया और लिथुआनिया दोनों यूरोपीय संघ और NATO के सदस्य हैं। रूस और बेलारूस के करीब होने के कारण लातविया यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
देश में सुरक्षा, सीमा निगरानी, साइबर हमलों और सैन्य तैयारियों को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। यूक्रेन युद्ध ने इन मुद्दों की अहमियत और बढ़ा दी है।
अब गठबंधन सरकार बनाने की चुनौती
यूनाइटेड लिस्ट को 36.6% वोट के साथ स्पष्ट बढ़त मिलने के बावजूद कुलबर्ग्स अकेले सरकार नहीं बना सकते। उन्हें संसद में बहुमत के लिए दूसरे दलों का समर्थन हासिल करना होगा।
प्रधानमंत्री ने लेटविया फर्स्ट के साथ सरकार बनाने से इनकार किया है। ऐसे में उन्हें अन्य राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन पर सहमति बनानी होगी।
आने वाले दिनों में गठबंधन वार्ता यह तय करेगी कि लातविया की अगली सरकार की नीति किस दिशा में जाएगी। फिलहाल चुनाव परिणामों ने कुलबर्ग्स की सुरक्षा और यूक्रेन समर्थक नीति को मजबूत राजनीतिक आधार दिया है।











