जेलेंस्की का दावा- रूस ने उत्तर कोरिया के साथ साझा की जेट-ड्रोन तकनीक, मिसाइल मदद के बदले बढ़ा सहयोग

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया कि रूस ने उत्तर कोरिया के साथ जेट-ड्रोन तकनीक साझा की हो सकती है। जानें पूरा मामला और पृष्ठभूमि।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूस ने उत्तर कोरिया के साथ जेट-ड्रोन तकनीक साझा की हो सकती है। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया ने रूस को मिसाइलों और सैनिकों से मदद दी है। दोनों देशों के सैन्य सहयोग को लेकर पश्चिमी देशों ने भी चिंता जताई है।

कीव: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूस ने अपने लंबे समय से सहयोगी उत्तर कोरिया के साथ जेट-ड्रोन तकनीक साझा की हो सकती है। रविवार को पत्रकारों से बातचीत में जेलेंस्की से रूस के नवीनतम जेट-संचालित ड्रोन की तकनीक उत्तर कोरिया के साथ साझा किए जाने को लेकर सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा, “हां, बिल्कुल।”

जेलेंस्की ने कहा कि रूस उत्तर कोरिया के साथ कई तरह की तकनीक साझा कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य तकनीकों के बारे में पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन उनका मानना है कि रूस ने उत्तर कोरिया को तकनीकी मदद दी है, क्योंकि प्योंगयांग ने रूस को मिसाइलों के मामले में सहायता पहुंचाई है।

यूक्रेन पर जेट-ड्रोन हमले बढ़ने का दावा

जेलेंस्की का बयान ऐसे समय आया है, जब यूक्रेन के मुताबिक रूस ने हाल के हफ्तों में जेट-ड्रोन के इस्तेमाल में तेजी लाई है। इन ड्रोन की गति और क्षमताओं के कारण यूक्रेन के लिए उन्हें रोकना चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है।

यूक्रेन के अनुसार, इन जेट-संचालित ड्रोन के खिलाफ उसके पास सीमित प्रभावी विकल्प हैं और फिलहाल लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल भी उनकी रोकथाम के तरीकों में शामिल है।

रूस की ओर से इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है कि उसने जेट-ड्रोन की तकनीक उत्तर कोरिया को हस्तांतरित की है।

रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग

रूस और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य सहयोग पिछले कुछ समय में काफी बढ़ा है। यूक्रेन और पश्चिमी देशों का आरोप है कि उत्तर कोरिया ने रूस को युद्ध के लिए बड़ी मात्रा में सैन्य सहायता उपलब्ध कराई है।

यूक्रेन के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने रूस को लाखों तोप के गोले उपलब्ध कराए हैं। इसके अलावा प्योंगयांग की ओर से बैलिस्टिक मिसाइलों की आपूर्ति किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। रूस ने यूक्रेन के खिलाफ अपने हमलों में ऐसी मिसाइलों का इस्तेमाल किया है।

इसके बदले रूस द्वारा उत्तर कोरिया को सैन्य या तकनीकी सहायता दिए जाने की संभावना को लेकर दक्षिण कोरिया और पश्चिमी देशों ने पहले भी चिंता जताई है।

उत्तर कोरियाई सैनिकों की रूस में मौजूदगी

रूस और उत्तर कोरिया के बीच सहयोग केवल हथियारों और सैन्य तकनीक तक सीमित रहने का दावा नहीं किया गया है। उत्तर कोरिया ने रूस की मदद के लिए हजारों सैनिक भी भेजे हैं।

इन सैनिकों को रूस में यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध में तैनात किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, उत्तर कोरियाई सैनिकों को युद्ध का प्रत्यक्ष अनुभव भी मिल रहा है।

यूक्रेन और पश्चिमी देशों का कहना है कि रूस और उत्तर कोरिया के बीच यह सहयोग दोनों देशों के सैन्य संबंधों को और मजबूत कर रहा है।

रूस को मिसाइलों की मदद का जेलेंस्की ने किया जिक्र

जेलेंस्की ने रूस और उत्तर कोरिया के बीच संभावित तकनीकी सहयोग की वजह बताते हुए प्योंगयांग की ओर से रूस को दी गई मिसाइल सहायता का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि रूस उत्तर कोरिया के साथ विभिन्न तकनीकों को साझा कर रहा है और उन्हें लगता है कि इसका एक कारण उत्तर कोरिया की ओर से रूस को मिसाइलों के मामले में मदद करना है।

हालांकि, जेलेंस्की ने यह स्पष्ट नहीं किया कि रूस ने उत्तर कोरिया को किस स्तर की जेट-ड्रोन तकनीक उपलब्ध कराई है। उन्होंने बैलिस्टिक तकनीक से संबंधित संभावित हस्तांतरण की भी पुष्टि नहीं की।

दक्षिण कोरिया और पश्चिमी देशों की चिंता

रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते सैन्य संबंधों को लेकर दक्षिण कोरिया और पश्चिमी देशों की चिंता पहले भी सामने आती रही है। दक्षिण कोरिया का मानना है कि उत्तर कोरिया रूस को सैन्य सहायता देने के बदले अपने हथियार कार्यक्रम को मजबूत करने के लिए रूस से तकनीकी या सैन्य मदद हासिल कर सकता है।

विशेष रूप से मिसाइल, ड्रोन और अन्य आधुनिक सैन्य प्रणालियों से जुड़ी तकनीक के संभावित हस्तांतरण को लेकर चिंता जताई गई है। यदि रूस ने वास्तव में उत्तर कोरिया को आधुनिक ड्रोन तकनीक उपलब्ध कराई है, तो इससे प्योंगयांग की सैन्य क्षमताओं को लेकर नई चिंताएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि, जेलेंस्की के दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों को लेकर विवाद

रूस-उत्तर कोरिया सैन्य सहयोग के बीच यूक्रेन और दक्षिण कोरिया के बीच भी एक अलग राजनयिक विवाद चल रहा है। यह विवाद उत्तर कोरियाई सैनिकों से जुड़े युद्धबंदियों के मुद्दे को लेकर सामने आया है।

जेलेंस्की ने पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि यूक्रेन ने रूस की ओर से लड़ते हुए पकड़े गए दो उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों को दक्षिण कोरिया को सौंप दिया है। इस घटनाक्रम के बाद सियोल और कीव के बीच राजनयिक मतभेद सामने आए।

दक्षिण कोरिया ने मांगा स्पष्टीकरण

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्यंग ने शुक्रवार को यूक्रेन के खिलाफ संभावित कदम उठाने की चेतावनी दी थी। दक्षिण कोरिया का कहना है कि दोनों देशों के बीच युद्धबंदियों के हस्तांतरण को लेकर एक गोपनीयता समझौता था।

सियोल ने यूक्रेन से उस कथित गोपनीयता समझौते को स्वीकार करने और माफी मांगने की मांग की है। दक्षिण कोरिया की ओर से आगे की कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

जेलेंस्की ने पत्रकारों से बातचीत में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की इन टिप्पणियों का सीधे उल्लेख नहीं किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया ने यूक्रेन से उत्तर कोरियाई सैनिकों को सौंपने का अनुरोध किया था।

जेलेंस्की ने सैनिकों को लेकर क्या कहा?

जेलेंस्की ने कहा कि दक्षिण कोरिया ने यूक्रेन से उत्तर कोरियाई सैनिकों को अपने पास भेजने का अनुरोध किया था। उन्होंने उत्तर कोरियाई संविधान का हवाला देते हुए कहा कि ये सैनिक दक्षिण कोरिया की नजर में उसके नागरिक हैं।

उन्होंने कहा कि इसी वजह से यूक्रेन ने पकड़े गए दोनों उत्तर कोरियाई सैनिकों को दक्षिण कोरिया को सौंप दिया। यह घटनाक्रम रूस-यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरियाई सैनिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी और उनके भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सामने आया है।

रूस-उत्तर कोरिया संबंधों का युद्ध पर असर

रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते सहयोग ने यूक्रेन युद्ध के अंतरराष्ट्रीय आयाम को और जटिल बना दिया है। एक ओर रूस को उत्तर कोरिया से हथियार और सैनिक मिलने के आरोप हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तर कोरिया को रूस से संभावित सैन्य तकनीक मिलने की आशंका जताई जा रही है।

यदि दोनों देशों के बीच आधुनिक सैन्य तकनीक का वास्तविक आदान-प्रदान हो रहा है, तो इसका प्रभाव केवल रूस-यूक्रेन युद्ध तक सीमित नहीं रह सकता। इससे पूर्वी एशिया में सुरक्षा समीकरण और उत्तर कोरिया की सैन्य क्षमताओं को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है।

फिलहाल जेट-ड्रोन तकनीक साझा किए जाने का दावा यूक्रेन की ओर से आया है और रूस तथा उत्तर कोरिया की ओर से इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

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