उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। लखनऊ के फैजुल्लागंज में करीब 40 हजार घरों में 4 से 5 फीट तक पानी भर गया है और 3 लाख लोग प्रभावित हैं। राज्य के 11 जिले बाढ़ की चपेट में हैं।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। पहाड़ी इलाकों में हुई बारिश के बाद बांधों और बैराजों से छोड़े गए पानी के कारण 10 नदियां उफान पर हैं। लखनऊ, सीतापुर समेत 11 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार सातवें दिन बढ़ रहा है। फैजुल्लागंज क्षेत्र में करीब 40 हजार घरों में 4 से 5 फीट तक पानी भर गया है, जिससे करीब 3 लाख लोग प्रभावित हैं।
फैजुल्लागंज में सबसे ज्यादा असर
लखनऊ के फैजुल्लागंज इलाके में बाढ़ के हालात गंभीर बने हुए हैं। कृष्ण लोक कॉलोनी से लेकर नंदपुरम तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। कई घरों में 4 से 5 फीट तक पानी भरने के कारण हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। इलाके की सड़कों पर नाव चल रही हैं और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

प्रशासन के अनुसार, राहत और बचाव कार्य के लिए करीब 40 नाव लगाई गई हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि जरूरत के मुकाबले नावों की संख्या कम है। बाढ़ के कारण प्रभावित इलाकों में पीने के पानी की समस्या भी सामने आई है।
गोमती का जलस्तर लगातार सातवें दिन बढ़ा
लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार सातवें दिन तेजी से बढ़ रहा है। बाढ़ का असर गोमती रिवर फ्रंट के आसपास भी दिखाई दे रहा है। नदी किनारे स्थित हनुमंत धाम, लेटे हुए हनुमान मंदिर और चंद्रिका देवी मंदिर जलमग्न हो गए हैं।
बाढ़ की स्थिति सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं है। बलिया और गोंडा में भी दर्जनों गांव पानी से घिर गए हैं और कई गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। प्रशासन और स्थानीय स्तर पर प्रभावित इलाकों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
बारिश बंद होने के बाद भी क्यों बढ़ रहा पानी?
उत्तर प्रदेश में पिछले आठ दिनों से बारिश नहीं होने के बावजूद नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। इसकी मुख्य वजह ऊपरी इलाकों में हुई भारी बारिश का पानी है। नेपाल, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के ऊपरी जिलों में हुई बारिश का पानी नदियों के जरिए धीरे-धीरे मैदानी क्षेत्रों में पहुंच रहा है।
इसके अलावा ऊपरी इलाकों में बारिश के कारण बैराज और जलाशयों में पानी बढ़ने के बाद अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। यह पानी कुछ समय बाद यूपी की नदियों में पहुंचता है और उनका जलस्तर बढ़ जाता है। लखनऊ की गोमती नदी में पानी बढ़ने के पीछे भी यही वजह बताई जा रही है।
लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बहराइच, श्रावस्ती, सीतापुर, गोंडा और बाराबंकी जैसे जिलों में इसका असर ज्यादा दिखाई दे रहा है। अयोध्या और गोरखपुर जैसे मैदानी जिलों में भी नदी के जलस्तर पर इसका प्रभाव पड़ रहा है।
लखीमपुर खीरी में शारदा का कटान तेज
लखीमपुर खीरी के रुरा सुल्तानपुर में शारदा नदी का कटान तेज हो गया है। शनिवार सुबह कई हरे-भरे पेड़ और एक मकान नदी में बह गए। वहीं, बेल्हा सिकटिहा गांव में शारदा नदी के बाढ़ के पानी में एक बाघ फंस गया, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई।
उन्नाव में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ नदी किनारे बसे गांवों में जंगली जीव-जंतुओं के निकलने का खतरा बढ़ गया है। शनिवार देर रात चंपापुरवा गांव में मगरमच्छ दिखाई देने के बाद ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को इसकी सूचना दी।
लखनऊ में बाढ़ पर सियासत भी तेज
लखनऊ में बाढ़ के हालात को लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने 'X' पर लिखा कि मुख्यमंत्री की निकासी का समय आ गया, लेकिन लखनऊ में अपने घर के पास ही के क्षेत्र में जलभराव की निकासी नहीं कर पाए। उन्होंने घर और परिवार के लिए उसके महत्व का भी उल्लेख किया।
इस बीच प्रशासन बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी रखने का दावा कर रहा है। गोमती के लगातार बढ़ते जलस्तर और ऊपरी इलाकों से आ रहे पानी को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति अभी गंभीर बनी हुई है और जलस्तर में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।












