मंत्रिमंडल ने सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) के ढांचे के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है। इसके तहत नागरिक पुलिस के आठ कांस्टेबल, एक डाक रनर और दो कांस्टेबल चालक समेत कुल 11 पद समाप्त किए जाएंगे।
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने सतर्कता अधिष्ठान यानी विजिलेंस विभाग के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में 4 अक्टूबर को चंपावत के बनबसा स्थित एनएचपीसी में हुई कैबिनेट बैठक में विजिलेंस के पदों के पुनर्गठन से जुड़े प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। सरकार के इस फैसले के तहत पुराने पदों की संख्या और जिम्मेदारियों में बदलाव करते हुए जरूरत के मुताबिक नए पद तैयार किए जाएंगे।
विजिलेंस में 11 पद होंगे समाप्त
कैबिनेट के फैसले के अनुसार सतर्कता अधिष्ठान में कुल 11 मौजूदा पद समाप्त किए जाएंगे। इनमें नागरिक पुलिस के आठ कांस्टेबल, एक डाक रनर कांस्टेबल और दो चालक कांस्टेबल के पद शामिल हैं। इसके साथ ही विभागीय ढांचे को नए सिरे से व्यवस्थित किया जाएगा, ताकि अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारियों का बेहतर वितरण किया जा सके।
सरकार ने दूसरी ओर नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी है। मुख्य आरक्षी नागरिक पुलिस के पांच पद बढ़ाए जाएंगे। इसके अलावा अपर उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस के तीन, मुख्य आरक्षी डाक रनर का एक, मुख्य आरक्षी चालक का एक और अपर उपनिरीक्षक चालक का एक नया पद बनाया जाएगा। इस तरह कुल छह नए पदों का सृजन होगा।
निगरानी व्यवस्था को नए ढांचे के अनुरूप करने की तैयारी
विजिलेंस अधिष्ठान के पुनर्गठन का फैसला विभाग में अलग-अलग संवर्गों की मौजूदा व्यवस्था को बदलने से जुड़ा है। नए ढांचे में हेड कांस्टेबल और एएसआई स्तर के पदों को अधिक महत्व दिया गया है। इससे विभागीय कामकाज में जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण और प्रशासनिक व्यवस्था को नए कानूनी तथा संस्थागत ढांचे के अनुरूप करने का रास्ता तैयार होगा।
कैबिनेट बैठक में विजिलेंस से जुड़े पुराने नियमों में संशोधन का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया। वर्ष 1965 की अधिसूचना में भारतीय न्याय संहिता, 2023 के लागू होने के बाद आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। इसका उद्देश्य पुराने कानूनी प्रावधानों को मौजूदा न्यायिक व्यवस्था के साथ सामंजस्य में लाना है।

सहायक लोक अभियोजक की नियुक्ति का रास्ता होगा आसान
उत्तराखंड कैबिनेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 19 की उपधारा (3) को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी करने की मंजूरी भी दी है। इसके तहत निर्धारित परिस्थितियों में जिला मजिस्ट्रेट किसी मामले के लिए किसी अन्य व्यक्ति को सहायक लोक अभियोजक नियुक्त कर सकेंगे। इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट को राज्य सरकार को 14 दिन का नोटिस देना होगा।
नई व्यवस्था का उद्देश्य उन परिस्थितियों में अभियोजन कार्य के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है, जब संबंधित मामले में सहायक लोक अभियोजक की नियुक्ति की जरूरत हो। यह नियुक्ति निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी।
कैबिनेट ने कई अन्य प्रस्तावों पर भी लगाई मुहर
बनबसा में हुई कैबिनेट बैठक में विजिलेंस और अभियोजन से जुड़े फैसलों के अलावा विकास, प्रशासन, शिक्षा, वित्त और बुनियादी ढांचे से संबंधित कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 24 प्रस्तावों पर विचार किया गया। इनमें वन भूमि हस्तांतरण मामलों की तकनीकी जांच के लिए परियोजना प्रबंधन इकाई (PMU) बनाने और छह पद स्वीकृत करने का फैसला भी शामिल है।
कैबिनेट ने 1873 के उत्तरी भारत नहर एवं जल निकास अधिनियम को हटाकर उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप नया सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक लाने का फैसला भी किया। इसके अलावा निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़े मानकों में बदलाव, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में वरिष्ठ एवं कनिष्ठ रेजिडेंट तथा डेमोंस्ट्रेटर के वेतन/स्टाइपेंड से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।










