रुद्रपुर में अडानी गैस का 13 रुपये का बिल जमा कराने के बहाने साइबर ठगों ने एक व्यक्ति और उसकी पत्नी के बैंक व क्रेडिट कार्ड की जानकारी हासिल कर 2.32 लाख रुपये निकाल लिए। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रुद्रपुर: अडानी गैस बिल जमा करने के नाम पर ट्रांजिट कैंप क्षेत्र निवासी नितिन कुमार साइबर ठगी का शिकार हो गए। ठगों ने वाट्सऐप संदेश के जरिए बिल कटने की चेतावनी दी और 13 रुपये का भुगतान कराने के बहाने बैंक व क्रेडिट कार्ड की जानकारी हासिल कर उनके और उनकी पत्नी के खातों से कुल 2.32 लाख रुपये निकाल लिए।
13 रुपये के बिल के नाम पर भेजा लिंक
वसुंधरा गुरुबक्स ग्रीन, गंगापुर रोड निवासी नितिन कुमार के अनुसार, 29 सितंबर को उनके वाट्सऐप नंबर पर अडानी गैस का बिल जमा करने से संबंधित संदेश आया। संदेश में बिल जमा नहीं करने पर गैस कनेक्शन काटने की चेतावनी दी गई थी। साथ ही बिल अधिकारी देवेश जोशी से बात करने के लिए एक मोबाइल नंबर भी दिया गया था।

नितिन ने दिए गए नंबर पर फोन किया तो देवेश ने बताया कि उनका बिल अभी जनरेट नहीं हुआ है। इसके बाद उसने एक लिंक भेजा और कहा कि इसके जरिए बिल जनरेट किया जा सकता है।
बैंक और क्रेडिट कार्ड की जानकारी कराई दर्ज
नितिन के मुताबिक, लिंक खोलने पर 13 रुपये का बिल दिखाई दिया। इसके बाद देवेश ने उनसे पहले 13 रुपये कार्ड के माध्यम से जमा करने को कहा। भुगतान की प्रक्रिया के दौरान नितिन ने लिंक पर अपने बैंक खाते और क्रेडिट कार्ड की जानकारी दर्ज कर दी।
उन्होंने अपनी पत्नी के बैंक खाते की जानकारी भी लिंक पर दर्ज की, हालांकि भुगतान नहीं हो सका। इसके बाद देवेश ने अगले दिन सुबह 7:30 बजे फोन करने की बात कहकर कॉल काट दी।
रात में खातों से कटने लगी रकम
आरोप है कि उसी रात नितिन के खातों से रकम कटने लगी। उनके बैंक खाते से 17 हजार रुपये, क्रेडिट कार्ड से दो लाख रुपये और उनकी पत्नी के बैंक खाते से 14 हजार रुपये निकाल लिए गए। इस तरह साइबर ठगों ने कुल 2.32 लाख रुपये की धोखाधड़ी की।
ठगी का पता चलने के बाद नितिन ने ट्रांजिट कैंप थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने पुलिस को ठगी से जुड़े मोबाइल नंबर और लिंक की जानकारी भी दी है।
मोबाइल नंबर और लिंक से ठगों की तलाश
एसएसआइ मुकेश मिश्रा ने बताया कि मामले में अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ प्राथमिकी पंजीकृत कर ली गई है। पुलिस उन खातों की भी जानकारी जुटा रही है, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर हुई है। साथ ही दिए गए मोबाइल नंबर और लिंक के आधार पर साइबर ठगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।











