बांग्लादेश के कुतुपालोंग शरणार्थी कैंप से भारत लाई जा रही म्यांमार की चार युवतियों को ग्वालियर जीआरपी ने बरामद किया। पुलिस ने दो म्यांमार नागरिकों को गिरफ्तार किया है। युवतियों में दो नाबालिग बताई जा रही हैं। शादी के नाम पर मानव तस्करी नेटवर्क की आशंका है।
ग्वालियर: बांग्लादेश के कुतुपालोंग शरणार्थी शिविर से कथित तौर पर अवैध तरीके से भारत लाई जा रही म्यांमार की चार युवतियों को ग्वालियर जीआरपी ने बरामद किया है। पुलिस ने मामले में म्यांमार के दो नागरिकों को गिरफ्तार किया है। बरामद युवतियों में दो के नाबालिग होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब कथित मानव तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।
स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस में संदिग्ध युवक की सूचना
मामले की शुरुआत जीआरपी कंट्रोल रूम भोपाल से मिली एक सूचना के बाद हुई। पुलिस को बताया गया था कि ट्रेन नंबर 12643 स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस के जनरल कोच में म्यांमार का एक संदिग्ध युवक यात्रा कर रहा है।
सूचना में यह भी बताया गया था कि युवक कथित तौर पर ऐसे नेटवर्क से जुड़ा है, जो म्यांमार की युवतियों को अवैध तरीके से भारत लाकर उनकी शादी कराने की व्यवस्था करता है। सूचना मिलने के बाद ग्वालियर जीआरपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ट्रेन में जांच अभियान शुरू किया।
मुबीन को ट्रेन से हिरासत में लिया गया
जीआरपी थाना प्रभारी दीपशिखा सिंह तोमर ने पुलिस टीम के साथ ट्रेन में चेकिंग अभियान चलाया। संदिग्ध व्यक्ति के हुलिए के आधार पर पुलिस ने मुबीन नाम के 25 वर्षीय युवक को हिरासत में लिया।
पुलिस के अनुसार, मुबीन म्यांमार का निवासी है और वर्तमान में हैदराबाद में रह रहा था। उसके साथ कुछ युवतियां भी मिलीं। प्रारंभिक पूछताछ और जांच के बाद पुलिस को मामले में दूसरे व्यक्ति की भूमिका के बारे में जानकारी मिली।
अलीगढ़ के किराए के मकान तक पहुंची पुलिस
पूछताछ के दौरान मुबीन ने पुलिस को बताया कि उसका साथी मोहम्मद हसन, जिसकी उम्र 35 वर्ष है और जो म्यांमार का निवासी है, कुछ युवतियों के साथ उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक किराए के मकान में ठहरा हुआ है।
पुलिस ने मिली जानकारी की पुष्टि करने के बाद अलीगढ़ में दबिश दी। वहां से मोहम्मद हसन के कब्जे से युवतियों को बरामद किया गया। पुलिस के मुताबिक, पूरी कार्रवाई में कुल चार युवतियां दस्तयाब की गईं।
जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि बरामद युवतियों में से दो नाबालिग हो सकती हैं। पुलिस ने नाबालिग युवतियों को नियमानुसार संरक्षण में रखा है और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पूछताछ में भाषा बनी चुनौती
पुलिस को युवतियों से पूछताछ के दौरान भाषा संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ा। युवतियों को केवल रोहिंग्या और स्थानीय भाषा का ज्ञान होने की जानकारी सामने आई। भाषा की समस्या दूर करने के लिए पुलिस ने गूगल ट्रांसलेटर और एक द्विभाषी व्यक्ति की मदद ली। इसके जरिए युवतियों से बातचीत की गई और उनके बयान दर्ज किए गए।
पुलिस ने पूछताछ के दौरान युवतियों के भारत पहुंचने के रास्ते और उन्हें यहां लाए जाने की परिस्थितियों के बारे में जानकारी जुटाई।
कुतुपालोंग कैंप से भारत लाए जाने का दावा
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में सामने आया कि युवतियों को बांग्लादेश के कुतुपालोंग रिफ्यूजी कैंप से भारत लाया गया था। कथित तौर पर उनके माता-पिता की सहमति का हवाला देते हुए उन्हें नदी और पहाड़ों के दुर्गम रास्तों से भारतीय सीमा में अवैध रूप से दाखिल कराया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि युवतियों को भारत लाने के बाद उनकी शादी जम्मू और श्रीनगर में कराने की योजना बनाई गई थी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस योजना में और कौन-कौन लोग शामिल थे और युवतियों को आगे कहां ले जाने की तैयारी थी।
मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क की आशंका
पुलिस को आशंका है कि यह मामला मानव तस्करी के एक संगठित नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। पुलिस के मुताबिक, यह नेटवर्क कथित तौर पर शरणार्थी शिविरों से युवतियों को बहला-फुसलाकर या अन्य तरीकों से भारत लाने और शादी के नाम पर उनकी तस्करी करने का काम कर सकता है।
हालांकि, पुलिस की जांच अभी जारी है और नेटवर्क की पूरी संरचना तथा इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस के मुताबिक, मामले में पकड़े गए दोनों आरोपी म्यांमार के नागरिक हैं। मुबीन को ट्रेन से हिरासत में लिया गया था, जबकि मोहम्मद हसन को अलीगढ़ के किराए के मकान से युवतियों के साथ पकड़ा गया।
सभी 6 विदेशी नागरिक पुलिस की हिरासत में
जीआरपी ने मामले में कुल छह विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। इनमें दो म्यांमार के आरोपी नागरिक और चार युवतियां शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, पकड़े गए सभी छह विदेशी नागरिक भारत में अवैध रूप से प्रवेश कर रह रहे थे।
नाबालिग युवतियों की स्थिति को देखते हुए उन्हें नियमानुसार संरक्षण में रखा गया है। पुलिस ने मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
दस्तावेजों और पूछताछ के आधार पर जांच जारी
जीआरपी अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों से मिले दस्तावेजों और पूछताछ के दौरान सामने आई जानकारियों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। पुलिस का फोकस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और उनकी भूमिका का पता लगाने पर है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि युवतियों को भारत लाने की पूरी प्रक्रिया में किन लोगों ने मदद की, उन्हें किन रास्तों से भारतीय सीमा में प्रवेश कराया गया और जम्मू तथा श्रीनगर तक पहुंचाने की योजना में कौन-कौन शामिल था।
शादी के नाम पर तस्करी के आरोप की जांच
मामले का सबसे अहम पहलू युवतियों को शादी के नाम पर भारत लाए जाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, युवतियों को बांग्लादेश के कुतुपालोंग शरणार्थी शिविर से भारत लाकर आगे उनकी शादी कराने की योजना थी।
जांच में पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि युवतियों के परिवारों की वास्तविक सहमति थी या नहीं और उन्हें भारत लाने के लिए किन परिस्थितियों का इस्तेमाल किया गया। इन बिंदुओं की पुष्टि पुलिस की विस्तृत जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की जाएगी।
फिलहाल ग्वालियर जीआरपी ने चारों युवतियों को बरामद कर लिया है और मामले में दो म्यांमार नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ और बरामद दस्तावेजों के आधार पर कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
मामला अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर कथित अवैध प्रवेश, मानव तस्करी और नाबालिग युवतियों से जुड़ा होने के कारण जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पुलिस की अगली कार्रवाई इस बात पर केंद्रित रहेगी कि युवतियों को भारत लाने और उनकी कथित शादी कराने की योजना में कौन-कौन लोग शामिल थे।










