सिएरा लियोन में अवैध मछली पकड़ने का संकट, विदेशी ट्रॉलरों पर स्थानीय मछुआरों की आजीविका छीनने का आरोप

सिएरा लियोन के मछुआरों ने विदेशी ट्रॉलरों पर अवैध मछली पकड़ने और जाल काटने का आरोप। जानिए कैसे यह संकट स्थानीय अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर रहा

सिएरा लियोन के तटीय मछुआरे विदेशी ट्रॉलरों पर अवैध मछली पकड़ने और उनके जाल काटने का आरोप लगा रहे हैं। स्थानीय समुदाय का कहना है कि इससे उनकी आय, आजीविका और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ रहा है।

फ्रीटाउन: पश्चिम अफ्रीका के तटीय देश सिएरा लियोन में अवैध मछली पकड़ने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। स्थानीय मछुआरों का आरोप है कि विदेशी औद्योगिक ट्रॉलर प्रतिबंधित तटीय क्षेत्रों में घुसकर न केवल बड़े पैमाने पर मछलियां पकड़ रहे हैं, बल्कि कई मामलों में उनके पारंपरिक जाल भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे हजारों परिवारों की आय प्रभावित हो रही है और समुद्री संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

स्थानीय समुदायों का कहना है कि यह केवल आर्थिक संकट नहीं, बल्कि उनकी पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक जीवनशैली और खाद्य सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुका है।

सदियों पुरानी परंपरा पर संकट

सिएरा लियोन की राजधानी फ्रीटाउन से लगभग 120 किलोमीटर दक्षिण स्थित शेरबो द्वीप पर आज भी पारंपरिक तरीके से समुद्र किनारे जाल डालकर मछली पकड़ने की परंपरा जीवित है। कई ग्रामीण मिलकर रस्सियों की मदद से भारी जाल समुद्र से किनारे तक खींचते हैं, जिसमें स्नैपर, मैकेरल, बराकुडा और अन्य कई समुद्री प्रजातियां फंसती हैं।

लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मछलियों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई है। उनका मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण विदेशी औद्योगिक ट्रॉलरों की बढ़ती गतिविधियां हैं।

मछुआरों का आरोप, प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसते हैं विदेशी ट्रॉलर

स्थानीय मछुआरों का दावा है कि सरकार ने तट से सात समुद्री मील तक का क्षेत्र छोटे मछुआरों के लिए सुरक्षित घोषित किया है, जहां बड़े व्यावसायिक ट्रॉलरों के प्रवेश पर रोक है। इसके बावजूद विदेशी जहाज रात के समय इस क्षेत्र में प्रवेश कर मछली पकड़ते हैं।

कई मछुआरों का आरोप है कि रात के अंधेरे में उनके जाल भी काट दिए जाते हैं। उनका कहना है कि एक जाल को बदलने में लगभग 250 अमेरिकी डॉलर तक का खर्च आता है, जो स्थानीय परिवारों के लिए बहुत बड़ी राशि है। लगातार होने वाले इस नुकसान से उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो रही है।

मछलियों की पकड़ में आई भारी गिरावट

सिएरा लियोन फिशरमेन यूनियन के अनुसार, हाल के वर्षों में स्थानीय मछुआरों की औसत पकड़ में लगभग 40 प्रतिशत तक की कमी आई है। संगठन का कहना है कि समुद्र में पहले जितनी मछलियां आसानी से मिल जाती थीं, अब उसके लिए कई घंटे अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक व्यावसायिक मछली पकड़ने से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव बढ़ता है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक जारी रही तो मछलियों की कई प्रजातियों के संरक्षण पर भी असर पड़ सकता है।

पश्चिम अफ्रीका बना अवैध मछली पकड़ने का केंद्र

2024 की एक वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में अवैध या बिना लाइसेंस के पकड़ी जाने वाली मछलियों का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम अफ्रीका के समुद्री क्षेत्र से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस कारण क्षेत्र के देशों को हर वर्ष लगभग 10 अरब अमेरिकी डॉलर के संभावित राजस्व का नुकसान होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर केवल सरकारी आय तक सीमित नहीं है। लाखों लोगों की खाद्य सुरक्षा, रोजगार और तटीय अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित होती है। समुद्री संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण भविष्य में यह संकट और गंभीर हो सकता है।

विदेशी ट्रॉलरों में चीनी जहाजों की संख्या सबसे अधिक होने का दावा

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन एनवायरनमेंटल जस्टिस फाउंडेशन (EJF) का कहना है कि सिएरा लियोन और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में सक्रिय विदेशी ट्रॉलरों में बड़ी संख्या चीन से जुड़े जहाजों की है।

हालांकि संगठन यह भी स्वीकार करता है कि अतीत में दक्षिण कोरिया, ताइवान और कुछ यूरोपीय देशों के जहाजों पर भी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन वर्तमान में क्षेत्र में सबसे अधिक सक्रियता चीनी ट्रॉलरों की बताई जाती है।

भ्रष्टाचार के आरोप और सरकारी प्रतिक्रिया

स्थानीय मछुआरों का आरोप है कि उनकी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। उनका कहना है कि कई बार अधिकारियों को अवैध गतिविधियों की जानकारी देने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते।

दूसरी ओर सिएरा लियोन के मत्स्य मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में अवैध मछली पकड़ने पर नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए गए हैं। सभी विदेशी जहाजों के लिए ट्रांसपोंडर सिस्टम अनिवार्य किया गया है, जिससे उनकी समुद्री गतिविधियों की निगरानी की जा सके। साथ ही निरीक्षण व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।

हालांकि समुद्री निगरानी से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के कई हिस्सों में जहाजों द्वारा ट्रांसपोंडर बंद करने या सिग्नल छिपाने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे में केवल तकनीकी निगरानी पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।

खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण दोनों के लिए चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध मछली पकड़ना केवल आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और समुद्री जैव विविधता के लिए भी गंभीर खतरा है। अत्यधिक दोहन से मछलियों की आबादी घटती है, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित होता है और छोटे मछुआरों की आजीविका प्रभावित होती है।

संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं लंबे समय से टिकाऊ मत्स्य प्रबंधन, समुद्री निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर देती रही हैं। उनका मानना है कि समुद्री संसाधनों की सुरक्षा के लिए सख्त कानूनों के साथ-साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन की भी आवश्यकता है।

स्थानीय समुदायों की मांग

सिएरा लियोन के तटीय समुदाय चाहते हैं कि सरकार समुद्री सीमा की निगरानी और सख्त करे, अवैध मछली पकड़ने में शामिल जहाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे और छोटे मछुआरों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करे। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में लाखों लोगों की आजीविका और क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा गंभीर संकट में पड़ सकती है।

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