उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में प्रसिद्ध तुंगनाथ ट्रैक पर रविवार देर शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया। गणेश मंदिर के पास ट्रैक पर चल रही एक महिला अचानक गहरी खाई में जा गिरी। महिला के खाई में गिरने की सूचना मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र तक पहुंची, जिसके बाद आपदा राहत और बचाव दल को मौके के लिए रवाना किया गया। खाई काफी गहरी और इलाका दुर्गम होने के कारण रात में रेस्क्यू अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण रहा। टीमों ने देर रात तक महिला की तलाश की, लेकिन अंधेरा और मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के कारण करीब 12:30 बजे अभियान रोकना पड़ा। सोमवार सुबह रोशनी होने के बाद फिर से सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया और महिला का शव बरामद कर लिया गया।
जानकारी के अनुसार, हादसा रविवार देर शाम तुंगनाथ ट्रैक पर गणेश मंदिर के आसपास हुआ। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार के मुताबिक, महिला के खाई में गिरने की सूचना शाम करीब 6:21 बजे जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को मिली थी। सूचना मिलते ही राहत और बचाव टीमों को घटनास्थल की ओर रवाना किया गया। चूंकि जिस स्थान पर महिला के गिरने की सूचना थी, वहां गहरी खाई और कठिन ढलान है, इसलिए रेस्क्यू टीमों को काफी सावधानी के साथ अभियान चलाना पड़ा।
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसडीआरएफ अगस्त्यमुनि, डीडीआरएफ ऊखीमठ, आपदा मित्र और पुलिस बल को सर्च एवं रेस्क्यू अभियान में लगाया गया। टीमों ने रात में ही खाई के आसपास के हिस्सों में खोजबीन शुरू कर दी थी। अंधेरे के बावजूद बचावकर्मियों ने उपलब्ध संसाधनों के साथ महिला की तलाश की। खाई की गहराई और पथरीला इलाका होने के कारण नीचे उतरकर तलाश करना आसान नहीं था। टीमों ने काफी देर तक अभियान चलाया, लेकिन रात में महिला का पता नहीं चल सका।
रात बढ़ने के साथ इलाके में अंधेरा और अधिक गहरा हो गया। पहाड़ी क्षेत्र में रात के समय खाई के भीतर उतरना बचाव दल के लिए भी जोखिम भरा हो सकता है। इसी वजह से करीब 12:30 बजे रात में सर्च अभियान को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया गया। टीमों को सुबह दोबारा अभियान शुरू करने के निर्देश दिए गए। इस दौरान पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर मौजूद रहीं और सुबह होते ही दोबारा तलाशी शुरू करने की तैयारी की गई।
सोमवार सुबह पर्याप्त रोशनी होने के बाद रेस्क्यू टीमों ने एक बार फिर खाई में उतरकर तलाश शुरू की। रात में जहां-जहां खोजबीन की गई थी, वहां दोबारा जांच की गई। टीमों ने खाई के अलग-अलग हिस्सों और आसपास के ढलानों को खंगाला। काफी मशक्कत के बाद महिला का शव बरामद किया गया। इसके बाद शव को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई।
महिला के खाई में गिरने की सूचना मिलने के बाद से ही उसकी पहचान को लेकर भी जानकारी जुटाई जा रही थी। शुरुआती रिपोर्ट में महिला की पहचान और उसके संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में पुलिस और प्रशासन की ओर से घटनास्थल पर मिले सामान तथा अन्य माध्यमों के जरिए महिला की पहचान करने की कोशिश की गई। शव बरामद होने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
तुंगनाथ ट्रैक उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और ट्रेकिंग मार्गों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। पहाड़ी रास्तों पर कई जगह रास्ते संकरे हैं और किनारे गहरी ढलान या खाई होती है। ऐसे स्थानों पर थोड़ी सी असावधानी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी ट्रैक पर सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है।
गणेश मंदिर के आसपास जिस स्थान पर महिला के गिरने की सूचना मिली, वहां खाई काफी गहरी होने के कारण बचाव अभियान मुश्किल हो गया था। रात के समय दृश्यता कम होने से टीमों के लिए नीचे तक पहुंचना और आसपास के हिस्सों की पूरी तरह जांच करना कठिन था। यही कारण रहा कि शुरुआती घंटों में महिला का पता नहीं लगाया जा सका। सुबह दोबारा अभियान शुरू होने के बाद रेस्क्यू टीमों को तलाशी में सफलता मिली।
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन ने भी पूरे अभियान पर नजर रखी। आपदा प्रबंधन विभाग ने अलग-अलग टीमों के बीच समन्वय किया। पुलिस बल को भी मौके पर लगाया गया, ताकि रेस्क्यू के साथ-साथ घटनास्थल को सुरक्षित रखा जा सके। ऐसे दुर्गम इलाकों में बचाव अभियान के दौरान टीमों के लिए खुद की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होती है, इसलिए रात के समय अभियान रोकने का फैसला किया गया।
फिलहाल हादसे के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। यह स्पष्ट नहीं है कि महिला किस वजह से ट्रैक से नीचे गिरी। पुलिस और प्रशासन घटनास्थल की परिस्थितियों की जानकारी जुटा सकते हैं। महिला के साथ कोई अन्य व्यक्ति था या वह अकेले ट्रैक पर चल रही थी, इसकी जानकारी भी जांच के बाद सामने आ सकती है। घटना से जुड़े अन्य पहलुओं को भी पुलिस देखा सकती है।
शव बरामद होने के बाद उसे नियमानुसार पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया की जा सकती है। पोस्टमार्टम के बाद मौत की चिकित्सकीय पुष्टि होगी और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यदि महिला की पहचान और उसके परिजनों की जानकारी मिलती है तो प्रशासन की ओर से परिवार को घटना की सूचना दी जाएगी।
हादसे की खबर सामने आने के बाद तुंगनाथ ट्रैक पर मौजूद अन्य यात्रियों और श्रद्धालुओं में भी चिंता का माहौल बन गया। पहाड़ों में ट्रेकिंग के दौरान मौसम, रास्ते की स्थिति और आसपास की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी होता है। खासकर ऐसे स्थानों पर जहां एक तरफ पहाड़ और दूसरी तरफ गहरी खाई हो, वहां रास्ते के किनारे से दूरी बनाए रखना जरूरी माना जाता है।
इस हादसे में राहत और बचाव दलों ने सूचना मिलते ही अभियान शुरू किया। रात में करीब 12:30 बजे तक लगातार तलाश की गई और सुबह दोबारा अभियान शुरू किया गया। हालांकि महिला को जीवित बचाने की कोशिश सफल नहीं हो सकी और बाद में उसका शव बरामद हुआ। हादसे ने एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
तुंगनाथ क्षेत्र में इस तरह के दुर्गम स्थानों पर आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू टीमों की मौजूदगी महत्वपूर्ण रहती है। किसी भी दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद समय पर टीम पहुंचने से राहत अभियान जल्दी शुरू हो सकता है। इस मामले में भी एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, आपदा मित्र और पुलिस की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं और रात से लेकर सुबह तक अभियान चलाया गया।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन की ओर से घटना से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। महिला की पहचान, हादसे की परिस्थितियां और वह किस तरह खाई में गिरी, इन सभी पहलुओं की जानकारी आगे की जांच में सामने आ सकती है। शव बरामद होने के बाद अब आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
तुंगनाथ ट्रैक पर हुए इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में ट्रेकिंग के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है। खासकर शाम के बाद ट्रैक पर आवाजाही करने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। संकरे रास्तों, गहरी ढलानों और खाई वाले हिस्सों में छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है। इस घटना में रात के अंधेरे के कारण रेस्क्यू अभियान भी प्रभावित हुआ और सुबह दोबारा तलाश शुरू होने के बाद महिला का शव बरामद किया जा सका।











