ब्रिटेन सरकार ने स्पष्ट किया है कि जेफ्री एपस्टीन की कथित गतिविधियों पर सार्वजनिक जांच शुरू करने का फिलहाल कोई सक्रिय निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि सरकार पीड़ितों से मुलाकात और संभावित कानूनी विकल्पों की समीक्षा जारी रखने की बात कह रही है।
लंदन: ब्रिटेन में दोषी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मामलों की संभावित सार्वजनिक जांच (Public Inquiry) को लेकर सरकार के भीतर अलग-अलग संकेत सामने आए हैं। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम के कार्यालय, डाउनिंग स्ट्रीट ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल सरकार एपस्टीन की ब्रिटेन में कथित गतिविधियों की सार्वजनिक जांच शुरू करने पर सक्रिय रूप से विचार नहीं कर रही है। हालांकि, सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि पीड़ितों की बात सुनी जाएगी और उपलब्ध कानूनी विकल्पों की समीक्षा जारी है।
यह स्थिति तब सामने आई जब विक्टिम्स मिनिस्टर एलेक्स डेविस-जोन्स ने एक टेलीविजन इंटरव्यू में कहा कि सरकार संभावित जांच सहित विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है। उनके बयान के बाद सरकार के रुख को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
सार्वजनिक जांच पर सरकार के भीतर अलग-अलग संकेत
एलेक्स डेविस-जोन्स ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम और कैबिनेट सचिव डेम एंटोनिया रोमियो के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की है। उनके अनुसार सरकार यह समीक्षा कर रही है कि कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर कौन-कौन से कदम उठाए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और पीड़ितों से मुलाकात करने पर सहमत हुए हैं। उनका मानना है कि पीड़ितों को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संस्थागत सुधारों पर भी विचार होना चाहिए।
हालांकि, डाउनिंग स्ट्रीट की ओर से बाद में स्पष्ट किया गया कि इस समय सार्वजनिक जांच शुरू करने पर कोई सक्रिय निर्णय प्रक्रिया नहीं चल रही है। इससे सरकार के भीतर संदेशों में अंतर दिखाई दिया।
पीड़ितों से मुलाकात की संभावना
ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम भविष्य में एपस्टीन के कथित पीड़ितों से मुलाकात करने पर विचार कर रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने पीड़ितों की बात सुनने और न्याय व्यवस्था में सुधार के लिए प्रतिबद्धता जताई थी।
सरकार का कहना है कि पीड़ितों के अनुभवों को समझना और न्याय प्रणाली में उनकी भागीदारी बढ़ाना प्राथमिकता का हिस्सा है। हालांकि अभी तक मुलाकात की तारीख या औपचारिक कार्यक्रम की घोषणा नहीं की गई है।
मंत्री का पहले इस्तीफा, फिर सरकार में वापसी
एलेक्स डेविस-जोन्स इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर की सरकार में विक्टिम्स मिनिस्टर थीं। उन्होंने मई में अपने पद से इस्तीफा देते हुए आरोप लगाया था कि सरकार एपस्टीन से जुड़े पीड़ितों की चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दे रही है।
बाद में एंडी बर्नहैम के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें दोबारा इसी पद पर नियुक्त किया गया। उन्होंने कहा कि नई सरकार में शामिल होने से पहले उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि पीड़ितों से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा।

मोहम्मद अल फायद मामले पर भी चर्चा
एपस्टीन मामले के साथ-साथ सरकार के सामने पूर्व हैरोड्स मालिक मोहम्मद अल फायद से जुड़े आरोप भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। डेविस-जोन्स ने संकेत दिया कि यदि किसी व्यापक जांच की संभावना बनती है तो उसमें इन मामलों को भी शामिल किया जा सकता है। सरकार फिलहाल यह आकलन कर रही है कि अलग-अलग मामलों की जांच अलग-अलग हो या व्यापक संस्थागत समीक्षा के तहत एक साथ की जाए।
संस्थागत जवाबदेही की मांग
ब्रिटेन में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मुद्दे पर काम करने वाले कई सामाजिक संगठनों और लेबर पार्टी के कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने सरकार को एक विस्तृत दस्तावेज सौंपा है। इसमें सुझाव दिया गया है कि प्रभावशाली व्यक्तियों पर लगे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र सार्वजनिक जांच आयोग बनाया जाए।
दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि ऐसी जांच का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत मामलों की समीक्षा नहीं, बल्कि यह समझना होना चाहिए कि प्रभावशाली लोग वर्षों तक कथित रूप से बिना जवाबदेही के कैसे काम करते रहे।
ब्रिटेन में एपस्टीन की गतिविधियों पर उठे सवाल
सुझाव पत्र में विशेष रूप से यह मांग की गई है कि जेफ्री एपस्टीन की ब्रिटेन में गतिविधियों की विस्तृत जांच की जाए। इसमें यह भी सवाल उठाया गया है कि वह निजी विमान के जरिए ब्रिटेन के विभिन्न स्थानों, जिनमें कुछ सैन्य ठिकानों का भी उल्लेख किया गया है, तक कैसे पहुंचते रहे।
संगठनों का कहना है कि यदि किसी स्तर पर प्रशासनिक या संस्थागत चूक हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
व्यापक सुधारों पर सरकार का जोर
एलेक्स डेविस-जोन्स ने कहा कि सरकार केवल किसी एक मामले तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पीड़ितों के अधिकारों, न्याय प्रणाली की कार्यप्रणाली और संस्थागत जवाबदेही से जुड़े व्यापक सुधारों पर भी काम करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सभी पीड़ितों को समान अवसर और न्याय मिलना चाहिए तथा भविष्य में ऐसे मामलों के निपटारे के लिए अधिक प्रभावी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
राजनीतिक और कानूनी बहस जारी
ब्रिटेन में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों का मानना है कि यदि सार्वजनिक जांच होती है तो इससे संस्थागत कमियों की पहचान करने और जवाबदेही तय करने में मदद मिल सकती है।
दूसरी ओर, सरकार फिलहाल किसी औपचारिक सार्वजनिक जांच की घोषणा से बचती दिखाई दे रही है और पहले उपलब्ध कानूनी विकल्पों तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में पीड़ितों के साथ प्रस्तावित बैठकों और सरकार की आंतरिक समीक्षा के आधार पर इस मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।











