JPSC Protest: छात्रों से बातचीत को आगे आई झारखंड सरकार, SDO लेकर पहुंचे वार्ता का प्रस्ताव

JPSC Protest के बीच झारखंड सरकार ने छात्रों से वार्ता की पहल की। SDO और ADM प्रस्ताव लेकर पहुंचे, लेकिन छात्रों ने CM से सीधे संवाद की मांग की।

रांची में JPSC-JSSC भर्ती अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत के लिए झारखंड सरकार ने पहल की है। SDO और ADM ने वार्ता का प्रस्ताव दिया, लेकिन छात्रों ने इसे ठुकराते हुए मुख्यमंत्री से धरना स्थल पर आने की मांग की।

रांची: JPSC Protest के बीच झारखंड सरकार ने आंदोलनरत छात्रों से बातचीत की दिशा में पहल की है। जयपाल सिंह स्टेडियम पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों को वार्ता का प्रस्ताव दिया, जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार पेपर लीक और भर्ती से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है।

आंदोलनरत छात्रों से बातचीत के लिए सरकार की पहल

झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने बातचीत की पहल की है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में धरने पर बैठे छात्रों से वार्ता के लिए प्रशासन की ओर से अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) रजत और एडीएम लॉ एंड ऑर्डर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों को बताया कि सरकार उनकी मांगों पर चर्चा करना चाहती है और इसके लिए पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बनाकर शाम चार बजे सर्किट हाउस में बैठक करने का प्रस्ताव दिया गया है। सरकार का कहना है कि बातचीत के माध्यम से छात्रों की समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।

छात्रों ने वार्ता का प्रस्ताव किया खारिज

प्रशासन की ओर से दिए गए प्रस्ताव को आंदोलनरत छात्रों ने स्वीकार नहीं किया। छात्रों का कहना था कि बातचीत बंद कमरे में नहीं, बल्कि मीडिया की मौजूदगी में होनी चाहिए ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे। उन्होंने यह भी मांग की कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं धरना स्थल पर आकर छात्रों से बातचीत करें। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार ने आंदोलन शुरू होने के कई दिनों बाद संवाद की पहल की है, इसलिए अब वे स्पष्ट और सार्वजनिक आश्वासन चाहते हैं। छात्रों ने दोहराया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

मुख्यमंत्री बोले- समाधान हमारी प्राथमिकता

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मुद्दे पर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि युवाओं की चिंताएं सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की समस्या केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई राज्यों में यह गंभीर चुनौती बन चुकी है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य सरकार इस मामले में पूरी गंभीरता के साथ कार्रवाई कर रही है और संबंधित एजेंसियां लगातार जांच में जुटी हुई हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में कार्रवाई भी की गई है और दोषियों को जेल भेजा गया है, लेकिन सरकार का उद्देश्य केवल जांच करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

सरकार ने छात्रों को दिया संवाद का भरोसा

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार संवाद के लिए हमेशा तैयार है और छात्रों की हर मांग तथा सुझाव को गंभीरता से सुना जाएगा। उन्होंने सभी अभ्यर्थियों से अपील की कि वे अपनी समस्याएं और सुझाव सरकार के समक्ष रखें, ताकि उनका उचित समाधान निकाला जा सके। दूसरी ओर, आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था सुनिश्चित होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल सरकार और छात्रों के बीच बातचीत को लेकर गतिरोध बना हुआ है और सभी की नजरें अगले घटनाक्रम पर टिकी हैं।

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