दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले की कथित बड़ी साजिश में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश और न्यायिक अनुशासन के चलते फिलहाल राहत नहीं दी जा सकती।
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले की कथित बड़ी साजिश से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने कहा कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेशों और न्यायिक अनुशासन से बंधी है।
हाई कोर्ट ने जमानत क्यों खारिज की?
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की पीठ ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया था। उस आदेश में जमानत के लिए एक साल बीतने या संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने जैसी परिस्थितियों का उल्लेख था।
हाई कोर्ट के मुताबिक, जिन परिस्थितियों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने आगे जमानत पर विचार की गुंजाइश बताई थी, वे अभी पूरी नहीं हुई हैं। ऐसे में हाई कोर्ट के स्तर पर जमानत देना सुप्रीम कोर्ट के आदेश में बदलाव के समान होगा।
अदालत ने यह भी कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से तय न्यायिक अनुशासन का पालन करने के लिए बाध्य है। दोनों आरोपियों को कुछ अन्य सह-आरोपियों को मिली जमानत के आधार पर समान राहत भी नहीं दी जा सकती।
दोनों के खिलाफ किस मामले में कार्रवाई हुई?
उमर खालिद और शरजील इमाम फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े कथित ‘बड़ी साजिश’ के मामले में आरोपी हैं। उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल से जुड़ी कार्रवाई के तहत हुई। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में हुए प्रदर्शनों के बीच ऐसी गतिविधियां हुईं, जिनका संबंध बाद में हुई हिंसा से था।
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। हालांकि, इस मामले में आरोपों और अभियोजन की थ्योरी का अंतिम न्यायिक निर्धारण अभी ट्रायल में होना है।
सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश का क्या असर?
जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया था। इसके बाद दोनों ने दोबारा दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट ने अब सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को ध्यान में रखते हुए उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
हाई कोर्ट के सामने यह दलील भी रखी गई थी कि मामले में कुछ अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और इसलिए उमर खालिद तथा शरजील इमाम को भी समान आधार पर राहत मिलनी चाहिए। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने माना कि जिन सह-आरोपियों को जमानत मिली है, उनके मामलों की परिस्थितियां और आरोपों की प्रकृति अलग हो सकती है। इसलिए केवल दूसरे आरोपियों को मिली राहत के आधार पर दोनों को स्वतः जमानत नहीं दी जा सकती।
2025 में दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
इससे पहले सितंबर 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम समेत कुछ आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर विस्तृत फैसला दिया था। उस समय अदालत ने मामले में उपलब्ध सामग्री की प्रारंभिक स्थिति पर विचार किया था और कहा था कि जमानत के स्तर पर उपलब्ध साक्ष्यों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि उस चरण पर साक्ष्यों की अंतिम सत्यता का निर्धारण करना ट्रायल कोर्ट का विषय होगा। यानी जमानत पर की गई टिप्पणियां मामले के अंतिम गुण-दोष पर फैसला नहीं मानी जातीं।
उमर खालिद की तीसरी जमानत याचिका
उमर खालिद की ओर से 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट में फिर जमानत की मांग की गई थी। जुलाई 2026 में हाई कोर्ट ने उनकी नई याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, यह उनकी गिरफ्तारी के बाद तीसरी नियमित जमानत याचिका थी।
31 जुलाई 2026 के आदेश में हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया था। अदालत ने इस मामले को शरजील इमाम की अपील के साथ सूचीबद्ध किया था।
इसके बाद 30 सितंबर को दोनों मामलों पर फैसला आया और अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया।
शरजील इमाम पर क्या आरोप हैं?
शरजील इमाम भी 2020 दिल्ली दंगा मामले की कथित बड़ी साजिश से जुड़े UAPA मामले में आरोपी हैं। अभियोजन पक्ष ने उन पर प्रदर्शन और कथित चक्का जाम से संबंधित गतिविधियों के जरिए व्यापक साजिश में भूमिका निभाने का आरोप लगाया है।
शरजील इमाम को 25 अगस्त 2020 को गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ दर्ज मामले में उनके भाषणों और विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी गतिविधियों को अभियोजन पक्ष ने साजिश के आरोपों से जोड़ा है। हालांकि, इन आरोपों का अंतिम फैसला ट्रायल में होना है।
उमर खालिद कब गिरफ्तार हुए थे?
उमर खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ भी UAPA सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया। अभियोजन पक्ष ने उन्हें कथित बड़ी साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला आरोपी बताया है।
वहीं, बचाव पक्ष लगातार आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की व्याख्या को चुनौती देता रहा है। अदालतों में दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया गया है, लेकिन मामले का अंतिम निष्कर्ष ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही तय होगा।
अंतरिम जमानत भी मिल चुकी है
नियमित जमानत से अलग, उमर खालिद को 2026 में सीमित अवधि के लिए अंतरिम जमानत भी मिल चुकी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें अपनी बीमार मां की सर्जरी के दौरान उनकी देखभाल करने और अपने चाचा के चेहलुम में शामिल होने के लिए तीन दिन की अंतरिम जमानत दी थी।
यह राहत केवल एक निर्धारित अवधि और विशेष उद्देश्य के लिए थी। इसे नियमित जमानत के रूप में नहीं देखा गया।
अब आगे क्या होगा?
दिल्ली हाई कोर्ट के 30 सितंबर के फैसले के बाद उमर खालिद और शरजील इमाम की नियमित जमानत का मामला फिलहाल अदालत के इस आदेश के तहत आगे बढ़ेगा। दोनों के खिलाफ 2020 दिल्ली दंगा मामले की कथित बड़ी साजिश से जुड़ी कार्यवाही जारी है।
अदालत ने जमानत पर फैसला देते समय सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश और न्यायिक अनुशासन को प्रमुख आधार बनाया है। वहीं, मामले के आरोपों की अंतिम पुष्टि या खंडन ट्रायल के दौरान साक्ष्यों और गवाहों की जांच के बाद होगा।











