केंद्र सरकार द्वारा 6 जून को लॉन्च किए गए UMEED पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की शुक्रवार को अंतिम तिथि है, लेकिन अभी तक देशभर के सबसे अधिक वक्फ ज़मीन वाले पांच राज्यों में से चार में केवल लगभग एक तिहाई से लेकर दसवें हिस्से तक ही संपत्तियों का विवरण अपलोड हो पाया है।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा 6 जून को लॉन्च किए गए UMEED पोर्टल पर देश भर की वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की आज (शुक्रवार) अंतिम तारीख है। लेकिन सरकार के सामने बड़ी चुनौती यह है कि अभी तक देश की आधी से भी कम वक्फ संपत्तियों का डेटा ही पोर्टल पर अपलोड हो पाया है। इस स्थिति को लेकर वक्फ बोर्डों और मुस्लिम संगठनों में गहरी चिंता देखी जा रही है।
सरकारी आंकड़ों और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अनुमानित 8.8 लाख से अधिक वक्फ संपत्तियां हैं। इनमें से बड़ी संख्या अभी भी डिजिटल रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बन सकी है। UMEED पोर्टल का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का एकीकृत और पारदर्शी डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है, ताकि विवादों में कमी आए और प्रबंधन अधिक प्रभावी हो सके।
किन राज्यों में कितना पंजीकरण हुआ?
देश के जिन राज्यों में वक्फ संपत्तियां सबसे अधिक हैं, वहां स्थिति सबसे चिंताजनक बनी हुई है।
- उत्तर प्रदेश में लगभग 1.4 लाख वक्फ संपत्तियां हैं, लेकिन गुरुवार तक केवल 35% संपत्तियां ही पोर्टल पर रजिस्टर हो सकी थीं।
- पश्चिम बंगाल में जहां करीब 80,480 संपत्तियां हैं, वहां अब तक सिर्फ 12% का पंजीकरण हुआ।
- कर्नाटक और तमिलनाडु में यह आंकड़ा लगभग 10% तक ही सीमित है।
इसके विपरीत पंजाब में लगभग 80% पंजीकरण होने का दावा किया गया है, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि वहां व्यक्तिगत संपत्तियों के बजाय “वक्फ एस्टेट्स” को एक इकाई के रूप में रजिस्टर किया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया तेज हो गई।

पंजीकरण में देरी के मुख्य कारण
वक्फ बोर्डों और मुतवल्लियों (देखभाल करने वालों) का कहना है कि कई वक्फ संपत्तियां सदियों पुरानी हैं, जिनके दस्तावेज़ खोजना बेहद कठिन है। इसके अलावा:
- अलग-अलग राज्यों में भूमि माप की अलग-अलग इकाइयां,
- कई मामलों में सीमा विवाद,
- डिजिटल संसाधनों और तकनीकी स्टाफ की कमी,
- और कई जगहों पर सर्वर से जुड़ी समस्याएं
पंजीकरण की गति को धीमा कर रही हैं। हाल ही में लोकसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा था कि सर्वर डाउन रहने के कारण यूपी में लगभग 70% वक्फ संपत्तियां अब भी रजिस्टर नहीं हो पाई हैं।
अगर आज तक पंजीकरण नहीं हुआ तो क्या होगा?
नियमों के अनुसार, यदि आज की समय-सीमा तक कोई वक्फ संपत्ति UMEED पोर्टल पर रजिस्टर नहीं हो पाती है, तो संबंधित वक्फ बोर्ड या मुतवल्ली अपने राज्य के वक्फ ट्रिब्यूनल से संपर्क कर सकते हैं। ट्रिब्यूनल के पास व्यक्तिगत मामलों में समय-सीमा बढ़ाने का अधिकार है। हालांकि, वक्फ बोर्डों को आशंका है कि यदि बड़ी संख्या में मामले ट्रिब्यूनल पहुंचे, तो वे अनुरोधों से अत्यधिक दबाव में आ जाएंगे, जिससे प्रक्रिया और धीमी हो सकती है।
केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू स्पष्ट कर चुके हैं कि डेडलाइन बढ़ाने की कोई गुंजाइश नहीं है, क्योंकि यह समय-सीमा सीधे वक्फ अधिनियम में निर्धारित है। उन्होंने कहा, जब तक संसद कानून में संशोधन नहीं करती, तब तक मैं इस डेडलाइन में बदलाव नहीं कर सकता। सरकार का कहना है कि डिजिटल पंजीकरण से वक्फ संपत्तियों पर होने वाले अवैध कब्जे, विवाद, और अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।









